दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका : भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन खाना खिलाने और चिकित्सा सहायता देने की मांग

खबर सार :-

दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन लिक्विड डाइट देकर उनकी जान बचाने की मांग की गई है। जानिए क्या है पूरा मामला।
दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका : भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जबरन खाना खिलाने और चिकित्सा सहायता देने की मांग

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: देश की शिक्षा व्यवस्था (Education System) में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। अब इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) का दरवाजा खटखटाया गया है। अदालत में एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation) दायर कर केंद्र और दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें, सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराएं और उन्हें जबरन लिक्विड डाइट (Liquid Diet) देकर उनकी जान बचाएं।

दो दिनों के भीतर जान जाने का खतरा: याचिकाकर्ता

यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी की ओर से दायर की गई है। कोर्ट में दाखिल की गई इस याचिका (Petition) में कहा गया है कि पिछले कई दिनों से अन्न-जल त्यागने के कारण सोनम वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलोग्राम तक घट गया है। उनकी शारीरिक स्थिति बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। याचिकाकर्ता का दावा है कि अगर उनकी यह भूख हड़ताल (Hunger Strike) अगले दो दिनों तक इसी तरह जारी रही, तो उनके अंग काम करना बंद कर सकते हैं और उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। याचिका में जोर देकर कहा गया है कि यदि इस अनशन के दौरान सोनम वांगचुक को कुछ होता है, तो यह पूरे देश और वैश्विक स्तर पर भारत के लिए बेहद शर्मिंदगी की बात होगी।

सरकार के रवैये पर उठाए गंभीर सवाल

याचिका के जरिए सरकार की संवेदनहीनता पर भी कड़े सवाल खड़े किए गए हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि देश की हुकूमत एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ बेहद कड़ा और उदासीन रवैया अपना रही है, मानो वे कोई गंभीर अपराधी या देशद्रोही हों। सरकार उनकी गिरती सेहत को लेकर पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठी है। याचिका में अदालत से अपील की गई है कि कम से कम मानवीय आधार पर सरकार को तुरंत कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं। प्रशासन को चाहिए कि वह वांगचुक को किसी बड़े सरकारी अस्पताल में ले जाए और डॉक्टरों की देखरेख में उनके शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व, विटामिन और मिनरल्स जैसे जरूरी लिक्विड डाइट (Liquid Diet) उन्हें जबरन देना शुरू करे।

'अदालतों का जमीर अभी जिंदा है'

अदालत के सामने अपनी बात रखते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि आम जनता के बीच अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि देश का जमीर मर चुका है, लेकिन उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि अदालतों का जमीर अभी जिंदा है। इसी उम्मीद के साथ यह जनहित याचिका (Public Interest Litigation) दाखिल की गई है ताकि कोर्ट के आदेश से एक बड़े आंदोलनकारी की जिंदगी बचाई जा सके।

क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक पिछले 28 जून से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर हैं। वे कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party) नामक एक संगठन द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। यह संगठन बीते 20 जून से लगातार दिल्ली में प्रदर्शन कर रहा है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यह है कि देश में हाल ही में हुए कथित प्रश्नपत्र लीक (Question Paper Leaks) मामलों की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से तुरंत इस्तीफा दें।

आपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party) की शुरुआत अमेरिका के बोस्टन में रहने वाले डिपके नाम के शख्स ने की थी। सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक आंदोलन के रूप में शुरू हुए इस ग्रुप को युवाओं का बड़ा समर्थन मिला है। यह संगठन राजनीतिक व्यंग्य के जरिए देश में बेरोजगारी, संस्थागत जवाबदेही और मीडिया की आजादी जैसे गंभीर मुद्दों पर आवाज उठाता रहा है। फिलहाल, सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) पर टिकी हैं कि वह सोनम वांगचुक की जिंदगी से जुड़ी इस बेहद संवेदनशील याचिका पर क्या फैसला सुनाता है।

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