Tamil Nadu: सूखे और फसलों की बर्बादी से जूझ रहे गांव, भवानीसागर बांध से नहरों में समान पानी छोड़ने की मांग
खबर सार :-
तमिलनाडु के इरोड, तिरुपुर और करूर जिलों में खेती-किसानी के लिए भवानीसागर बांध पानी का मुख्य स्त्रोत है। लेकिन, इस बांध के पानी को अलग-अलग समय में नहरों में छोड़ा जाता है। लोअर भवानी नहर में पानी अगस्त महीने में मिलता है, जिससे फसलें सूख रही हैं और कई गांवों को पीने के पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने बांध से नहरों में समान रूप से पानी के बंटवारे की मांग की है।
खबर विस्तार : -
इरोड: लोअर भवानी सिंचाई क्षेत्र के किसानों के एक बड़े समूह ने भवानीसागर बांध से निकलने वाली तीन मुख्य नहर प्रणालियों के बीच सिंचाई के पानी के समान बंटवारे की मांग की है।
उन्होंने तमिलनाडु सरकार से पानी छोड़ने के मौजूदा अलग-अलग समय वाले शेड्यूल को खत्म करने और लोअर भवानी, थडापल्ली-अरकनकोट्टई और कलिंगरायन नहर योजनाओं में एक साथ पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने की अपील की है। यह मांग किसानों की एक बैठक के दौरान उठाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग समय पर पानी छोड़ने के मौजूदा तरीके से 'लोअर भवानी कमांड एरिया' को काफी नुकसान हुआ है।
बर्बाद हो रहीं फसलें
मौजूदा शेड्यूल के तहत, थडापल्ली-अरकनकोट्टई नहर को अप्रैल में और कलिंगरायन नहर को जून में पानी मिलता है, जबकि लोअर भवानी नहर को पानी सिर्फ अगस्त में मिलता है। तब तक खेती का अहम मौसम शुरू हो चुका होता है। किसानों का कहना है कि सिंचाई का पानी देर से मिलने के कारण पिछले कुछ सालों में बार-बार फसलें बर्बाद हुई हैं और भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। पानी के इस असमान बंटवारे के कारण लोअर भवानी क्षेत्र में धान की खेती के आठ चक्र और दाल की खेती के 16 चक्र का नुकसान हुआ है।
कई गांवों में पीने के पानी की किल्लत
किसानों ने बताया कि यह इलाका अभी गंभीर सूखे से जूझ रहा है और कई गांवों में पीने के पानी की भारी कमी हो गई है। भवानीसागर बांध तमिलनाडु के सबसे अहम सिंचाई जलाशयों में से एक है, जो इरोड, तिरुप्पुर और करूर जिलों में खेती के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। यह जलाशय हजारों हेक्टेयर जमीन की सिंचाई करता है, जहां धान, गन्ना, हल्दी, केला और नारियल जैसी फसलें उगाई जाती हैं। यह इलाके के लाखों लोगों के लिए पीने के पानी का भी एक अहम स्रोत है।
खेती के रकबे के अनुसार पानी छोड़ने की मांग
स्थायी समाधान की मांग करते हुए, किसानों ने जल संसाधन विभाग से अपील की कि वे मौजूदा रोटेशनल शेड्यूल के बजाय हर नहर प्रणाली के तहत खेती वाले इलाके के आधार पर सिंचाई का पानी आवंटित करें। उन्होंने जल न्यायाधिकरण (Water Tribunal) के नियमों के अनुसार तीनों नहर योजनाओं में एक साथ पानी छोड़ने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था से निष्पक्षता सुनिश्चित होगी और पानी के बंटवारे को लेकर बार-बार होने वाले विवादों को रोका जा सकेगा।
पानी वितरण में देरी से खराब हो रही खेती
लोअर भवानी सिंचाई किसान संघ के नेता वी. नल्लासामी ने कहा कि किसान अब सिंचाई का पानी देर से और भेदभावपूर्ण तरीके से छोड़े जाने को बर्दाश्त नहीं करेंगे, क्योंकि इससे इलाके में खेती पर बार-बार बुरा असर पड़ा है। उन्होंने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से आग्रह किया कि वे पानी का समान और समय पर वितरण सुनिश्चित करें, ताकि तीन नहर प्रणालियों से जुड़े किसानों को उनका उचित हिस्सा मिल सके और वे बिना किसी अनिश्चितता के अपनी खेती की योजना बना सकें।
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