लखनऊ नगर निगम की जमीनों पर अवैध कब्जे बर्दाश्त नहीं, एक्शन में महापौर सुषमा खर्कवाल, अफसरों को रोजाना फील्ड में उतरने का अल्टीमेटम

खबर सार :-

लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने स्मार्ट सिटी कार्यालय (Smart City Office) में नगर निगम की संपत्तियों की समीक्षा की। उन्होंने अवैध कब्जों पर नाराजगी जताते हुए राजस्व टीम को रोज फील्ड में उतरने और लापरवाह अफसरों की सूची डीएम को भेजने के कड़े निर्देश दिए हैं।
लखनऊ नगर निगम की जमीनों पर अवैध कब्जे बर्दाश्त नहीं, एक्शन में महापौर सुषमा खर्कवाल, अफसरों को रोजाना फील्ड में उतरने का अल्टीमेटम

खबर विस्तार : -

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नगर निगम (Municipal Corporation) की बेशकीमती संपत्तियों पर होने वाले अवैध कब्जों को लेकर महापौर सुषमा खर्कवाल ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शहर के स्मार्ट सिटी कार्यालय (Smart City Office) में गुरुवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय और विस्तृत समीक्षा बैठक के दौरान महापौर ने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि सरकारी जमीनों को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराना और उनकी सुरक्षा करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस दौरान उन्होंने नगर आयुक्त गौरव कुमार के साथ मिलकर संपत्ति विभाग (Property Department) के कामकाज की बिंदुवार पड़ताल की और 88 गांवों के रिकॉर्ड समेत कई अहम जानकारियां तलब कीं।

पर्याप्त अमला फिर भी सुस्ती क्यों? महापौर ने उठाए सवाल

स्मार्ट सिटी कार्यालय (Smart City Office) में हुई इस बैठक में महापौर ने इस बात पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई कि नगर निगम के पास तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो, राजस्व निरीक्षक और लेखपालों की भारी-भरकम फौज उपलब्ध है। इसके बावजूद जमीनों को सुरक्षित करने में देरी क्यों हो रही है? उन्होंने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि जब पर्याप्त राजस्व अमला मौजूद है, तो जमीनों को कब्जामुक्त कराने के बाद वहां तुरंत बाउंड्रीवॉल (Boundary wall), कंटीले तारों की घेराबंदी या सूचना पट लगाने की कार्रवाई तेजी से क्यों नहीं की जा रही है? महापौर ने कहा कि शहर के विभिन्न वार्डों के पार्षदों और आम नागरिकों से लगातार यह शिकायतें मिल रही हैं कि उनके इलाकों में नगर निगम की जमीनों पर अवैध निर्माण या कब्जे की कोशिशें हो रही हैं। शिकायतें संबंधित प्रभारियों को भेजने के बाद भी जमीनी स्तर पर असरदार कार्रवाई न होना चिंताजनक है।

ग्रामवार तैयार हो बंजर, ऊसर और तालाबों की सूची

बैठक में कड़े निर्देश जारी करते हुए महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि नगर निगम (Municipal Corporation) के दायरे में आने वाली हर तरह की जमीन, चाहे वह ऊसर हो, बंजर हो, नवीन परती हो, चारागाह हो या फिर पुराने तालाब हों, उनका एक-एक कर ग्रामवार (Village-wise) ब्यौरा तैयार किया जाए। विभाग के पास हर श्रेणी की भूमि का पूरी तरह से अपडेटेड रिकॉर्ड होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने हाल ही में शामिल हुए 88 गांवों के पंचायत घरों और बारात घरों का पूरा डाटा मात्र दो दिनों के भीतर तैयार कर उसे संपत्ति रजिस्टर में दर्ज करने का हुक्म दिया है।

अफसरों को दफ्तर छोड़ रोज़ाना जाना होगा फील्ड में

स्मार्ट सिटी कार्यालय (Smart City Office) से जारी आदेश के मुताबिक, अब राजस्व विभाग के अधिकारियों को केवल दफ्तर की फाइलों तक सीमित रहने की इजाजत नहीं होगी। महापौर और नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि तहसीलदार से लेकर लेखपाल तक सभी को प्रतिदिन फील्ड में निकलना होगा। वे अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों में जाकर जमीनों का भौतिक सत्यापन करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जिस जमीन को एक बार खाली कराया जा चुका है, उस पर दोबारा भू-माफिया का कब्जा न होने पाए। जो संपत्तियां संवेदनशील हैं, उनकी सुरक्षा के लिए फोटो सहित पूरी रिपोर्ट मांगी गई है।

ढिलाई बरतने वाले बाहरी अफसरों की शिकायत अब सीधे डीएम से

बैठक के दौरान एक और बड़ा फैसला लिया गया। अक्सर यह देखा जाता है कि नगर निगम (Municipal Corporation) द्वारा जिला प्रशासन के लेखपालों या अधिकारियों को पत्र लिखे जाने के बावजूद वहां से कार्रवाई में देरी होती है। इस पर महापौर ने अपर नगर आयुक्त श्री पंकज श्रीवास्तव को निर्देश दिया कि ऐसे सभी लंबित मामलों की एक फाइल बनाई जाए। इन सभी ढिलाई बरतने वाले अफसरों से जुड़े पत्रों को नगर आयुक्त गौरव कुमार के माध्यम से सीधे जिलाधिकारी (डीएम) लखनऊ को भेजा जाएगा, ताकि जिले स्तर से उन पर त्वरित और दंडात्मक कार्रवाई की जा सके। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव, संपत्ति विभाग के प्रभारी अधिकारी रामेश्वर प्रसाद सहित बड़ी संख्या में राजस्व और संपत्ति विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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