बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का बड़ा निर्णय: अब बैक पेपर पास किए बिना नहीं मिलेगा स्नातकोत्तर में प्रवेश, पुरानी व्यवस्था खत्म

खबर सार :-

विश्वविद्यालय परीक्षा समिति की बैठक में फैसला लिया गया है कि अब स्नातक (यूजी) की पढ़ाई तय समय में पूरी करने के बाद ही स्नातकोत्तर (पीजी) में प्रवेश मिलेगा। बिना बैक पेपर पास किए पीजी कर रहे छात्रों का दाखिला रद्द किया जाएगा।
BU PG Admission Rules: बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में बैक पेपर और एडमिशन नियम बदले

खबर विस्तार : -

झांसी: बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने अध्ययन एवं परीक्षा ढांचे को अधिक सुव्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है। कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडे की अध्यक्षता में आयोजित परीक्षा समिति की उच्चस्तरीय बैठक में छात्र-हितों और शैक्षणिक अनुशासन से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। नए नियमों के तहत अब विद्यार्थियों को स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रम तय समयसीमा में उत्तीर्ण करना होगा, जिसके बाद ही वे स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाओं में दाखिला लेने के लिए पात्र होंगे। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई छात्र स्नातक का बैक पेपर पास किए बिना अगली कक्षा यानी पीजी में प्रवेश लेता है, तो उसका दाखिला तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा।

विश्वविद्यालय द्वारा लिए गए इस फैसले का सीधा असर हजारों अध्ययनरत छात्र-छात्राओं पर पड़ेगा। अब तक चली आ रही ढील को समाप्त करते हुए परीक्षा समिति ने यह सुनिश्चित किया है कि डिग्री की गुणवत्ता और अंकों की पारदर्शिता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।

ये भी पढ़ेंः- भोपाल में राज्य स्तरीय काॅन्क्लेव आज, महिलाओं-बच्चों के लिए चलाई जा रही योजनाओं में CSR की भागीदारी पर चर्चा

बैक पेपर के लिए अतिरिक्त समय की सुविधा समाप्त

बैठक में तय किए गए नए प्रावधानों के अनुसार, अंकसूची (मार्क्सशीट) में अब बैक पेपर से परीक्षा पास करने का वर्ष भी स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा। इससे पहले तक स्नातक स्तर पर पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को यदि किसी विषय में बैक आती थी, तो उन्हें परीक्षा पास करने के लिए एक वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जाता था। इसके लिए विश्वविद्यालय छात्रों से निर्धारित शुल्क भी लेता था।

हालांकि, परीक्षा समिति ने अब इस पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। समिति का निर्णय है कि सभी पाठ्यक्रमों को उनकी निर्धारित अवधि के भीतर ही पूरा करना होगा। अब विद्यार्थियों को बैक क्लियर करने के लिए 1 वर्ष का अतिरिक्त मौका नहीं दिया जाएगा। छात्रों को अपने स्नातक पाठ्यक्रम को उसके लिए तय किए गए सेमेस्टर के भीतर ही सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।

पीजी में प्रवेश के कड़े नियम और बैक पेपर का प्रावधान

पुरानी व्यवस्था के तहत, यदि किसी छात्र की स्नातक के किसी एक सेमेस्टर में बैक लग जाती थी, तो भी उसे स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश मिल जाता था। ऐसे विद्यार्थियों को पीजी की पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ अपने स्नातक के बकाया (बैक) पेपर को पास करने की छूट मिलती थी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस प्रक्रिया को शैक्षणिक दृष्टिकोण से अनुचित मानते हुए इस पर पूर्ण विराम लगा दिया है। नए आदेश के अनुसार, अब स्नातक पाठ्यक्रम को पूरी तरह पास करने और उसकी सभी परीक्षाएं क्लियर करने के बाद ही किसी भी छात्र को पीजी में दाखिला दिया जाएगा। इसके साथ ही, जिन विद्यार्थियों ने बैक पेपर देकर परीक्षा उत्तीर्ण की है, उनकी अंकसूची में शैक्षणिक वर्ष के साथ-साथ यूजी और पीजी पास करने का वर्ष भी अंकित किया जाएगा। इतना ही नहीं, अंकपत्र पर 'बैक पेपर के साथ उत्तीर्ण' भी साफ शब्दों में लिखा जाएगा।

बिना बैक क्लियर किए पीजी कर रहे छात्रों पर गाज

परीक्षा समिति ने उन मामलों में भी सख्त रुख अपनाया है जो वर्तमान में बिना स्नातक का बैक पेपर पास किए पीजी की पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे सभी विद्यार्थियों के प्रवेश को निरस्त करने का कड़ा फैसला लिया गया है। इस निर्णय से उन छात्रों को बड़ा झटका लगा है जो स्नातक की पुरानी बैक पास किए बिना ही अगली डिग्री में पढ़ाई जारी रखे हुए थे।

मामले की जानकारी देते हुए परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर ने बताया कि विश्वविद्यालय के नियमों और अध्यादेश (ऑर्डिनेंस) में जो अवधि तय की गई है, अब सभी विद्यार्थियों को उसी निर्धारित समय में अपना पाठ्यक्रम पूरा करना होगा। किसी भी स्थिति में तय समय से अधिक का अवसर प्रदान नहीं किया जाएगा। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में लंबे समय से स्नातक और स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रमों में बैक पेपर प्रणाली को लेकर ढील दी जा रही थी। पूर्व में छात्र स्नातक के किसी विषय में अनुत्तीर्ण या बैक होने के बावजूद स्नातकोत्तर में प्रवेश ले लेते थे और बाद में सहूलियत के अनुसार बैक पेपर की परीक्षा देते थे। इससे न केवल विश्वविद्यालय के परीक्षा और परिणाम सत्र में देरी होती थी, बल्कि कई छात्र वर्षों तक अपनी डिग्रियां अटकाए रखते थे। शैक्षणिक सत्रों को नियमित करने और परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने अध्यादेश के कड़े पालन का रुख अपनाया है। परीक्षा समिति की इस बैठक का मुख्य उद्देश्य डिग्रियों की साख बचाना और विद्यार्थियों में पढ़ाई को लेकर गंभीरता सुनिश्चित करना है।
 

ये भी पढ़ेंः- नेपाल में मूसलाधार बारिश से बिहार की नदियों में बढ़ा जलस्तर, कई गांवों में बाढ़, सीएम ने देखी स्थिति

अन्य प्रमुख खबरें