फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, शादी का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले 11 आरोपी गिरफ्तार

खबर सार :-

झांसी पुलिस ने शादी का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया। कार्रवाई में 11 आरोपी गिरफ्तार हुए, 9 लाख का सामान और 41 लाख रुपये के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए।
फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, शादी का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले 11 आरोपी गिरफ्तार

खबर विस्तार : -

झांसीः झांसी पुलिस ने शादी कराने के नाम पर देशभर के लोगों से साइबर ठगी करने वाले एक बड़े फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। थाना नवाबाद और साइबर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के 11 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें नौ महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। पुलिस ने मौके से कंप्यूटर, मोबाइल फोन, मैकबुक, एटीएम कार्ड, क्यूआर कोड, बायोमेट्रिक मशीन, रजिस्टर और अन्य उपकरण बरामद किए हैं। बरामद सामान की अनुमानित कीमत करीब नौ लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा विभिन्न बैंकों के सात खातों में करीब 41 लाख रुपये के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं, जिन्हें फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पुलिस के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति के निर्देशन में साइबर अपराधों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान 8 जुलाई को सूचना मिली कि थाना नवाबाद क्षेत्र की राय कॉलोनी स्थित एक मकान में फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है, जहां से शादी कराने के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद अपर नगर मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त कर थाना नवाबाद और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने छापेमारी की और पूरे रैकेट का खुलासा कर दिया।

ऐसे देते थे शादी का झांसा

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे "शादी संस्था डॉट कॉम" के नाम से लोगों से संपर्क करते थे। पहले ग्राहकों को बेहतर वैवाहिक प्रस्ताव उपलब्ध कराने का भरोसा दिया जाता था, फिर रजिस्ट्रेशन, प्रीमियम सदस्यता, प्रोफाइल सक्रिय करने और अन्य सेवाओं के नाम पर उनसे ऑनलाइन भुगतान कराया जाता था।

गिरोह के सदस्य विभिन्न बैंक खातों और क्यूआर कोड के माध्यम से रकम जमा कराते थे। कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों को छह से आठ हजार रुपये मासिक वेतन के अलावा कमीशन भी दिया जाता था। गिरोह नए कर्मचारियों, विशेषकर युवतियों की भर्ती कर उन्हें लोगों से बातचीत करने और ठगी के तरीके सिखाने का प्रशिक्षण भी देता था।

गिरफ्तार आरोपी आकांक्षा श्रीवास्तव ने पुलिस को बताया कि वह करीब डेढ़ वर्ष से इस कॉल सेंटर में काम कर रही थी। उसकी जिम्मेदारी नई लड़कियों की भर्ती करने और उन्हें प्रशिक्षण देने की थी, ताकि वे ग्राहकों को विश्वास में लेकर उनसे पैसे वसूल सकें।

ये आरोपी हुए गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में साहिल साहू, हलधर साहू, आकांक्षा श्रीवास्तव, पुष्पा पाल, आरती कुशवाहा, रजनी आर्य, पूजा शर्मा, दीक्षा कुमारी, नेहा कुमारी, साक्षी झा और राजकुमारी वर्मा को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

छापेमारी में भारी मात्रा में सामान बरामद

पुलिस ने कॉल सेंटर से नौ एंड्रॉयड मोबाइल, 17 कीपैड मोबाइल, एक मैकबुक, सात सीपीयू, प्रिंटर, राउटर, बायोमेट्रिक मशीन, 62 कॉपियां, 22 रजिस्टर, 25 फाइलें, 16 एटीएम कार्ड, छह चेकबुक, कई क्यूआर कोड, साउंड बॉक्स, मुहरें, स्टाम्प पैड तथा कथित तौर पर ठगी की रकम से खरीदी गई सोने की चेन और कान के टॉप्स बरामद किए हैं। बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत करीब नौ लाख रुपये आंकी गई है।

इसके अतिरिक्त पुलिस को सात बैंक खातों में लगभग 41 लाख रुपये के लेनदेन से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस इन खातों को फ्रीज कराने की कार्रवाई कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था तथा अब तक कितने लोगों को इसका शिकार बनाया गया।

इन पुलिसकर्मियों ने किया खुलासा

इस कार्रवाई में थाना नवाबाद के प्रभारी निरीक्षक रवि श्रीवास्तव, साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक अरविंद यादव, उपनिरीक्षक आरिफ मोहम्मद, उपनिरीक्षक नवीन सिंह, कांस्टेबल नीरंजन लाल शर्मा, आरक्षी मृत्युंजय त्रिवेदी, आरक्षी गौरव शुक्ला, महिला कांस्टेबल पूनम तथा महिला आरक्षी रश्मि यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

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