आंध्र प्रदेश में वन्यजीव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश, DRI की टीम ने किया दुर्लभ जीवों का रेस्क्यू
खबर सार :-
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में डीआरआई की टीम ने अभियान चलाकर दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीवों को तस्करी से बचाया है। इनमें जायंट गिलहरी, इंडियन स्टार कछुआ और स्माॅल इंडियन सिवेट शामिल हैं।
खबर विस्तार : -
मुंबई: डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की मुंबई जोनल यूनिट की नागपुर रीजनल यूनिट ने आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में वन्यजीवों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया। 24 और 25 जून को चलाए गए एक स्पेशल ऑपरेशन के दौरान, अधिकारियों ने कई दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीव प्रजातियों को बचाया।
DRI की टीम ने सबसे पहले श्रीकाकुलम शहर में एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा। उसके पास से पिंजरों में बंद चार मालाबार जाइंट गिलहरी, एक इंडियन स्टार कछुआ और 14 जंगली मुर्गियां बरामद की गईं। सभी जानवरों को सुरक्षित बचा लिया गया।
दुर्गम इलाके में चलाया अभियान
पूछताछ के बाद, DRI की टीम श्रीकाकुलम से लगभग 60 किलोमीटर दूर रायकुर्डी गांव के एक दूर-दराज इलाके में पहुंची। वहां पहुंचना बहुत मुश्किल था और वहां बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं। मुश्किल हालात के बावजूद, अधिकारियों ने देर रात तक ऑपरेशन जारी रखा और उस जगह से 'स्मॉल इंडियन सिवेट' के दो बच्चों को बचाया।
दुर्लभ पशुओं के मिली कानूनी सुरक्षा
DRI ने बताया कि मालाबार जाइंट गिलहरी, स्मॉल इंडियन सिवेट और इंडियन स्टार कछुआ को 'वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972' की अनुसूची-I (Schedule-I) में शामिल किया गया है। इन प्रजातियों को सबसे ज्यादा कानूनी सुरक्षा मिली हुई है; इनका शिकार करना, अपने पास रखना, एक जगह से दूसरी जगह ले जाना और इनका व्यापार करना पूरी तरह से मना है। बरामद किए गए सभी वन्यजीवों को 'वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972' के प्रावधानों के तहत जब्त कर लिया गया। जब्ती की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, आरोपी और बचाए गए जानवरों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए श्रीकाकुलम वन विभाग को सौंप दिया गया।
विदेशी बाजारों में इनकी मांग
DRI के अनुसार, इन दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों की 'एग्जाॅटिक पेट मार्केट' (विदेशी पालतू जानवरों के बाजार) और वन्यजीव इकट्ठा करने वालों के बीच बहुत ज्यादा मांग है। इसी वजह से तस्कर इन्हें निशाना बनाते हैं, जिससे जैव-विविधता और इन संरक्षित प्रजातियों के प्राकृतिक अस्तित्व को गंभीर खतरा पैदा होता है। DRI ने कहा कि वह राज्य वन विभाग और अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर, खुफिया जानकारी के आधार पर वन्यजीवों की तस्करी के खिलाफ लगातार ऑपरेशन चला रही है। लोगों से भी अपील की गई है कि अगर उन्हें वन्यजीवों की अवैध तस्करी के बारे में कोई जानकारी मिले, तो वे तुरंत कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सूचित करें।
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