नीरव मोदी से जुड़े पीएनबी घोटाले के प्रमुख आरोपियों में शामिल संदीप मिस्त्री को सीबीआई ने यूएई से लाया भारत

खबर सार :-

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के समन्वय से भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े करोड़ों रुपये के पंजाब नेशनल बैंक घोटाला मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल संदीप मिस्त्री को संयुक्त अरब अमीरात से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है।
नीरव मोदी के पीएनबी घोटाले के आरोपी संदीप मिस्त्री को लाया गया भारत

खबर विस्तार : -

मुंबई: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के समन्वय से भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े करोड़ों रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाला मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल संदीप मिस्त्री को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

संदीप मिस्त्री के खिलाफ इंटरपोल ने जारी किया गया था रेड नोटिस 

संदीप मिस्त्री के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी किया गया था। वह सीबीआई की बैंक सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच (बीएसएफबी), मुंबई द्वारा जांच किए जा रहे एक मामले में वांछित था। उस पर शेल कंपनियों के जरिए कथित तौर पर फर्जी अंतरराष्ट्रीय व्यापार लेनदेन में शामिल होने का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार, मिस्त्री ने इस कथित धोखाधड़ी में शामिल कई कंपनियों और संस्थाओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम किया। वह इन संस्थाओं के रोजमर्रा के कामकाज को संभालता था और जांच एजेंसियों की नजर से बचने तथा सबूत नष्ट करने के लिए गुप्त रूप से ऐसे संचार प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता था, जिनमें संदेश अपने आप डिलीट हो जाते थे।

डमी निदेशकों को गिरफ्तारी की दी जाती थी धमकी 

सीबीआई का आरोप है कि मिस्त्री ने हीरे, सोने और मोती के आभूषणों के काल्पनिक कारोबार को वास्तविक दिखाने के लिए फर्जी आयात-निर्यात दस्तावेज तैयार कराने में मदद की। उस पर अन्य साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर विदेशी कंपनियों के डमी निदेशकों को डराने-धमकाने का भी आरोप है। जांच के मुताबिक, डमी निदेशकों को गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी, उनका स्थान बदलवाया जाता था और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जाते थे। इसके अलावा, उन्हें ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जाता था, जिनमें उन्हें संबंधित कंपनियों का वैध मालिक बताया गया था। जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि मिस्त्री ने यूएई में स्थित डमी कंपनियों के बैंक खातों से धन निकालने में भूमिका निभाई। 

इंटरपोल के लिए नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में काम करती है सीबीआई 

इस मामले में सीबीआई पहले ही सक्षम अदालत के समक्ष आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। सीबीआई के अनुरोध पर इंटरपोल ने जुलाई 2026 में मिस्त्री के खिलाफ रेड नोटिस जारी किया था। इसके बाद यूएई के अधिकारियों ने उसे तलाश कर गिरफ्तार किया और उसके प्रत्यर्पण/डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की। जांच एजेंसी ने बताया कि रेड नोटिस जारी होने के करीब दो महीने के भीतर मिस्त्री को यूएई में तलाशने, गिरफ्तार करने और भारत वापस लाने में सफलता मिली। सीबीआई ने इसे भारतीय और यूएई अधिकारियों के बीच प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण बताया है। मिस्त्री 28 सितंबर को मुंबई पहुंचा, जहां आगमन के बाद सीबीआई अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया। बाद में उसे सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सीबीआई भारत की ओर से इंटरपोल के लिए नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में काम करती है। एजेंसी घरेलू कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ भारतपोल के माध्यम से समन्वय कर अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग को सुगम बनाती है। सीबीआई के अनुसार, इंटरपोल चैनलों के जरिए समन्वित प्रयासों के माध्यम से हाल के वर्षों में 175 से अधिक वांछित भगोड़ों को भारत वापस लाया जा चुका है।

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