अनूपपुर में 226 स्थानों पर विराजे गणपति, ऋषि पंचमी पर अमरकंटक में उमड़े श्रद्धालु

खबर सार :-

मध्य प्रदेश के जिला अनूपपुर में गणेशोत्सव की धूम है। यहां 226 स्थानों पर गणपति की मूर्तियों की स्थापना की गई है। ऋषि पंचमी पर महाराष्ट्र से आए भक्तों ने नर्मदा में डुबकी लगाई।
अनूपपुर में गणपति की धूम, ऋषि पंचमी पर भक्तों ने नर्मदा में लगाई डुबकी

खबर विस्तार : -

अनूपपुर: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में गणेशोत्सव को लेकर उत्साह का माहौल है। इस साल जिले के अलग-अलग पुलिस थाना क्षेत्रों में 226 जगहों पर भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। मंगलवार को भी गणपति बप्पा की मूर्तियों को घरों और सार्वजनिक पंडालों तक ले जाने का सिलसिला जारी रहा। शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, भक्त बड़े उत्साह के साथ गणेश जी की मूर्तियां पंडालों और घरों तक ले जाते दिखे।

कुछ भक्त गणेश जी की मूर्ति को सिर पर उठाकर ले जा रहे थे, तो कुछ लोग दोपहिया और बड़े वाहनों से मूर्तियों को पंडालों तक ले गए। घरों में भी पूरी विधि-विधान के साथ मूर्तियां स्थापित की जा रही हैं। आने वाले दिनों में मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में जुटने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के इंतजाम किए हैं।

चचाई में सबसे ज्यादा गणेश मूर्तियां

पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में स्थापित 226 मूर्तियों में 132 छोटी और 94 बड़ी मूर्तियां शामिल हैं। थाना-वार आंकड़ों से पता चलता है कि कोतवाली इलाके में 31, चचाई में 32, जैतहरी में 25, कोतमा में 18, भालूमाडा में 21, बिजुरी में 34, राजेंद्रग्राम में 19, अमरकंटक में 7 और करनपाथर पुलिस थाना क्षेत्र में 19 जगहों पर गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। गणेश जी की मूर्तियों की स्थापना के साथ-साथ कई जगहों पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी भी शुरू हो गई है। सार्वजनिक पंडालों में भक्तों की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम किए हैं।

ऋषि पंचमी पर अमरकंटक में पवित्र स्नान

मंगलवार को ऋषि पंचमी के मौके पर महाराष्ट्र से हजारों भक्त पवित्र नर्मदा नदी के किनारे रामघाट पर स्नान और पूजा-अर्चना करने के लिए अमरकंटक पहुंचे। महाराष्ट्र से भक्तों का अमरकंटक पहुंचना सुबह करीब 5 बजे ही शुरू हो गया था। महाराष्ट्र के नागपुर, कामठी, भंडारा, अमरावती, नासिक, पुणे और बारामती जैसे  अलग-अलग इलाकों से आईं महिलाओं ने नर्मदा नदी के किनारे पहुंचकर पवित्र स्नान किया। इसके बाद ध्यान, मंत्र-जाप, पूजा और आरती का कार्यक्रम हुआ। रामघाट का माहौल भक्तिमय हो गया; वहां नर्मदा के पानी की हल्की आवाज़, वैदिक मंत्रों का जाप और महिलाओं द्वारा की जा रही सामूहिक आरती गूंज रही थी।

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महिलाओं ने नर्मदा किनारे बनाए शिवलिंग

ऋषि पंचमी की धार्मिक परंपराओं के अनुसार, महिलाओं ने नर्मदा किनारे मिट्टी से शिवलिंग बनाए। साथ ही, उन्होंने प्रकृति से मिली पारंपरिक चीजों पत्ते, फूल, बेलपत्र, घास और खेतों से मिले अनाज का इस्तेमाल करके भगवान गणेश की मूर्तियां भी बनाईं। महिलाओं ने शिवलिंग और गणेश जी की मूर्तियों की विधि-विधान से पूजा की। आरती करने से पहले उन्होंने भगवान शिव और गणपति बप्पा को फूल, बेलपत्र और दूसरी पवित्र चीजें अर्पित कीं। पारंपरिक कपड़ों में सजी-धजी महिलाओं की सामूहिक पूजा ने नदी के किनारे गहरे सम्मान और आध्यात्मिक आनंद का माहौल बना दिया।

ऋषि पंचमी का धार्मिक महत्व क्या है?

हिंदू परंपरा में ऋषि पंचमी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पांचवीं तिथि को मनाई जाती है। यह त्योहार सप्तऋषियों (सात महान ऋषियों) के प्रति सम्मान और कृतज्ञता तथा आत्म-शुद्धि की भावना से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, ऋषियों को याद करने और उनकी पूजा करने से जीवन में पवित्रता, आत्म-संयम और सदाचार जैसे गुण मजबूत होते हैं। खासकर महिलाएँ ऋषि पंचमी पर व्रत रखकर और पूजा करके ऋषियों की परंपरा के प्रति अपना सम्मान प्रकट करती हैं। इस त्योहार को प्रकृति, ऋषियों की परंपरा और सनातन (शाश्वत) सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आभार व्यक्त करने के अवसर के रूप में भी देखा जाता है। अमरकंटक में इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह नर्मदा नदी का उद्गम स्थल और गहरी आध्यात्मिक साधना की भूमि (तपोभूमि) है।

महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए अमरकंटक

खबरों के अनुसार, महाराष्ट्र से भक्त पिछले तीन-चार सालों से ऋषि पंचमी के मौके पर लगातार अमरकंटक आ रहे हैं। हर साल, महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा में स्नान करने, मां नर्मदा का आशीर्वाद लेने और भगवान शिव व भगवान गणेश की पूजा करने के लिए यहां आते हैं। इस साल भी, सैकड़ों गाड़ियों में भरकर पुरुष, महिलाएं और अन्य श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचे हैं। स्थानीय अनुमानों और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, लगभग 14,000 से 15,000 श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचे हैं। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से शहर में त्योहार जैसा धार्मिक माहौल बन गया है।

FAQ

1. ऋषि पंचमी कब मनाई जाती है?

हिंदू परंपरा में ऋषि पंचमी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पांचवीं तिथि को मनाई जाती है।

2. ऋषि पंचमी क्यों मनाई जाती है?

सप्तऋषियों के प्रति सम्मान और आदर प्रकट करने के लिए ऋषि पंचमी मनाई जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और पूजा-पाठ करने से जीवन में सदाचार, पवित्रता और आत्म-संयम जैसे गुण मजबूत बनते हैं।

3. अमरकंटक का क्या महत्व है?

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित अमरकंटक एक पवित्र तीर्थ स्थल है। यह पवित्र नर्मदा नदी, सोन नदी और जोहिला नदी का उद्गम स्थल है। केवल इतना ही नहीं, अमरकंटक कपिल मुनि, दुर्वासा ऋषि और भृगु ऋषि की तपोस्थली भी है।

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