बांदा में महिला उत्पीड़न: कचहरी से न्याय की उम्मीद लेकर आई महिला के साथ दरिंदगी, मदद के नाम पर रची गई खौफनाक साजिश

खबर सार :-

बांदा कचहरी से न्याय की आस लेकर आई एक महिला के साथ उसके ही परिचित ने नौकरी का झांसा देकर नशीला पदार्थ पिलाया और फिर बलात्कार किया। आरोपी यशवंत राणा वारदात के बाद से फरार है।
कोल्डड्रिंक में मिलाकर पिलाया नशीला पदार्थ, बेहोशी हालत में किया बलात्कार!

खबर विस्तार : -

Banda: अक्सर हम सुनते हैं कि मुसीबत के वक्त इंसान तिनके का सहारा भी ढूँढता है, लेकिन बांदा की इस घटना ने उन लोगों के जमीर को झकझोर दिया है जो 'मदद' जैसे पवित्र शब्द को अपनी हवस का जरिया बनाते हैं। बांदा कचहरी का गलियारा अक्सर उन लोगों की आखिरी उम्मीद होता है जो कानून की शरण में अपनी सुरक्षा ढूंढने आते हैं। लेकिन जब यही कचहरी एक ऐसी साजिश का केंद्र बन जाए, जहाँ किसी की बेबसी को ही हथियार बना लिया जाए, तो सवाल खड़ा होता है कि हम किस समाज की तरफ बढ़ रहे हैं? यह कोई महज एक मामला नहीं है, बल्कि बांदा में महिला उत्पीड़न की वह कड़वी सच्चाई है जो हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे आसपास दोस्त के रूप में कितने चेहरे छिपे हैं।

नौकरी का लालच और नशीली साजिश

मामला नगर कोतवाली इलाके का है। एक महिला जो अपने पति की प्रताड़ना से टूटकर घर से निकली थी, उसे लगा था कि शहर की फिजाओं में शायद उसे कोई रास्ता मिल जाएगा। इसी दौरान ललित उर्फ यशवंत राणा का सामना हुआ। ललित, जो उसी के गांव का था, उसने बड़ी सादगी से महिला का भरोसा जीता। नौकरी और आर्थिक सहारा देने का जो जाल उसने बुना, उसमें वह महिला अनजाने में ही फंस गई। यह सिर्फ एक बलात्कार का मामला नहीं है, बल्कि यह बांदा में महिला उत्पीड़न का वह क्रूर चेहरा है जो भरोसे को तार-तार कर देता है। कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उस महिला को बेसुध करने की योजना यह दर्शाती है कि आरोपी ने इस जघन्य कृत्य को कितनी ठंडी आँखों से अंजाम देने की तैयारी की थी।

बंद कमरों की खामोश चीखें

महिला जब होश में आई, तो उसने खुद को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर भी मृत पाया। उसके शरीर के घाव और दांतों के निशान उस दरिंदगी की कहानी कह रहे थे, जिसे वह शायद कभी शब्दों में बयां न कर पाए। जब उसने हिम्मत जुटाकर रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही, तो आरोपी ने तमंचा दिखाकर जो धमकी दी, वह यह साबित करती है कि अपराधियों के मन में कानून का कितना कम डर रह गया है। यह घटना दर्शाती है कि बांदा में महिला उत्पीड़न के मामले अब कितने वीभत्स और डरावने होते जा रहे हैं। पीड़िता के बदन का हर जख्म समाज की उस संवेदनहीनता को भी बयां कर रहा है, जो अक्सर ऐसी घटनाओं को महज एक 'न्यूज' समझकर आगे बढ़ जाता है।

पुलिस की बेरुखी और सवाल खड़े होते सिस्टम

इस पूरे घटनाक्रम में एक और पहलू गौर करने लायक है - वह है पुलिस का रवैया। जब पीड़िता ने न्याय के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया और बाद में इंस्पेक्टर से संपर्क साधने की कोशिश की, तो फोन का न उठना कई संदेह पैदा करता है। हालांकि एफआईआर दर्ज हो चुकी है, लेकिन आरोपी का फरार होना सिस्टम की सुस्ती को बयां करता है। बांदा में महिला उत्पीड़न की यह घटना केवल एक एफआईआर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जब तक ललित उर्फ यशवंत राणा जैसे अपराधी सलाखों के पीछे नहीं होंगे, तब तक न तो पीड़ित को न्याय मिलेगा और न ही समाज में कोई सुरक्षा का संदेश जाएगा। यह मामला अब पूरे जिले के लिए एक चेतावनी है।

यह भी पढ़ें  : सरकारी गाड़ियां उमर को ले जा रहीं थीं, पीछे उसके समर्थकों ने बना रखा था काफिला, दो लग्जरी कारें जब्त

अन्य प्रमुख खबरें