सोनभद्र में आदिवासियों के हक के लिए उतरी भारतीय किसान यूनियन, कमिश्नर को सौंपा 11 सूत्रीय मांग पत्र, भ्रष्टाचार और बदहाली पर उठाए तीखे सवाल
खबर सार :-
सोनभद्र में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने विंध्याचल मंडलायुक्त को आदिवासियों की समस्याओं और राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। बिजली, सड़क, पानी और आवास योजना के लाभ के लिए त्वरित कार्रवाई की मांग।
खबर विस्तार : -
सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा से जूझ रहे आदिवासियों की आवाज अब और बुलंद हो गई है। भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) (अराजनैतिक) के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी। जिला अध्यक्ष संतोष साहनी की अगुवाई में यूनियन के पदाधिकारियों ने विंध्याचल मंडलायुक्त (Vindhyachal Commissioner) से मुलाकात की और सोनभद्र के आदिवासी मुद्दों (Sonbhadra Tribal Issues) को लेकर एक 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। इस मांग पत्र में दूरदराज के आदिवासी इलाकों में व्याप्त भ्रष्टाचार, बदहाल बुनियादी ढांचे और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर किया गया है। यूनियन के पदाधिकारियों ने साफ तौर पर कहा कि Sonbhadra Tribal Issues का समय पर समाधान न होना बेहद निराशाजनक है।
राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार और जमीनी अधिकार
सोनभद्र के जुगैल, खरहरा और जोरबा जैसे सुदूर वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के आदिवासी अधिकार (Tribal Rights) आज भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष संतोष साहनी ने सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि Sonbhadra Tribal Issues का सबसे बड़ा कारण निचले स्तर पर फैला भारी भ्रष्टाचार है। चकबंदी प्रपत्र-5, वरासत दर्ज कराने और दाखिल-खारिज जैसी महत्वपूर्ण राजस्व प्रक्रियाओं में लेखपालों से लेकर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अवैध वसूली का खेल खेला जा रहा है। राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार (Corruption in Revenue Department) के कारण गरीब आदिवासियों को अपनी ही पुश्तैनी जमीनों के मालिकाना हक के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। संगठन ने आदिवासियों की असंक्रमणीय भूमि को अविलंब नियमानुसार संक्रमणीय (भूमिधरी अधिकार) घोषित करने की मांग भी उत्थापित की है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी और अंधेरे में डूबे गांव
अधिकारियों के सामने रखी गई समस्याओं में सबसे हैरान करने वाली सच्चाई बिजली आपूर्ति से जुड़ी है। देश के विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जुगैल ग्राम सभा के झरपिया टोले और खरहरा के एक टोले में आज तक बिजली के खंभे तक नहीं लग सके हैं। वहां का ग्रामीण बुनियादी ढांचा (Rural Infrastructure) इस कदर उपेक्षित है कि दर्जनों परिवार आज भी ढिबरी और मोमबत्ती के सहारे अंधेरे में रात गुजारने को विवश हैं। यूनियन के पदाधिकारियों ने चिंता जताते हुए कहा कि Sonbhadra Tribal Issues में बिजली की यह घोर किल्लत सीधे तौर पर प्रशासन की उदासीनता को बयां करती है। इसके अलावा जोरबा गांव में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा है। पिछले साल बरसात में बह चुकीं पीडब्ल्यूडी की सड़कें, अधूरी नालियां और कई टोलों में खड़ंजा न होने की वजह से पूरा इलाका मुख्यधारा से कटा हुआ है।
जन कल्याणकारी योजनाओं से वंचित गरीब और मंडलायुक्त का निर्देश
किसान नेताओं ने जोर देकर कहा कि Sonbhadra Tribal Issues सिर्फ बुनियादी ढांचे तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक कल्याण की योजनाओं की विफलता से भी जुड़े हैं। क्षेत्र के सैकड़ों पात्र अत्यंत गरीब, विधवा महिलाएं और दिव्यांग परिवार प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हैं। इसके साथ ही, कई जरूरतमंद छूटे हुए आदिवासी परिवारों और स्थानीय पत्रकारों के आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड भी अब तक नहीं बन पाए हैं। संगठन का स्पष्ट कहना है कि Sonbhadra Tribal Issues का स्थायी समाधान तभी संभव है जब योजनाओं का लाभ बिना किसी रिश्वतखोरी के सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनने के बाद विंध्याचल मंडलायुक्त (Vindhyachal Commissioner) ने माना कि Sonbhadra Tribal Issues के निस्तारण के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने मौके पर ही संबंधित विभागों के आला अधिकारियों को इन सभी 11 बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए। दूसरी ओर, भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन मांगों पर धरातल पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आया, तो वे आदिवासियों के हक के लिए उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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