रामलला चढ़ावा विवाद और अनुपूरक बजट को लेकर UP विधानसभा में हंगामा, कार्यवाही स्थगित
खबर सार :-
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने रामलला चढ़ावा विवाद पर चर्चा की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। बढ़ते हंगामे के बीच कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
खबर विस्तार : -
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को कार्यवाही शुरू होते ही सदन का माहौल गरमा गया। विपक्षी दलों, विशेषकर के सदस्यों ने अयोध्या के रामलला चढ़ावा विवाद पर तत्काल चर्चा कराने की मांग को लेकर सदन के भीतर और बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस गतिरोध के चलते सदन की नियमित कार्यसूची बाधित हुई और विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी।
नियम 311 पर असहमति और नारेबाजी
सत्र की शुरुआत में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने नियम 311 के अंतर्गत रामलला चढ़ावा विवाद पर चर्चा कराने का औपचारिक प्रस्ताव रखा। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस नियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला तात्कालिक प्रकृति का नहीं है, इसलिए इस नियम के तहत तुरंत चर्चा की अनुमति नहीं दी जा सकती। अध्यक्ष के इस निर्णय से असंतुष्ट विपक्षी विधायक अपनी सीटों पर खड़े हो गए और नारेबाज़ी शुरू कर दी। विपक्ष के विरोध के बीच वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का इतिहास आस्था के प्रति नकारात्मक रहा है, उन्हें इस विषय पर राजनीति करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है, इसलिए इस पर सदन के भीतर चर्चा कराना नियमों के अनुकूल नहीं है। सरकार की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि इस प्रकरण की जांच के लिए पहले ही एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जा चुका है और इस मामले में संलिप्त लोगों पर कानूनी कार्रवाई की गई है।
सड़क से लेकर सदन तक प्रदर्शन
सदन के भीतर हंगामे से पहले समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के विधायकों ने विधान भवन परिसर में स्थित चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के समक्ष एकत्र होकर प्रदर्शन किया। उनके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर शिक्षक भर्ती में आरक्षण, नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दों और राम मंदिर चढ़ावा विवाद का उल्लेख था। विपक्षी सदस्यों का आरोप था कि सरकार जनता से जुड़े बुनियादी और संवेदनशील मुद्दों पर पारदर्शी जवाब देने से बच रही है।
वित्तीय प्रबंधन और अनुपूरक बजट पर सवाल
दूसरी ओर, इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की वित्तीय नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जो प्रशासन अपने निर्धारित मूल बजट का बड़ा हिस्सा तय समय में खर्च नहीं कर पाया, वह अनुपूरक बजट लाकर केवल अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता विकास कार्यों में पारदर्शिता और बेहतर वित्तीय प्रबंधन की उम्मीद करती है। इन तमाम आलोचनाओं के बीच राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट सदन के पटल पर रखा। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट पेश किए जाने के दौरान कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य अधूरी पड़ी विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करना और जनहित से जुड़ी योजनाओं को सुचारू रूप से गति प्रदान करना है। सरकार का यह दावा है कि इस वित्तीय प्रावधान से राज्य के बुनियादी ढांचे और विकास की गति को और अधिक मजबूती मिलेगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह मानसून सत्र कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और नीतिगत चर्चाओं के साथ शुरू हुआ है। सत्र के शुरुआती दिनों में ही विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक नियुक्तियों और वित्तीय प्राथमिकताओं को लेकर तीखी रस्साकशी देखने को मिल रही है। विपक्ष जहां विभिन्न समसामयिक प्रकरणों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष विकास कार्यों और कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देकर विपक्ष के दावों का प्रतिकार कर रहा है।
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