नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस (सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट) की साइबर क्राइम सेल ने सरकारी वेबसाइट्स से धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो नकली सरकारी पोर्टल बनाकर पूरे देश में लोगों को ठग रहा था। इस मामले के सिलसिले में MCA की डिग्री रखने वाले एक आरोपी को उत्तर प्रदेश के इटावा से गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 'Parivahan.online' नाम की एक फर्जी वेबसाइट बनाई थी, जिसे असली सरकारी परिवहन सेवा पोर्टल जैसा ही दिखने के लिए डिजाइन किया गया था। इस वेबसाइट के जरिए लोगों को वाहन की नंबर प्लेट बुक कराने और अन्य सरकारी सेवाओं के बहाने ठगा जा रहा था। एक शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने Google पर "वाहन नंबर प्लेट बुकिंग" सर्च किया था, जिससे वह इस फर्जी वेबसाइट पर पहुंच गया। वेबसाइट को असली मानकर, उसने 1,099 रुपये का ऑनलाइन पेमेंट कर दिया। इसके बाद, उससे बार-बार अलग-अलग बहाने बनाकर और पैसे मांगे गए; इससे उसे शक हुआ और उसने NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा दी।
इसके बाद, साइबर पुलिस स्टेशन (मध्य जिला) में एक FIR दर्ज की गई और जांच शुरू की गई। पुलिस ने डिजिटल फोरेंसिक, बैंक ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड, डोमेन की जानकारी और IP लॉग की जांच की। इससे पता चला कि वेबसाइट को जानबूझकर एक सरकारी पोर्टल जैसा दिखने के लिए डिजाइन किया गया था, ताकि लोगों का भरोसा जीता जा सके और उन्हें ठगा जा सके। तकनीकी जांच में आरोपी का मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल निशान मिले, जिससे उसकी पहचान इटावा के रहने वाले अंशुल यादव के रूप में हुई। पुलिस ने बताया कि आरोपी अंशुल यादव के पास MCA की डिग्री है और उसे वेबसाइट डिजाइनिंग, डोमेन होस्टिंग, बैकएंड मैनेजमेंट और पेमेंट गेटवे इंटीग्रेशन में तकनीकी महारत हासिल है। अपनी इसी महारत का इस्तेमाल करके, वह फर्जी वेबसाइटें बनाता था और उन्हें साइबर ठगों को बेच देता था।
जांच में यह भी पता चला कि इस रैकेट का इस्तेमाल पूरे देश में लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था, जिसके लिए इस गिरोह से जुड़े कई बैंक खातों और फर्जी वेबसाइटों का इस्तेमाल किया जाता था। इन धोखाधड़ियों से मिली रकम को "म्यूल" (बिचौलिये) बैंक खातों का इस्तेमाल करके अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस ने आरोपी के पास से दो लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, फर्जी वेबसाइट की सोर्स फाइलें, लॉगिन क्रेडेंशियल, पासवर्ड और डोमेन से जुड़े दस्तावेज़ बरामद किए हैं।
पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य साथियों की पहचान की जांच कर रही है, बैंक खातों के लेन-देन का विश्लेषण कर रही है और पूरे नेटवर्क के अंतर-राज्यीय संपर्कों की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य पीड़ितों की पहचान करने के प्रयास भी जारी हैं। दिल्ली पुलिस ने इसे एक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क बताया है, जो सरकारी डिजिटल सेवाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा था।
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