लापरवाही पर लगेगी रोक: महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज मोर्चरी में लगे नए फ्रीजर, AC और बैकअप से लैस होगी व्यवस्था
खबर सार :-
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी की मोर्चरी में नई व्यवस्थाएं लागू कर दी गई हैं। शवों की सुरक्षा के लिए नए फ्रीजर, एसी, पावर बैकअप और पेस्ट कंट्रोल की सुविधा जोड़ी गई है। जानें पूरी खबर।
खबर विस्तार : -
झांसी : प्रतिष्ठित महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में लंबे समय से चली आ रही अव्यवस्थाओं और गंभीर शिकायतों पर अब पूर्ण विराम लगने की उम्मीद बंध गई है। अस्पताल प्रशासन ने मोर्चरी की कार्यप्रणाली को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए ठोस और कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस दिशा में एक बड़ा बदलाव लाते हुए मोर्चरी परिसर में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए फ्रीजर स्थापित कर दिए गए हैं, जिससे अब शवों को रखने की क्षमता में भी इजाफा हुआ है और उनकी सुरक्षा भी पुख्ता हो सकेगी।
पिछली गंभीर घटनाओं से लिया गया बड़ा सबक
बीते समय में झांसी मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी को लेकर कई बार ऐसी खबरें सामने आई थीं जिन्होंने मानवता को झकझोर कर रख दिया था। वर्ष 2025 के दौरान एक महिला के शव को लेकर बेहद सनसनीखेज और संवेदनशील मामला प्रकाश में आया था। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया था कि मोर्चरी में रखे गए शव के चेहरे, विशेषकर आंख और कान के आसपास की जगहों पर चूहे या कीड़े के काटने के स्पष्ट निशान मौजूद थे। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया था। शवों के साथ इस तरह की अमानवीय लापरवाही सामने आने के बाद मोर्चरी की साफ-सफाई, कीट नियंत्रण और फ्रीजर की क्षमता पर बड़े सवाल खड़े हो गए थे। अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था, जिसके बाद से ही लगातार यह मांग की जा रही थी कि मोर्चरी की व्यवस्थाओं का कायाकल्प किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी दुखद और अपमानजनक स्थिति का सामना न करना पड़े।
नए फ्रीजर और उन्नत तकनीकों से लैस हुई मोर्चरी
जनमानस की भावनाओं और पिछली घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने युद्ध स्तर पर सुधार कार्य शुरू किए हैं। इसी कड़ी में मोर्चरी भवन के ठीक बगल में एक नए हिस्से का निर्माण कराया गया है, जिसमें आधुनिक तकनीक वाले दो बड़े फ्रीजर स्थापित किए गए हैं। इन दोनों नए फ्रीजर की कुल क्षमता छह शवों को एक साथ सुरक्षित रखने की है। यानी अब एक समय में कुल छह मृत शरीरों को पूरी सुरक्षा और कम तापमान के बीच संरक्षित किया जा सकेगा।
शवों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ स्वच्छता और कीट नियंत्रण पर भी विशेष जोर दिया गया है। मोर्चरी परिसर में व्यापक स्तर पर पेस्ट कंट्रोल (कीट नियंत्रण) की कार्रवाई पूरी कर ली गई है ताकि चूहों, कीटों और अन्य जीवों का खतरा पूरी तरह समाप्त हो सके। इसके अतिरिक्त, मोर्चरी कक्ष में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए मजबूत पावर बैकअप की व्यवस्था की जा रही है, साथ ही तापमान को नियंत्रित रखने के लिए आधुनिक एयर कंडीशनिंग (AC) और बेहतर वेंटिलेशन सिस्टम भी स्थापित किए जा रहे हैं ताकि किसी भी तकनीकी खराबी की वजह से शवों की स्थिति प्रभावित न हो।
पीपीपी मोड और भविष्य की कार्ययोजनाओं का खाका
मोर्चरी की इस व्यवस्था को केवल कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि स्थायी और दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एक अनूठी पहल की है। प्रशासन ने इस पूरी व्यवस्था को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर संचालित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं से औपचारिक प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। जैसे ही इन संस्थाओं से विस्तृत प्रस्ताव प्राप्त हो जाएंगे, उन्हें अंतिम संस्तुति और अनुमति के लिए शासन के पास भेज दिया जाएगा।
चयनित कार्यदायी संस्था की यह मुख्य जिम्मेदारी होगी कि वह मोर्चरी में लगे फ्रीजरों, एयर कंडीशनर और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था की नियमित देखभाल और रखरखाव करे। जहां कहीं भी किसी सुधार की आवश्यकता महसूस होगी, वह संस्था तुरंत कदम उठाएगी। इसके अलावा, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के वर्ष 2026-27 के स्वीकृत कार्य योजनाओं में भी मोर्चरी के पूर्ण सुधारीकरण को शामिल किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया और नए निर्माण कार्यों पर लगभग 5 लाख रुपये की लागत आई है, जिसे प्रशासनिक बजट से व्यवस्थित किया गया है।
प्रशासन की सख्त चेतावनी और कर्मचारियों की जवाबदेही
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी के प्रधानाचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया है कि अस्पताल प्रशासन मरीजों और मृतकों दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने बताया कि मोर्चरी में नए फ्रीजर स्थापित हो चुके हैं और बिजली की निर्बाध आपूर्ति के साथ-साथ एसी वेंटिलेशन का कार्य भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।
डॉ. सुधीर कुमार ने आगे कहा कि भविष्य में इस प्रकार की किसी भी लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए मोर्चरी में तैनात कर्मचारियों की जवाबदेही और उनकी कार्यप्रणाली की सख्त निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। नए उपकरणों के आ जाने और प्रशासनिक कड़ाई के बाद अब यह पूरी उम्मीद की जा रही है कि पूर्व में मृत शरीरों के साथ हुई दर्दनाक घटनाओं पर पूर्ण अंकुश लगेगा और शोकाकुल परिवारों को अपने प्रियजनों के अंतिम समय में किसी प्रकार की मानसिक पीड़ा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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