युवा इतिहासकार सम्मेलन को लेकर बैठक-सह-कार्यशाला आयोजित, शोध लेखन और कार्ययोजना पर हुआ मंथन

खबर सार :-

युवा इतिहासकार सम्मेलन की तैयारियों को लेकर अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के केंद्रीय कार्यालय में बैठक-सह-कार्यशाला आयोजित हुई। शोध लेखन, कार्ययोजना और सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा हुई।
शोध लेखन और कार्ययोजना पर हुआ मंथन, कार्यशाला का आयोजन

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: 3 एवं 4 अक्टूबर को प्रस्तावित युवा इतिहासकार सम्मेलन की तैयारियों को लेकर अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के केंद्रीय कार्यालय स्थित सभागार में बैठक-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में युवा इतिहासकारों के शोध लेखन, शोध प्रारूप, कार्ययोजना, सम्मेलन की तैयारियों और सहभागियों की सुविधा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

500 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद

कार्यशाला के मुख्य अतिथि एवं मार्गदर्शक डॉ. बालमुकुंद पांडे रहे। उन्होंने कहा कि युवा इतिहासकारों और युवा समाज वैज्ञानिकों की इतिहास के पुनर्लेखन और उसमें नए आयाम जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, शोध क्षमता और नए दृष्टिकोण से इतिहास लेखन को नई दिशा मिल सकती है।

डॉ. पांडे ने सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सहभागियों की संख्या और अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली। बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार सम्मेलन में लगभग 500 प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने सम्मेलन की तैयारियों में जुटे सदस्यों के उत्साह और प्रयासों की सराहना की तथा शोध-पत्र लेखन को प्रोत्साहित करने के साथ युवा इतिहासकारों को उचित मार्गदर्शन देने पर जोर दिया। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। डॉ. पांडे ने कहा कि सम्मेलन की सफलता के लिए सभी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय, सहयोग और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने उपस्थित पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को इतिहास लेखन के साथ संगठनात्मक दायित्वों को भी पूरी गंभीरता और समर्पण के साथ निभाने के लिए प्रेरित किया।

बैठक के दौरान इतिहास लेखन से संबंधित प्रशांत जैन द्वारा लिखित पुस्तक के विमोचन के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। डॉ. पांडे ने सम्मेलन की तैयारियों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करते हुए संबंधित कार्यों को सुव्यवस्थित और प्रभावी तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने इतिहास लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रियता और शोध की गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया।

यातायात और समन्वय व्यवस्था पर जोर

डॉ. पांडे ने युवा इतिहासकारों के बीच सूचनाओं के त्वरित और प्रभावी आदान-प्रदान के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रतिभागियों की सुविधा और सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए यातायात की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो, इसके लिए आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी करने पर जोर दिया।

सम्मेलन की स्मारिका के प्रकाशन और उससे जुड़े कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। उन्होंने स्मारिका से संबंधित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया। डॉ. बालमुकुंद पांडे ने युवाओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत के युवाओं में उत्साह, कार्य करने का जुनून, चुनौतियों का सामना करने का साहस और कठिन परिश्रम करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि युवाओं की व्यक्तिगत उपलब्धियां केवल उनके जीवन को नई दिशा नहीं देतीं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान करती हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक उपलब्धियों से नहीं होगा, बल्कि इसके लिए जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों की भी आवश्यकता होगी। उन्होंने संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्यों को व्यवहार में अपनाने पर जोर दिया।

इतिहास लेखन पर जोर

बैठक-सह-कार्यशाला में राष्ट्रीय मंत्री डॉ. रत्नेश कुमार त्रिपाठी ने धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि युवा इतिहासकारों को इतिहास के पुनर्लेखन के लिए मानविकी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से समय की आवश्यकता को समझते हुए विवेकीय प्रज्ञा के साथ शोध कार्य करने का आह्वान किया। अखिल भारतीय लेखक परिषद के सदस्य डॉ. नरेंद्र शुक्ला ने भी आगामी युवा इतिहासकार सम्मेलन की तैयारियों को लेकर सभी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया। उन्होंने सम्मेलन को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास करने और अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

दिल्ली प्रांत के महासचिव डॉ. निर्मल पांडे ने भी बैठक को संबोधित किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को तत्परता से काम करने के लिए प्रेरित किया और शोध सारांश के साथ प्रतिभागियों के आगमन एवं प्रस्थान से संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध कराने का आग्रह किया। बैठक-सह-कार्यशाला की अध्यक्षता प्रोफेसर (डॉ.) धर्मचंद चौबे ने की। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया और शोध-पत्र लेखन के लिए प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि शोध-पत्र लेखन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए वे हर संभव सहयोग के लिए उपलब्ध रहेंगे।

कार्यक्रम में डॉ. सुधाकर कुमार मिश्रा, मुकेश उपाध्याय, डॉ. सचिन रतन झा, डॉ. पीयूष मिश्रा, डॉ. अस्मित शर्मा, डॉ. बमबम, डॉ. रमाकांत दुबे, डॉ. सत्यप्रकाश, डॉ. प्रदीप कुमार उपाध्याय, डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. विवेक और डॉ. शैलेश समेत कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में जितेंद्र जी एवं उनके सहयोगियों की ओर से प्रतिभागियों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई।

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