West Bengal: शिक्षकों के ट्रांसफर पर सरकार का बड़ा फैसला, छात्र-शिक्षक अनुपात बनेगा तबादले का आधार
खबर सार :-
पश्चिम बंगाल सरकार ने शिक्षकों के तबादले पर बड़ा फैसला लेते हुए नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। नई व्यवस्था के तहत अब स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर तबादले की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
खबर विस्तार : -
कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी सहायता प्राप्त और प्रायोजित स्कूलों में शिक्षकों का समान बंटवारा सुनिश्चित करने के लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है।
नई व्यवस्था के तहत, जिन स्कूलों में कोई छात्र नहीं है या जहां जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं, वहां से शिक्षकों और शिक्षा कर्मचारियों को उन स्कूलों में भेजा जाएगा जहाँ शिक्षकों की कमी है।
छात्र-शिक्षक अनुपात पर होगा ट्रांसफर
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि जिन स्कूलों में कोई छात्र नहीं है, वहां शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है; ऐसे सभी कर्मचारियों को उन स्कूलों में भेजा जाएगा जहां उनकी जरूरत है। इसी तरह, जिन स्कूलों में तय संख्या से ज्यादा शिक्षक हैं, वहां के अतिरिक्त शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में तैनात किया जाएगा। ट्रांसफर की प्रक्रिया छात्र-शिक्षक अनुपात पर आधारित होगी। उन स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को प्राथमिकता दी जाएगी जहाँ छात्र-शिक्षक अनुपात ज्यादा है।
शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों की बनेगी सूची
सेकेंडरी स्कूलों के लिए डिस्ट्रिक्ट इंस्पेक्टर (DI) ऑफ स्कूल्स और प्राइमरी स्कूलों के लिए डिस्ट्रिक्ट प्राइमरी स्कूल काउंसिल (DPSC) उन स्कूलों की सूची जारी करेंगे, जहां शिक्षकों की कमी है। इस सूची में स्कूल का नाम, जिला, ब्लॉक, जरूरी शिक्षकों की संख्या और सेकेंडरी व हायर सेकेंडरी स्तर पर विषय-वार खाली पदों जैसी जानकारी शामिल होगी।
हेड टीचर का नहीं होगा ट्रांसफर
नई व्यवस्था के तहत, प्राइमरी स्कूलों के हेड टीचर को अतिरिक्त कर्मचारी नहीं माना जाएगा। हालांकि, जरूरतों के आधार पर असिस्टेंट टीचर को अतिरिक्त माना जा सकता है और उनका ट्रांसफर किया जा सकता है।
बिना छात्रों वाले स्कूलों से स्थानंतरित होंगे शिक्षक
SOP में यह भी कहा गया है कि अगर किसी ऐसे स्कूल से सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का ट्रांसफर कर दिया जाता है जहां कोई छात्र नहीं है, तो स्कूल की इमारत और अन्य संपत्तियों की जिम्मेदारी अस्थायी रूप से संबंधित सब-इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स की होगी। उन्हें उच्च अधिकारियों को स्कूल की संपत्तियों की पूरी इन्वेंट्री सौंपनी होगी। सेकेंडरी स्तर के जिन स्कूलों में कोई छात्र नहीं है लेकिन शिक्षण के स्वीकृत पद हैं, उन पदों को खत्म कर दिया जाएगा और शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में फिर से आवंटित किया जाएगा।
शिक्षक संघों ने जताई विवाद की आशंका
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस कदम का मकसद राज्य के शिक्षण कार्यबल का संतुलित और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना है, ताकि शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में शिक्षा में कोई रुकावट न आए। हालांकि, शिक्षक संघों के एक वर्ग ने ट्रांसफर की प्रक्रिया और सीनियरिटी के आधार पर अतिरिक्त शिक्षकों के निर्धारण को लेकर भविष्य में विवाद की आशंका जताई है।
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