यूपी में ड्रग तस्करी पर शिकंजा, स्कूल-कॉलेजों के 500 मीटर दायरे में बनेगा सख्त ‘ड्रग फ्री जोन’

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश में ड्रग तस्करी पर शिकंजा कसने की तैयारी। स्कूल-कॉलेजों के 500 मीटर दायरे को ड्रग फ्री जोन बनाया जाएगा। 2026 में अब तक 3,737 मुकदमे और 5,390 गिरफ्तारियां।
ड्रग तस्करी पर शिकंजा! यूपी में बनेंगे ड्रग फ्री जोन

खबर विस्तार : -

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सरकार ने निगरानी और कार्रवाई का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। स्कूल-कॉलेजों के आसपास 500 मीटर के दायरे को सख्त ‘ड्रग फ्री जोन’ के रूप में घोषित कर प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही मादक पदार्थों के चिन्हित हॉट स्पॉट पर नियमित निगरानी और सघन कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने शुक्रवार को नारकोटिक्स कंट्रोल एवं समन्वय तंत्र (एनकॉर्ड) की राज्य स्तरीय समिति की तृतीय बैठक में अधिकारियों को ये निर्देश दिए। बैठक में प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी एवं अवैध व्यापार पर नियंत्रण, नशा मुक्ति एवं जागरूकता अभियान, जब्त मादक पदार्थों के निस्तारण तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की समीक्षा की गई।

हॉट स्पॉट की लगातार होगी निगरानी

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिन्हित हॉट स्पॉट की लगातार निगरानी की जाए और इन क्षेत्रों की संवेदनशीलता कम करने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी कदम उठाए जाएं। अधिकारियों को मादक पदार्थों के परिवहन, तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ सघन कार्रवाई करने तथा अधिकतम बरामदगी और गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कमिश्नरेट और जनपद स्तर पर अवैध कारोबार के स्रोत, नेटवर्क और वितरण तंत्र को चिन्हित कर कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया।

स्कूल-कॉलेजों में चलेगा जागरूकता अभियान

बैठक में युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में नियमित रूप से नशा मुक्ति एवं जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। इसके तहत विद्यार्थियों को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों और नशे की लत से बचाव के बारे में जागरूक करने पर जोर रहेगा। सरकार की ओर से स्कूल-कॉलेजों के आसपास 500 मीटर क्षेत्र को ‘ड्रग फ्री जोन’ के रूप में प्रभावी तरीके से लागू करने की योजना पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास मादक पदार्थों की बिक्री, वितरण और सेवन की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाना है।

प्री-कर्सर रसायनों पर भी नजर

मुख्य सचिव ने प्री-कर्सर रसायनों, एसीटिक एनहाइड्राइड, नियंत्रित पदार्थों और नशीली दवाओं के दुरुपयोग तथा अवैध डायवर्जन पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए उन स्रोतों और नेटवर्क तक पहुंचने की रणनीति पर जोर दिया गया, जहां से मादक पदार्थों की आपूर्ति संचालित होती है। इसके साथ ही एनडीपीएस एक्ट के तहत निरोधात्मक कार्रवाई को प्रभावी बनाने और अवैध मादक पदार्थों से अर्जित संपत्तियों की पहचान एवं जब्ती की कार्रवाई में तेजी लाने को कहा गया। जब्त मादक पदार्थों का निस्तारण निर्धारित एसओपी के अनुसार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

नशे से प्रभावित युवाओं के पुनर्वास पर जोर

बैठक में केवल कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय नशे से प्रभावित युवाओं की काउंसलिंग और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। अधिकारियों को नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को उपचार, परामर्श और पुनर्वास से जोड़ने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

10 प्रमुख हॉट स्पॉट चिन्हित

बैठक में आईजी एएनटीएफ अब्दुल हमीद ने राज्य में मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक 563 जिला स्तरीय गोष्ठियां आयोजित की जा चुकी हैं। पिछले 10 वर्षों में मादक पदार्थों की जब्ती से संबंधित विश्लेषण के आधार पर लखनऊ, कानपुर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, आगरा, बरेली, शामली, बाराबंकी, सहारनपुर और सोनभद्र को प्रमुख हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक क्षेत्र में 20 हाई वैल्यू टारगेट चिन्हित किए गए हैं।

2026 में अब तक 3,737 मुकदमे, 5,390 गिरफ्तारियां

आईजी एएनटीएफ के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक प्रदेश में एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,737 अभियोग दर्ज किए गए हैं और 5,390 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, प्रदेश स्तर पर अब तक करीब 78 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक समन्वित तरीके से आगे बढ़ाया जाए। हॉट स्पॉट की निगरानी, नेटवर्क की पहचान, संपत्ति जब्ती, जागरूकता अभियान और नशा मुक्ति एवं पुनर्वास के प्रयासों को साथ लेकर चलने पर जोर दिया गया।

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