तीन लग्जरी कार चोर पकड़े, जेल में बड़े कार चोरों से बनाई पहचान, म्यांमार बार्डर तक जमा रखा था नेटवर्क

खबर सार :-

देश के अलग-अलग राज्यों में दिल्ली-एनसीआर से लग्जरी कारें चोरी कर खपाने वाले 15 साल पुराने गिरोह का खुलासा हुआ है। इनके तीन साथी गिरफ्तार किए गए हैं।
15 साल से चुरा रहे थे लग्जरी कार, गैंग का नेटवर्क म्यांमार सीमा तक, सौ कार चुराने का दावा

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: देश के अलग-अलग राज्यों में दिल्ली-एनसीआर से लग्जरी कारें चोरी कर खपाने वाले संगठित गिरोह का क्राइम ब्रांच की एआरएससी टीम ने पर्दाफाश किया है। सरगना समेत तीन आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे और निशानदेही पर पांच चोरी की कारें, 104 फर्जी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट और 24 फर्जी आरसी बरामद की गई हैं।

आर्म्स एक्ट समेत 38 मामले पहले से दर्ज

 पुलिस के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों दिल्ली-एनसीआर से लेकर राजस्थान, पंजाब, असम, पश्चिम बंगाल, नागालैंड और मणिपुर तक फैला हुआ था। इनकी तैयारी मणिपुर के उखरुल जिले में म्यांमार सीमा के पास कार सौदेबाजी की थी। पुलिस को कुछ भनक थी। सूत्रों से पता चलने पर ऑपरेशन चालू किया गया। इसमें बरामद दो चोरी की कारों को भूमिगत संगठनों को बेचने की तैयारी थी। इस दौरान रोहिणी निवासी अमित नगर उर्फ सोनू, मणिपुर के इंफाल ईस्ट निवासी एटम जगत सिंह और मुकेश सिंह की गिरफ्तारी हुई है। इनमें अमित नगर के खिलाफ वाहन चोरी और आर्म्स एक्ट समेत 38 मामले पहले से दर्ज हैं।

जेल में बना ली चोर मंडली

अमित नगर वाहन चोरी में उस्ताद है। करीब 15 साल पहले लग्जरी कारों की चोरी शुरू की थी। वह जेल भी जा चुका है। इस दौरान उसने कई लोगों से पहचान बना ली। इनमें कई वाहन चोर और रिसीवर थे। धीरे-धीरे उसने चोरी की कारों की सप्लाई और बिक्री का बड़ा नेटवर्क बना लिया। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इसने सौ महंगी कार चुराने का दावा किया है। इसने पुलिस को बताया कि अब तक अलग-अलग राज्यों में 100 से ज्यादा चोरी की महंगी कारें रिसीवरों तक पहुंचाई है।

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इस कार चोरी गिरोह के सदस्य आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कंप्यूटर आधारित स्कैनिंग डिवाइस की मदद लेते थे। ये कारों के इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल मॉड्यूल (ईसीएम) को बाईपास करते थे। इसके जरिए डुप्लीकेट चाबी तैयार करते और फिर कार लेकर फरार हो जाते थे। अक्सर यह महंगी कारों और एसयूवी को निशाना बनाते थे। चोरी की गई कारें अमित नगर तक पहुंचाई जाती थीं। वह अपने नेटवर्क का सहारा लेता और फिर कार को दूसरे राज्यों में भेज दिया जाता था। इन कारों का फर्जी नंबर और नंबर प्लेट बनाई जाती थी। नेटवर्क में ही आरसी का इंतजाम भी होता था।

50 हजार रुपये मुनाफा लेता था

मुकेश सिंह और एटम जगत सिंह के बारे में पुलिस का कहना है कि चोरी की कारें अमित से खरीदकर मणिपुर के सीमावर्ती इलाकों में बेचते थे। अमित एक कार करीब 1.5 से दो लाख रुपये में एटम को बेचता था। इन्हें वह 40 से 50 हजार रुपये का मुनाफा लेकर बेच देता था। वह मणिपुर के रिसीवरों के बीच बिचौलिए की भूमिका में था। पुलिस को जांच में पता चला कि अमित सीधे दूसरे सदस्यों से नहीं मिलता था। वह मैसेजिंग एप के जरिये संपर्क करता था। चोरी की कारें रात के समय दिल्ली में पहुंचाते थे। इनका स्थान तय नहीं होता था। क्राइम ब्रांच ने 12 मई को एक छापा डाला था।

इसमें छतरपुर एन्क्लेव फेज-2 मुकेश सिंह को पकड़ा गया था। इस दौरान उसके पास दो फर्जी आरसी मिलीं। वाहन चोरी से संबंधित सामग्री जैसे नंबर प्लेट लगाने वाला उपकरण, रिवेट का पैकेट, 104 फर्जी एचएसआरपी और 22 फर्जी आरसी पाई गई थी। इसने पुलिस को वजीराबाद गांव में ग्रे रंग की मारुति बलेना की जानकारी दी थी। मुकेश ने एटम जगत सिंह के साथ होने की जानकारी दी। उसकी पहचान पर एटम जगत सिंह को गिरफ्तार किया गया। इसके जरिए मुकर्जी नगर से चोरी की मारुति स्विफ्ट बरामद कर अमित नगर को गिरफ्तार किया गया। इसके पास से चोरी की मारुति स्विफ्ट डिजायर बरामद हुई। 

13 अगस्त को बड़ा सुराग मिला

एटम जगत सिंह जब पुलिस के हाथ आया तो मणिपुर के उखरुल जिले में म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास से किआ सेल्टोस और हुंडई क्रेटा भी बरामद कर ली गईं। यह दोनों कारें दिल्ली से चुराई गई थी। इन कारों को सीमावर्ती इलाके में खपाने की तैयारी थी। क्राइम ब्रांच ने बताया की गिरोह के सदस्यों की अलग-अलग जिम्मेदारी थी। इनके संपर्क में राजस्थान, पंजाब, असम, पश्चिम बंगाल, नागालैंड और मणिपुर तक के रिसीवर और चोर थे। अब चोरी की गई 100 से अधिक कारों का पता पुलिस लगा रही है।

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