थानों में कबाड़ हो रहे वाहनों से मिलेगी निजात, चार एकड़ में बनेगा हाईटेक यार्ड

खबर सार :-

झांसी के थानों में वर्षों से खड़े अपराधों से जुड़े वाहनों के लिए चिरगांव-बड़ागांव के आसपास चार एकड़ में यार्ड विकसित होगा। वाहनों का डिजिटल रिकॉर्ड और बारकोड से पहचान होगी।
झांसीः चार एकड़ में बनेगा हाईटेक यार्ड, पुराने वाहनों से मिलेगी निजात

खबर विस्तार : -

झांसीः महानगर और जिले के विभिन्न थानों में लंबे समय से खड़े होकर कबाड़ हो चुके वाहनों से अब पुलिस विभाग को निजात मिलने की उम्मीद है। अपराधों में संलिप्त या विभिन्न मुकदमों में वांछित होने के कारण इन वाहनों का निस्तारण नहीं हो पाता। वर्षों से थाना परिसरों में खड़े इन वाहनों ने थानों की बड़ी जगह घेर रखी है। इससे पुलिसकर्मियों के साथ-साथ फरियादियों के लिए उपलब्ध स्थान भी प्रभावित हो रहा है।

इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए पुलिस विभाग ने चिरगांव और बड़ागांव के आसपास करीब चार एकड़ जमीन में वाहनों के लिए एक अलग यार्ड विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। जमीन चिन्हित होने और यार्ड तैयार होने के बाद जिले के विभिन्न थानों में खड़े वाहनों को यहां स्थानांतरित किया जाएगा।

15 से अधिक थानों के वाहन होंगे शिफ्ट

प्रस्तावित यार्ड में बड़ागांव, चिरगांव, मोंठ, पूंछ, गरौठा, गुरसराय, एरच, ककरवई, मऊरानीपुर, कटेरा, लहचूरा, टोड़ी फतेहपुर, उल्दन, समथर और शाहजहांपुर समेत अन्य थानों में खड़े वाहनों को रखा जाएगा। इससे संबंधित थानों के परिसर में लंबे समय से खड़े वाहनों को हटाकर खाली जगह का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। पुलिस विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे वाहनों के निस्तारण की है। ये वाहन किसी न किसी अपराध, मुकदमे या जांच से जुड़े होते हैं। कई मामलों में वाहन महत्वपूर्ण साक्ष्य भी हो सकते हैं। इसलिए मुकदमे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक पुलिस इनके निस्तारण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा सकती।

डिजिटल रिकॉर्ड और बारकोड से होगी पहचान

प्रस्तावित यार्ड को आधुनिक व्यवस्था से लैस करने की योजना है। यहां रखे जाने वाले प्रत्येक वाहन का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा। वाहन की पहचान के लिए उस पर एक विशेष बारकोड लगाया जाएगा। बारकोड स्कैन करते ही संबंधित वाहन के बारे में आवश्यक जानकारी तुरंत सामने आ सकेगी। रिकॉर्ड में वाहन का नंबर, मॉडल और उपलब्ध अन्य विवरण दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही वाहन किस थाना क्षेत्र से संबंधित है और किस मुकदमे में वांछित अथवा संलिप्त है, इसकी जानकारी भी दर्ज होगी। वाहन को संबंधित थाने और मुकदमे के रिकॉर्ड से डिजिटल रूप से जोड़ा जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य वाहनों की पहचान और उनके रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना है। किसी वाहन के संबंध में न्यायालय, जांच अधिकारी या वाहन स्वामी की ओर से जानकारी मांगे जाने पर रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध कराया जा सकेगा।

जांच और न्यायिक प्रक्रिया में भी होगी सहूलियत

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अपराधों से जुड़े वाहनों को सुरक्षित रखना जांच और न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई बार किसी वाहन की आवश्यकता मुकदमे की जांच, साक्ष्य के सत्यापन या न्यायालय की कार्रवाई के दौरान पड़ सकती है। ऐसे में वाहनों को एक निश्चित और सुरक्षित स्थान पर रखना अधिक प्रभावी होगा।

एक केंद्रीकृत यार्ड बनने से वाहनों की भौतिक स्थिति की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। अभी अलग-अलग थानों में बेतरतीब तरीके से खड़े वाहनों की वजह से उनकी निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन में कठिनाई आती है। यार्ड में सभी वाहनों को निर्धारित स्थान पर रखने से यह समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।

थाना परिसरों में खाली होगी जगह

वाहनों को यार्ड में स्थानांतरित किए जाने के बाद थाना परिसरों का काफी बड़ा हिस्सा खाली हो जाएगा। इससे पुलिसकर्मियों के लिए काम करने और फरियादियों के बैठने सहित अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए अधिक जगह उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही थाना परिसर में वाहनों के बेतरतीब खड़े रहने की समस्या भी कम होगी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति के मुताबिक, प्रस्तावित यार्ड की योजना केवल थाना परिसरों को खाली कराने तक सीमित नहीं है। इससे लंबे समय से पड़े वाहनों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और उनकी पहचान सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी। जमीन चिन्हित होने और यार्ड तैयार होने के बाद थानों में खड़े वाहनों को वहां भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

पुलिस विभाग की इस पहल से एक ओर जहां थाना परिसरों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा, वहीं दूसरी ओर अपराधों से जुड़े वाहनों के सुरक्षित संरक्षण और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।

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