शाहपुरा जिला बहाली आंदोलन ने लिया चुनावी मोड़, निकाय चुनाव में प्रत्याशी उतारेगी संघर्ष समिति

खबर सार :-

शाहपुरा जिला बहाली की मांग को लेकर संघर्ष समिति ने निकाय चुनाव लड़ने का फैसला किया। वार्ड 20 से दुर्गालाल राजोरा ने चुनावी ताल ठोकी। इसी के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि समिति के साथ कितने सामाजिक संगठन और स्थानीय प्रभावशाली लोग खुलकर आते हैं।
शाहपुरा जिला बहाली आंदोलन ने लिया चुनावी मोड़, चुनाव की तैयारी

खबर विस्तार : -

शाहपुरा: शाहपुरा को दोबारा जिले का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर पिछले एक वर्ष सात माह से लगातार आंदोलन कर रही जिला बहाल करो संघर्ष समिति ने अब अपनी लड़ाई को नए राजनीतिक मोर्चे पर ले जाने का फैसला किया है। नगर निकाय चुनाव की आहट के बीच समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि जिला बहाली का मुद्दा अब धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन तक सीमित नहीं रहेगा। संघर्ष समिति आमजन के समर्थन के बूते निकाय चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारकर राजनीतिक दलों को सीधी चुनौती देने की तैयारी में जुट गई है।

भाणा गणेश मंदिर परिसर में संघर्ष समिति की महत्वपूर्ण बैठक अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा की अध्यक्षता तथा संयोजक रामप्रसाद जाट के संचालन में आयोजित हुई। बैठक में निकाय चुनाव में समिति की भूमिका को लेकर सदस्यों, सामाजिक संगठनों, विभिन्न संस्थाओं, व्यापारियों, अधिवक्ताओं और आमजन से सुझाव लिए गए। विस्तृत चर्चा के बाद समिति को चुनाव मैदान में उतारने के पक्ष में बहुमत सामने आया। इसके बाद संघर्ष समिति ने औपचारिक रूप से नगर निकाय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।

आंदोलन से अब चुनावी मैदान तक

संघर्ष समिति के संयोजक और भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष रामप्रसाद जाट ने कहा कि शाहपुरा को जब तक वापस जिले का दर्जा नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव समिति के लिए महज सत्ता या चुनाव जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि शाहपुरा की जनभावनाओं को राजनीतिक ताकत में बदलने का अवसर है। जाट ने कहा कि समिति आमजन के दम पर चुनाव लड़ेगी। आवश्यकता पड़ने पर जिला बहाली के मुद्दे पर समान विचारधारा रखने वाले लोगों और संगठनों के साथ गठबंधन भी किया जा सकता है। समिति की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिन राजनीतिक दलों को वह शाहपुरा का जिला समाप्त किए जाने के लिए जिम्मेदार मानती है, उनके खिलाफ प्रमुख वार्डों में समिति समर्थित प्रत्याशी मैदान में उतारे जाएंगे।

संघर्ष समिति का उद्देश्य चुनाव में अपनी ताकत दिखाकर सरकार तक यह संदेश पहुंचाना है कि शाहपुरा की जनता जिला समाप्त किए जाने के फैसले से नाराज है और अब अपनी नाराजगी मतदान के माध्यम से जाहिर करने को तैयार है।

वार्ड 20 से दुर्गालाल राजोरा ने ठोकी ताल

संघर्ष समिति की चुनावी रणनीति की शुरुआत वार्ड नंबर 20 से हो गई है। बैठक में समिति अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा को वार्ड 20 से पहला प्रत्याशी घोषित किया गया। टिकट मिलते ही राजोरा ने संघर्ष समिति के प्रत्याशी के रूप में चुनावी ताल ठोक दी। बैठक में अन्य वार्डों से भी चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों ने अपनी दावेदारी पेश की। समिति की ओर से जिला बहाली आंदोलन का समर्थन करने वाले इच्छुक उम्मीदवारों से दूसरे वार्डों के लिए भी आवेदन मांगे गए हैं। आने वाले दिनों में प्रत्याशियों की संख्या और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

राजोरा का नाम घोषित होने के बाद बैठक में मौजूद समर्थकों ने उनका स्वागत किया। संघर्ष समिति सदस्य एवं प्रॉपर्टी यूनियन अध्यक्ष सुरेश गुर्जर ने उन्हें माला पहनाकर शुभकामनाएं दीं। गुर्जर ने चुनाव में समिति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रचार करने और प्रत्याशियों को जिताने का भरोसा दिलाया।

अधिवक्ता संस्था ने दिया समर्थन

संघर्ष समिति अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा ने कहा कि शाहपुरा जिला बहाली की लड़ाई किसी व्यक्ति या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनभावनाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि अभिभाषक संस्था के नेतृत्व में संघर्ष समिति ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसका पूरी प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन किया जाएगा। वार्ड 20 से चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए राजोरा ने कहा कि वे शाहपुरा की जनता से किए गए वादों और जिला बहाली की मांग को लेकर पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे।

अभिभाषक संस्था अध्यक्ष आशीष पालीवाल ने भी संघर्ष समिति को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने निकाय चुनाव में समिति के प्रत्याशियों को सहयोग का आश्वासन दिया। अधिवक्ताओं के इस समर्थन को समिति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे आंदोलन को सामाजिक समर्थन के साथ चुनावी अभियान में संगठित ताकत मिलने के संकेत हैं।

पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष ने सभी वार्डों में प्रत्याशी उतारने की अपील की

बैठक में भाजपा ग्रामीण मंडल के पूर्व अध्यक्ष मूलसिंह सोदा ने संघर्ष समिति से सभी वार्डों में प्रत्याशी उतारकर चुनाव लड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि शाहपुरा की जनता जिला बहाली के मुद्दे पर एकजुट होकर मतदान करती है तो सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाया जा सकता है। सोदा के मुताबिक चुनाव के माध्यम से यह संदेश सरकार तक पहुंचाया जा सकता है कि शाहपुरा की जनता जिले का दर्जा समाप्त किए जाने के फैसले को स्वीकार नहीं करती। राजनीतिक दृष्टि से उनके बयान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि संघर्ष समिति की सक्रियता अब सीधे स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

सामाजिक संगठनों और विभिन्न समाजों की भागीदारी

बैठक में संघर्ष समिति के सहसंयोजक सूर्यप्रकाश ओझा, कोषाध्यक्ष उदयलाल बेरवा, सचिव दल्लीचंद खटीक और सहसचिव नूर मोहम्मद उर्फ छोटू रंगरेज सहित कई पदाधिकारियों और सदस्यों ने विचार रखे। इसके अलावा नरेश बुलिया, भगवान सिंह यादव, इंजीनियर शक्ति सिंह परिहार, लादूराम जाड़ोलिया, रविशंकर उपाध्याय, नवल मोची, अर्पित कसेरा, पुखराज जोशी, डॉ. इसाक मोहम्मद, प्रेमचंद कहार, मोहम्मद रामेश्वरलाल सोलंकी, बालमुकुंद तोषनीवाल, नमन ओझा, सत्यनारायण पाठक, हाजी उस्मान मोहम्मद छीपा, प्रवीण पारीक, प्रियेश यादववंशी, रामस्वरूप टेपन, रमेशचंद्र मालू, अंकित मालू, सुनील मिश्रा और मुबारक हुसैन सहित अनेक लोगों ने संबोधित किया। बैठक में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी, व्यापारी, अधिवक्ता, संघर्ष समिति कार्यकर्ता और आमजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे। थानमल परिहार, वेदप्रकाश धाकड़, अभय गुर्जर, मदनलाल कंडारा, विनीत कुमार बुनकर, विनोद कुमार, अजय मेहता, पुष्पेंद्र खटीक, किशन तेली और प्रहलाद सिंह सिसोदिया सहित बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से समिति ने इसे व्यापक जनसमर्थन वाला आयोजन बताया।

जिला बहाली बनेगा चुनाव का मुख्य मुद्दा?

शाहपुरा में जिला बहाली को लेकर आंदोलन लंबे समय से जारी है। अब संघर्ष समिति ने इसे सीधे स्थानीय चुनाव से जोड़कर राजनीतिक मुकाबले का स्वरूप बदल दिया है। समिति का दावा है कि वह जनता की आवाज को चुनावी मंच तक ले जाएगी और मतदान के जरिए सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास करेगी। हालांकि चुनावी मैदान में समिति कितने वार्डों से प्रत्याशी उतारती है और किन राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के सामने मुकाबला करती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। 

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