Pahunj River Conservation: झांसी में प्रशासन का कड़ा रुख, नदी क्षेत्र में नए निर्माण और नक्शों पर पूरी तरह रोक

खबर सार :-

झांसी में Pahunj River Conservation को लेकर जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। डीएम के निर्देश पर समिति गठित, अब नदी क्षेत्र में नहीं पास होंगे आवासीय नक्शे।
Pahunj River Conservation: झांसी में प्रशासन का कड़ा रुख, नदी क्षेत्र में नए निर्माण और नक्शों पर पूरी तरह रोक

खबर विस्तार : -

झांसी : जल इतिहास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जिला प्रशासन ने एक ऐसा ठोस और निर्णायक कदम उठाया है, जिसकी गूंज आने वाले समय में शहर के विकास नक्शे पर साफ दिखाई देगी। बात चाहे बुंदेलखंड की सूखी होती जमीनों को हरा-भरा करने की हो या फिर जल स्रोतों को जीवनदान देने की, प्रशासन अब किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में बिल्कुल नहीं है। जिलाधिकारी गौरांग राठी की अध्यक्षता में हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक ने साफ कर दिया है कि Pahunj River Conservation अब केवल कागजी फाइलों का हिस्सा नहीं रहेगा, बल्कि ग्राउंड जीरो पर इसका असर दिखने लगेगा।

कागजों से बाहर निकलकर मैदान में उतरी प्रशासनिक मशीनरी

अक्सर ऐसा होता है कि सरकारी बैठकें होती हैं, बड़े-बड़े निर्देश जारी होते हैं और कुछ दिनों बाद फाइलें धूल फांकने लगती हैं। लेकिन इस बार का मामला थोड़ा अलग और बेहद सख्त नजर आ रहा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी के कड़े तेवरों के बाद जिला प्रशासन ने जिस तरह से कमान संभाली है, उससे साफ है कि Pahunj River Conservation को लेकर इस बार प्रशासनिक अमला बेहद गंभीर है। कलेक्ट्रेट के गांधी सभागار में हुई इस मैराथन बैठक के दौरान नदी के कैचमेंट एरिया से लेकर उसकी जल भंडारण क्षमता तक का पूरा कच्चा-चिट्ठा खंगाला गया। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सिर्फ नदी को बचाना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की एक-एक बूंद को सहेजना है।

आवासीय नक्शों पर कैंची और अतिक्रमणकारियों पर शिकंजा

इस पूरी रणनीति का सबसे कड़ा हिस्सा झांसी विकास प्राधिकरण के लिए जारी किए गए निर्देश हैं। प्रशासन ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि अब नदी के प्रतिबंधित दायरे में किसी भी नए आवासीय भवन का नक्शा मंजूर नहीं किया जाएगा। यानी अगर किसी ने नदी किनारे जमीन खरीदकर सपनों का आशियाना बनाने की सोची है, तो उसे फिलहाल ब्रेक लगाना ही पड़ेगा। इसके साथ ही, नदी की बेशकीमती भूमि पर पहले से हो चुके अवैध कब्जों को हटाने के लिए भी अभियान तेज कर दिया गया है। जब तक नदी के सीने से अतिक्रमण का बोझ पूरी तरह नहीं हटेगा, तब तक Pahunj River Conservation की परिकल्पना को जमीन पर उतारना मुमकिन नहीं हो सकता।

विशेषज्ञों की समिति तय करेगी भविष्य की दिशा

इस पूरी कवायद को सही दिशा देने और समय पर लक्ष्य हासिल करने के लिए एक विशेष समन्वय समिति का गठन कर दिया गया है। यह समिति न सिर्फ हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि एनजीटी के नियमों का उल्लंघन बिल्कुल न हो। रेलवे को मिलने वाले पानी से लेकर नदी में सालभर प्राकृतिक बहाव बनाए रखने तक, हर बिंदु पर यह टीम काम करेगी। जानकारों का मानना है कि यदि यह तंत्र ईमानदारी से काम करता है, तो झांसी की इस महत्वपूर्ण धारा को एक नया जीवन मिलने में देर नहीं लगेगी।

यह भी पढ़ेंः-रेलवे का बड़ा फैसला: झांसी मंडल के 500 टीटीई को मिलेंगे बॉडी कैमरे, टिकट जांच होगी पूरी तरह रिकॉर्ड

अन्य प्रमुख खबरें