बीएचयू में खुलेगा नया फिजियोथेरेपी और ऑक्युपेशनल थेरेपी केंद्र, पूर्वांचल समेत कई राज्यों के मरीजों को मिलेगा आधुनिक पुनर्वास उपचार
खबर सार :-
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में जल्द ही Center for Physiotherapy and Occupational Therapy की स्थापना होगी। कार्यकारिणी परिषद से प्रस्ताव पास होने के बाद अब पूर्वांचल के मरीजों को आधुनिक पुनर्वास चिकित्सा और उपचार की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
खबर विस्तार : -
वाराणसी: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और शैक्षणिक राजधानी कहे जाने वाले वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से एक बेहद सकारात्मक और बड़ी खबर सामने आई है। चिकित्सा जगत में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान रखने वाले बीएचयू में जल्द ही "सेंटर फॉर फिजियोथेरेपी एवं ऑक्युपेशनल थेरेपी" (Center for Physiotherapy and Occupational Therapy) की स्थापना होने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद की ओर से हरी झंडी मिल चुकी है। 27 मई को आयोजित कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक में इस विशेष केंद्र से जुड़े प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई थी। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और पुनर्वास सेवाओं के लिहाज से इस केंद्र की स्थापना को संस्थान की एक युगांतकारी और बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
चिकित्सा संकाय और कुलपति के प्रयासों से मिली सफलता
इस नई और दूरगामी परियोजना के बारे में विस्तार से बात करते हुए चिकित्सा संकाय के प्रमुख प्रो. (डॉ.) संजय गुप्ता ने बताया कि इस केंद्र की स्थापना का रास्ता विश्वविद्यालय प्रशासन के सामूहिक प्रयासों से साफ हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी का इस परियोजना को लेकर बेहद सकारात्मक दृष्टिकोण रहा है। उनके निरंतर मार्गदर्शन, रुचि और मजबूत समर्थन के कारण ही इस प्रस्ताव को इतनी जल्दी और सुचारू रूप से स्वीकृति मिल सकी। प्रो. गुप्ता का मानना है कि यह केंद्र न केवल चिकित्सा शिक्षा (medical education) के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि उच्च स्तरीय अनुसंधान (research) और गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास सेवाओं को भी एक बिल्कुल नई दिशा प्रदान करेगा। इससे आने वाले समय में गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को विश्वस्तरीय और वैज्ञानिक उपचार एक ही छत के नीचे मिल सकेगा।
आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली का मुख्य आधार हैं ये थेरेपी
इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस), बीएचयू के निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार ने आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर रोशनी डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में फिजियोथेरेपी एवं ऑक्युपेशनल थेरेपी आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली का एक बेहद मजबूत और अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। आज के इस आपाधापी भरे दौर में जिस तरह लोगों की जीवनशैली बदली है, उसने कई नई बीमारियों को जन्म दिया है।
उन्होंने कुछ मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करते हुए बताया कि:
- जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां: गलत तरीके से बैठने, शारीरिक श्रम की कमी और तनाव के कारण मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
- सड़क दुर्घटनाएं: आए दिन होने वाले हादसों के बाद मरीजों को दोबारा सामान्य जीवन में लौटने के लिए लंबे शारीरिक पुनर्वास की जरूरत होती है।
- न्यूरोलॉजिकल विकार: स्ट्रोक, पैरालिसिस और नसों से जुड़ी गंभीर समस्याओं में ऑक्युपेशनल थेरेपी मरीजों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती है।
- खेलकूद की चोटें: खिलाड़ियों को खेल के मैदान पर लगने वाली चोटों से उबारने और उनकी शारीरिक क्षमता को वापस पाने में फिजियोथेरेपी की भूमिका सर्वोपरि है।
- बढ़ती उम्र की समस्याएं: बुजुर्गों में जोड़ों का दर्द, संतुलन खोना और मांसपेशियों की कमजोरी जैसी दिक्कतों का समाधान भी इन्हीं थेरेपी के जरिए संभव है।
'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में होगा विकास
प्रो. एस. एन. संखवार ने भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रस्तावित केंद्र का दायरा सिर्फ सामान्य इलाज तक सीमित नहीं रहेगा। यहां पूरी तरह से साक्ष्य-आधारित (एविडेंस-बेस्ड) चिकित्सा पद्धतियों को अपनाया जाएगा। इसके अलावा, छात्रों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले व्यावहारिक प्रशिक्षण (training) और उन्नत अनुसंधान को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इस केंद्र को आने वाले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (Center of Excellence) यानी उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित और विकसित करना है, जो पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बन सके।
मरीजों और विद्यार्थियों दोनों को मिलेगा बड़ा फायदा
वर्तमान चिकित्सा परिदृश्य को देखा जाए तो देश के इस हिस्से में फिजियोथेरेपी एवं ऑक्युपेशनल थेरेपी की मांग पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ चुकी है। बीएचयू का यह नया कदम न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने वाले विद्यार्थियों को बेहतरीन अवसर देगा, बल्कि उन्हें आधुनिक और बहुविषयक शिक्षा (multidisciplinary education) से भी जोड़ेगा। शोध करने वाले छात्रों को नई तकनीकों पर काम करने का बेहतर माहौल मिलेगा। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से आने वाले लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को बेहद किफायती दरों पर समग्र, वैज्ञानिक, प्रामाणिक और अत्यंत उच्च गुणवत्ता वाली पुनर्वास सेवाएं मिल सकेंगी। निश्चित रूप से, बीएचयू का यह नया केंद्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक नए सुनहरे अध्याय की शुरुआत करने जा रहा है।
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