यूपी आगामी चुनाव को लेकर बसपा की तैयारियां तेज, मायावती ने किया अहम बैठक
खबर सार :-
UP Upcoming Elections: उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव को लेकर बहुजन समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बैठक की है, जिसमें संगठन को मजबूत करने और बूथ समितियों को लेकर विशेष चर्चा की गई।
खबर विस्तार : -
UP Upcoming Elections: लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में बहुजन समाजवादी पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारियों को लेकर अहम बैठक की। इस बैठक में संयोजक से लेकर मंडल के कई अध्यक्ष शामिल रहे। बैठक में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने से लेकर सेक्टर-बूथ समितियों के गठन पर विशेष जोर दिया गया। उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव को लेकर तैयारी इस लिए भी तेज हो गई है, क्योंकि इस राज्य की कुल आबादी में दलित वर्ग करीब 21 प्रतिशत की हिस्सेदारी मानी जाती है। यहां सबसे अधिक दलित मतदाताओं का संख्या है। इसलिए विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में इन्हें बड़ी संख्या में वोट बैंक माना जाता है।
आगामी चुनाव को लेकर तैयारियों में जुटीं मायावती
बसपा की प्रमुख मायावती लंबे समय से दलित राजनीति का बड़ा चेहरा मानी जाती हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा दलित समुदाय की हिस्सेदारी है। इसलिए बसपा
आगामी चुनाव को लेकर तैयारियों में जुट गई है। बसपा के गठन का मुख्य उद्देश्य दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों का राजनीति में भागीदारी बढ़ाना है। हालांकि 2012 से लेकर 2022 तक के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। फिलहाल अपने खोए हुए वोटबैंक को वापस पाने के लिए बसपा पूरी तैयारी में जुटी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस बार बसपा अपना जनाधार पाने में सफल रही तो इसका सीधा असर विपक्षी दल पर पड़ सकता है।
सपा के सामने चुनौती
बसपा के सफल होने के बाद सपा को भी बड़ा झटका मिल सकता है। 2024 लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस गठबंधन को दलित वोटरों का समर्थन मिलने से सपा अपनी बढ़त बनाने में कामयाब रही थी। आगामी चुनाव में अगर बसपा अपनी पकड़ बनाने में कामयाब रही, तो सपा के लिए चुनौती बन सकता है। राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो, बसपा के एक्शन मोड में आने से सपा का पाला हल्का हो सकता है। सपा का वोट बैंक खासकर दलित-पिछड़े वर्ग के लोग माने जाते हैं अगर यह मतदाता बसपा की ओर जाते हैं तो सपा के वोट बैंक में कमी आ सकती है।
अपना वोटबैंक पानी की तैयारी
बसपा दलित वोट के साथ-साथ पिछड़े और अन्य सामाजिक वर्ग के लोगों को भी अपना जनाधार बनाने की कोशिश कर रही है। 2027 की आगामी चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां अभी से शुरु कर दी है। एक तरफ जहां बसपा संगठन को मजबूत बनाने और अपने वोटबैंक को फिर से पाने में लगी हुई है, तो वहीं दूसरी ओर सपा के सामने दलित वर्ग के समर्थन को बनाए रखने की चुनौती तेज हो गई है।
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