झांसी मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा का बड़ा फैसला, हर वार्ड में बनेंगे आपातकालीन निकास द्वार
खबर सार :-
झांसी मेडिकल कॉलेज में आपातकालीन निकास द्वार बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और शासन के निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
खबर विस्तार : -
झांसी: मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज, झांसी में बड़ा सुरक्षा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद मेडिकल कॉलेज के प्रत्येक वार्ड में आपातकालीन निकास द्वार (इमरजेंसी एग्जिट) बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में कॉलेज प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि जल्द से जल्द सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलर्ट
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब प्रदेश में अस्पतालों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। हाल ही में लखनऊ में हुई भीषण आग की घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अग्निशमन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर सभी सरकारी अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों में फायर सेफ्टी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में झांसी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के पुराने भवन में कुल 11 इन-पेशेंट (आईपीडी) वार्ड संचालित हैं, जिनमें प्रतिदिन लगभग 170 से 200 मरीज भर्ती रहते हैं। बड़ी संख्या में मरीजों और उनके तीमारदारों की मौजूदगी को देखते हुए किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता बन गया है। नए आपातकालीन निकास द्वार बनने से आग या अन्य दुर्घटना की स्थिति में मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकालने में आसानी होगी।
2024 की घटना में 10 नवजातों की हुई थी मौत
गौरतलब है कि 15 नवंबर 2024 को मेडिकल कॉलेज की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भीषण आग लगने से 10 नवजात शिशुओं की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि आग से प्रभावित कुछ अन्य बच्चों ने बाद में दम तोड़ दिया था। इस दर्दनाक घटना ने अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की गंभीर खामियों को उजागर किया था। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने फायर सेफ्टी को लेकर कई सुधारात्मक कदम उठाए थे और अब आपातकालीन निकास द्वार का निर्माण उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
प्रधानाचार्य डॉ. सुधीर कुमार और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सचिन माहौर ने सभी विभागाध्यक्षों के साथ बैठक कर वार्डों की वर्तमान स्थिति, फायर सेफ्टी उपकरणों, आपातकालीन निकासी व्यवस्था तथा सुरक्षा मानकों की समीक्षा की। बैठक में प्रत्येक वार्ड में अलग आपातकालीन निकास बनाने, सुरक्षा उपकरणों को अद्यतन रखने और नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करने पर भी जोर दिया गया।
यह भी पढ़ेंः-भरत तिवारी को दी गई श्रद्धांजलि, कैंडिल मार्च निकाल निष्पक्ष जांच की उठी मांग
अन्य प्रमुख खबरें
-
बेंगलुरु में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
2026-10-01
-
बिहार में बाढ़ की स्थिति की मुख्य सचिव ने की समीक्षा, दिए निर्देश
2026-09-30
-
पश्चिमी चंपारण में बाढ़ राहत शिविर पहुंचे सीएम सम्राट, देखी व्यवस्था
2026-09-30
-
त्योहारों से पहले सड़कों को गड्ढामुक्त करने की तैयारी
2026-09-30
-
संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर
2026-09-30
-
SIR और मतदाता अधिकारों को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन
2026-09-30
-
बच्चों के पोषण और महिला स्वास्थ्य को लेकर ग्रामीणों को किया जागरूक
2026-09-30
-
बिहार के पुनपुन तट पर उमड़े श्रद्धालु, पितृ मोक्ष के लिए किया पिंडदान
2026-09-30
-
हिमाचल में मानसून की मार! सेब की कम पैदावार ने बढ़ाई बागवानों की चिंता
2026-09-30
-
JPSC-JSSC परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग, छात्रों ने दिया अल्टीमेटम
2026-09-30
-
बिहार के नौगछिया में उफान पर नदियां, गंगा-कोसी का जलस्तर बढ़ा
2026-09-30
-
BU PG Admission Rules: बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में बैक पेपर और एडमिशन नियम बदले
2026-09-30
-
नेपाल की बारिश से बिहार में नदियां उफान पर, CM ने किया हवाई सर्वे
2026-09-30
-
भोपाल में CSR भागीदारी पर सम्मेलन आज, निर्मला भूरिया करेंगी उद्घाटन
2026-09-30
-
मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई, तीन दिन हल्की बारिश की संभावना
2026-09-30