Ayush Mission : झांसी आयुर्वेदिक कॉलेज में दवाओं की 'महाकंगाली' खत्म! शासन से आए लाखों रुपये, जानें कब से मरीजों को मिलेगी 50 तरह की जड़ी-बूटियां और गोलियां!

खबर सार :-
Ayush Mission : राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज झांसी में दवाओं का संकट खत्म। शासन से 15 लाख का बजट मंजूर होने के बाद 20 दिनों में आएंगी 30 नई दवाएं। आयुष मिशन (Ayush Mission) के सहयोग से मरीजों को मिलेगी राहत।
Ayush Mission : झांसी आयुर्वेदिक कॉलेज में दवाओं की 'महाकंगाली' खत्म! शासन से आए लाखों रुपये, जानें कब से मरीजों को मिलेगी 50 तरह की जड़ी-बूटियां और गोलियां!
खबर विस्तार : -

झांसी: बुंदेलखंड के सबसे बड़े सरकारी आयुर्वेद केंद्रों में से एक, राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज (Government Ayurvedic College) झांसी से इलाज कराने वाले हजारों मरीजों के लिए आखिरकार एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले काफी समय से भारी आर्थिक तंगहाली और दवाओं के भीषण टोटे से जूझ रहे इस अस्पताल की किस्मत अब बदलने वाली है। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से बजट की हरी झंडी मिलने के बाद अब मात्र 20 दिनों के भीतर अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर मरीजों को पर्याप्त मात्रा में दवाएं मिलने लगेंगी। अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए अपनी कमर कस ली है और कागजी कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

 बजट लैप्स होने से बढ़ गई थीं मुश्किलें

दरअसल, इस पूरे संकट की कहानी इस साल के शुरुआती महीनों से जुड़ी है। विभागीय सूत्रों और अंदरूनी हलकों से मिली पक्की जानकारी के मुताबिक, मार्च के महीने में राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज का दवाओं के लिए अलॉट हुआ 15 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट तकनीकी कारणों से लैप्स (Lapse) यानी निरस्त हो गया था। बजट डूबने के कारण अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि दूर-दराज के गांवों और कस्बों से आने वाले गरीब मरीजों को सिरदर्द, बुखार, बदन दर्द और गैस जैसी रोजमर्रा (Daily routine) की बेहद सामान्य दवाएं भी नसीब नहीं हो पा रही थीं। डॉक्टर पर्चा लिख रहे थे, लेकिन काउंटर पर बैठे कर्मचारी मजबूरी में हाथ खड़े कर देते थे। मरीज बाहर के प्राइवेट मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर थे, जिससे अस्पताल की साख पर भी बट्टा लग रहा था।

 प्राचार्य की तत्परता और आयुष मिशन का सहारा

जब संकट गहराया तो कॉलेज के प्रधानाचार्य (Principal) ने मामले को खुद अपने हाथों में लिया। उन्होंने बिना वक्त गंवाए शासन स्तर पर ताबड़तोड़ पत्राचार शुरू किया। शुरुआती दौर में राहत देने के लिए उन्होंने आयुष मिशन (Ayush Mission) के तहत तुरंत दवाओं की खेप भेजने की मांग की। प्रधानाचार्य के इस प्रयास का असर यह हुआ कि आयुष मिशन द्वारा फौरी तौर पर 20 तरह की जरूरी दवाएं अस्पताल को उपलब्ध करा दी गईं। इन दवाओं के आने से अस्पताल में आने वाले रोजमर्रा के मरीजों का तात्कालिक संकट तो दूर हो गया, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान था क्योंकि मरीजों की भारी तादाद के आगे यह स्टॉक बहुत कम था।

 मई में मिली दोबारा मंजूरी, दो दिन में शुरू होगा टेंडर

प्रधानाचार्य यहीं नहीं रुके। उन्होंने मार्च में लैप्स हो चुके 15 लाख रुपये के पुराने बजट को दोबारा बहाल कराने के लिए उत्तर प्रदेश शासन को एक बेहद मजबूत पैरवी पत्र लिखा। लगातार किए गए पत्राचार और बैठकों के बाद आखिरकार मई के महीने में शासन ने इस बजट को दोबारा जारी करने की मंजूरी (Budget approval) दे दी। बजट हाथ में आते ही कॉलेज प्रशासन के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब दवाएं खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया (Tender process) को महज दो से तीन दिनों के भीतर शुरू करने का दावा किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि टेंडर फाइनल होते ही 20 दिनों के भीतर अस्पताल के भीतर लगभग 30 नई तरह की आयुर्वेदिक दवाओं की सप्लाई शुरू हो जाएगी।

 चार महीने का कोटा फुल, अब नहीं भटकेंगे मरीज

अस्पताल के जानकारों का कहना है कि आयुष मिशन (Ayush Mission) से मिलीं 20 तरह की दवाएं और अब नए 15 लाख रुपये के बजट से आने वाली 30 अन्य तरह की दवाएं मिलकर कुल 50 श्रेणियों की दवाओं का एक बड़ा स्टॉक तैयार कर देंगी। इतनी दवाएं आने के बाद अगले तीन से चार महीनों के लिए अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता (Medicine availability) को लेकर कोई मारामारी नहीं रहेगी। क्रॉनिक बीमारियों जैसे गठिया, बवासीर, चर्म रोग और पेट के पुराने विकारों से पीड़ित मरीजों को अब अपनी जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

इस पूरे मामले पर राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज झांसी के प्राचार्य डॉक्टर रामकृष्ण राठौड़ (Dr. Ramkrishna Rathore) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया, "मरीजों को परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आयुष मिशन (Ayush Mission) की तरफ से हमें 20 तरह की दवाएं पहले ही मिल चुकी हैं, जिससे रोजमर्रा का काम चल रहा है। शासन से मिले 15 लाख रुपये के बजट से जो अतिरिक्त दवाएं आनी हैं, उनके लिए टेंडर प्रक्रिया (Tender process) बेहद तेजी से शुरू कर दी गई है। हमें पूरी उम्मीद है कि अगले 20 दिन के भीतर सभी दवाएं अस्पताल के स्टोर में उपलब्ध करा दी जाएंगी और व्यवस्था पूरी तरह सुचारू हो जाएगी।"

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