तमिलनाडु में जनगणना का पहला चरण आज से शुरू, घर-घर जाकर कर्मचारी करेंगे डिजिटल सर्वे
खबर सार :-
तमिलनाडु में जनगणना के पहले चरण की शुरुआत 1 अगस्त से हो रही है। इसके तहत जनगणना कर्मी घर-घर जाकर नागरिकों से जरूरी जानकारी इकट्ठा करेंगे। इस कार्य के लिए 1.15 लाख से ज्यादा कर्मचारी शामिल हैं। खास बात यह है कि पहली बार जनगणना का कार्य पूरी तरह डिजिटल है। इसमें एक खास मोबाइल ऐप के इस्तेमाल से डेटा का संकलन किया जाएगा।
खबर विस्तार : -
चेन्नई: तमिलनाडु शनिवार को 'हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस' (घरों की सूची बनाने और आवास जनगणना) शुरू करने जा रहा है। यह 'सेंसस 2027' के पहले चरण की शुरुआत है, जिसमें पूरे राज्य में एक महीने तक चलने वाला घर-घर जाकर गिनती करने का अभियान शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना प्रक्रिया में 1.15 लाख से ज्यादा गणना करने वाले कर्मचारी (एन्यूमरेटर) शामिल होंगे।
1 अगस्त से 30 अगस्त तक चलने वाले इस फील्ड ऑपरेशन में तमिलनाडु के हर घर को शामिल किया जाएगा। इस काम के लिए 1,026 प्रशासनिक क्षेत्रों में लगभग 1.2 लाख हाउसलिस्टिंग ब्लॉक बनाए गए हैं।
पूरे राज्य में लगभग 19,000 सुपरवाइजर तैनात
गिनती की प्रक्रिया की देखरेख और कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरे राज्य में लगभग 19,000 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। गणना करने वाले कर्मचारी 33-बिंदुओं वाली प्रश्नावली के आधार पर जानकारी इकट्ठा करने के लिए हर घर जाएंगे। इन सवालों में आवास की स्थिति, मालिकाना हक, निर्माण सामग्री, पीने के पानी की सुविधा, स्वच्छता, बिजली, खाना पकाने का ईंधन, संचार सुविधाएं और अन्य बुनियादी सुविधाओं जैसी बातें शामिल होंगी।
मोबाइल ऐप से इकट्ठा किया जाएगा डेटा
इस चरण के दौरान इकट्ठा किया गया डेटा जनसंख्या जनगणना के लिए आधार का काम करेगा और भविष्य की योजना बनाने और नीति बनाने में मदद करेगा। देश की जनगणना के इतिहास में पहली बार, पारंपरिक कागज आधारित तरीके के बजाय एक खास मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके डेटा इकट्ठा किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि तकनीक पर आधारित इस प्रक्रिया से डेटा की सटीकता बढ़ने, प्रोसेसिंग का समय कम होने, गलतियां कम होने और जानकारी का प्रबंधन आसान होने की उम्मीद है।
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सेल्फ-एन्यूमरेशन को मिला अच्छा रिस्पॉन्स
इकट्ठा की गई जानकारी सरकारों को आवास की स्थिति का आकलन करने, बुनियादी ढांचे की कमियों की पहचान करने और विश्वसनीय सांख्यिकीय डेटा के आधार पर विकास कार्यक्रम बनाने में मदद करेगी। तमिलनाडु में शुरू की गई नई 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' (खुद से जानकारी भरने) सुविधा को लॉन्च से पहले ही अच्छा रिस्पॉन्स मिला। 17 जुलाई से 31 जुलाई के बीच, 10 लाख से ज्यादा परिवारों ने जनगणना के सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी ऑनलाइन जमा की। अधिकारियों ने ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने वालों को सलाह दी है कि जब गणना करने वाला कर्मचारी (डेटा इकट्ठा करने वाला अधिकारी) आए, तो वे सत्यापन के लिए अपना 'सेल्फ-एन्यूमरेशन आइडेंटिफिकेशन नंबर' तैयार रखें।
पूरी तरह गोपनीय रहेगा जनगणना का डेटा
जिन परिवारों ने ऑनलाइन सुविधा का इस्तेमाल नहीं किया, उन्हें भी घर-घर जाकर किए जाने वाले सर्वे में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों ने फिर से कहा कि जनगणना के दौरान इकट्ठा की गई सभी जानकारी 'जनगणना अधिनियम, 1948' के प्रावधानों के तहत सुरक्षित है और पूरी तरह गोपनीय रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि डेटा का डिजिटल कलेक्शन और प्रोसेसिंग 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट' के नियमों के अनुसार है, जिससे यह पक्का होता है कि नागरिकों की जानकारी का इस्तेमाल सिर्फ़ सांख्यिकीय विश्लेषण, सार्वजनिक नीति बनाने और विकास की योजना बनाने के लिए ही किया जाएगा।
FAQ
1- तमिलनाडु में कब से शुरु होगी जनगणना?
तमिलनाडु में जनगणना का पहला चरण 1 अगस्त 2026 से शुरू होगा।
2- जनगणना में किस प्रकार के सवाल होंगे शामिल?
जनगणना के तहत नागरिकों के लिए 33 सवालों की सूची तैयार की गई है। जिनमें घर की स्थिति, बिजली समेत बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ली जाएगी।
3- किस तरह होगा डेटा का इस्तेमाल?
जनगणना से प्राप्त डेटा का इस्तेमाल सरकारें विकासपरक नीतियां बनाने के लिए करती हैं।
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