JPSC-JSSC परीक्षा सुधार को लेकर छात्रों का अल्टीमेटम, 7 अक्टूबर तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा आंदोलन

खबर सार :-

झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में पारदर्शिता और नियमित भर्ती की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने सरकार को 7 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर छात्र महाजुटान की चेतावनी दी गई है।
JPSC-JSSC परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग, छात्रों ने दिया अल्टीमेटम

खबर विस्तार : -

रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में पारदर्शिता, नियमित भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने राज्य सरकार को 7 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि तय समय सीमा के भीतर उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यभर से छात्रों को जुटाकर ‘छात्र महाजुटान’ आयोजित किया जाएगा।

रांची में बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्र प्रतिनिधि हर्षित सिंह और खूंटी की अभ्यर्थी निशात परवीन ने छात्रों की मांगों को सामने रखा। छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में सुधार को लेकर पहले आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से कई आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अब तक उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

दो महीने बाद भी परीक्षा सुधार समिति का गठन नहीं

छात्रों का दावा है कि आंदोलन स्थगित कराने के दौरान वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल के नेतृत्व में परीक्षा सुधार समिति गठित करने का आश्वासन दिया गया था। छात्रों के अनुसार, इस आश्वासन को करीब दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक समिति का गठन नहीं किया गया है। प्रतियोगी छात्रों ने सरकार से मांग की है कि परीक्षा सुधार समिति का गठन जल्द किया जाए और उसमें छात्रों की ओर से उठाए गए प्रमुख मुद्दों को शामिल कर परीक्षा प्रणाली में जरूरी बदलाव किए जाएं। इसके साथ ही छात्रों ने JPSC में अध्यक्ष और बोर्ड के सदस्यों के रिक्त पदों पर भी जल्द नियुक्ति करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि आयोग के महत्वपूर्ण पद खाली रहने से परीक्षाओं, साक्षात्कार और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असमंजस और अनिश्चितता बनी हुई है।

वार्षिक परीक्षा कैलेंडर की मांग

छात्र प्रतिनिधियों ने JPSC और JSSC के लिए UPSC की तर्ज पर वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षा कैलेंडर जारी होने के बाद उसे निर्धारित समय के अनुसार लागू किया जाना चाहिए, ताकि प्रतियोगी छात्र अपनी तैयारी की बेहतर योजना बना सकें। छात्रों ने पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद 22 से अधिक परीक्षाओं को रद्द करना पड़ा है। छात्रों का कहना है कि बार-बार परीक्षा रद्द होने से अभ्यर्थियों का समय और मेहनत दोनों प्रभावित होते हैं।

नियमित भर्ती नहीं होने का मुद्दा

प्रतियोगी छात्रों ने सरकारी नौकरियों में नियमित भर्ती नहीं होने को भी प्रमुख मुद्दा बताया। छात्रों के अनुसार, दरोगा भर्ती का अंतिम विज्ञापन 2017 में जारी हुआ था और 2018 में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हुई थी। इसके बाद इस पद के लिए नई भर्ती नहीं हुई है। इसी तरह छात्रों ने एलडीसी भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2020 में आवेदन लिए जाने के बाद विज्ञापन वापस ले लिया गया था। छात्रों ने मांग की कि विभिन्न सरकारी पदों के लिए नियमित अंतराल पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।

प्रारंभिक परीक्षा में बदलाव की मांग

छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में कई सुधारों का सुझाव भी दिया है। इनमें प्रारंभिक परीक्षा में ई-ऑप्शन और नेगेटिव मार्किंग लागू करने की मांग शामिल है। इसके अलावा छात्रों ने श्रेणीवार कटऑफ और अभ्यर्थियों की मार्कशीट जारी करने की मांग की है। छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए अभ्यर्थियों को कम से कम 90 दिन का समय मिलना चाहिए। उनका कहना है कि इससे छात्रों को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

कॉपी जांच को लेकर भी सुझाव

मुख्य परीक्षा में शॉर्ट आंसर आधारित प्रश्न शामिल करने की मांग भी छात्रों ने रखी है। इसके साथ ही झारखंड से जुड़े विषयों को परीक्षा में प्राथमिकता देने की बात कही गई है। क्षेत्रीय भाषाओं के मूल्यांकन में स्केलिंग पैटर्न लागू करने और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की गोपनीयता सुनिश्चित करने की मांग भी छात्रों ने की है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा और कॉपी मूल्यांकन की प्रक्रिया जितनी पारदर्शी और सुरक्षित होगी, अभ्यर्थियों का भरोसा उतना ही मजबूत होगा।

सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता की मांग

छात्र प्रतिनिधियों ने एक और महत्वपूर्ण मांग रखते हुए कहा कि जो अभ्यर्थी परीक्षा के अंतिम चरण यानी इंटरव्यू तक पहुंचते हैं, लेकिन अंतिम मेरिट सूची में जगह नहीं बना पाते, उन्हें अन्य सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने पर विचार किया जाना चाहिए। इसके अलावा छात्रों से जुड़े मामलों में अदालत में सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी करने की मांग भी की गई है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा और भर्ती से जुड़े मामलों में लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चलने से अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है।

7 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम

छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि 7 अक्टूबर तक उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि इस अवधि तक परीक्षा सुधार समिति का गठन नहीं किया गया और JPSC के अध्यक्ष तथा बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई, तो राज्यभर से छात्रों को जुटाकर ‘छात्र महाजुटान’ आयोजित किया जाएगा। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, नियमितता और जवाबदेही सुनिश्चित कराना है। अब सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर छात्रों की नजर रहेगी।

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