MP: मध्य प्रदेश की बाग प्रिंट कला को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान, पेरिस में होगा प्रदर्शन
खबर सार :-
मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध बाग प्रिंट कला को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने वाली है। फ्रांस में होने वाले प्रतिष्ठित मेले ‘फोयर डे पेरिस’ में इस कला का प्रदर्शन किया जाएगा।
खबर विस्तार : -
भोपालः प्रदेश की विशिष्ट बाग प्रिंट कला को फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित मेले ‘’फोयर डे पेरिस” में प्रदर्शित किया जायेगा। यह मेला 30 अप्रैल से 11 मई तक पेरिस के पोर्टे डे वर्साय प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित किया जाएगा।
जनसंपर्क अधिकारी जूही श्रीवास्तव ने सोमवार को बताया कि केन्द्रीय वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय द्वारा देशभर से चयनित पांच श्रेष्ठ शिल्पकारों में प्रदेश के नेशनल अवार्डी शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री को शामिल किया गया है। वे इस मेले में प्रदेश की बाग प्रिंट कला का प्रतिनिधित्व करते हुए मास्टर क्राफ्ट्समैन के रूप में शामिल होंगे। बाग प्रिंट हस्तशिल्प भौगोलिक संकेत (जीआई) के अंतर्गत संरक्षित है।
कला का प्रदर्शन करेंगे बिलाल खत्री
इस अन्तरराष्ट्रीय मेले में बिलाल खत्री बाग प्रिंट कला का लाइव प्रदर्शन करेंगे। पारंपरिक प्राकृतिक रंगों, नक्काशीदार लकड़ी के ब्लॉक्स और हस्तनिर्मित तकनीकों के माध्यम से कपड़ों पर उभरती कलाकृतियों को अन्तरराष्ट्रीय दर्शक प्रत्यक्ष देख सकेंगे। यह भारतीय हस्तशिल्प की गहराई और सौंदर्य को समझने का अनूठा अवसर प्रदान करेगा। जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि इस विशेष प्रदर्शनी के लिए तैयार किए गए डिजाइन में भारतीय पारंपरिक शिल्प और आधुनिक वैश्विक सौंदर्यबोध का समन्वय किया गया है। यूरोपीय बाजार की पसंद को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई ये कृतियां बाग प्रिंट को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देंगी।
400 वर्ष पुराना है इतिहास
‘बाग प्रिंट’ मध्य प्रदेश के धार जिले के बाग क्षेत्र की पारंपरिक हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग कला है। बाग एक छोटा जनजातीय कस्बा है, जहां भील और भिलाला समुदाय निवास करते हैं और प्राचीन बाघ गुफाएं भी स्थित हैं। इस कला की परंपरा खत्री समुदाय द्वारा लगभग 400 वर्ष पूर्व सिंध के लरकाना क्षेत्र से आकर स्थापित की गई मानी जाती है।
इस शिल्प में सूती और रेशमी कपड़ों को पारंपरिक प्राकृतिक प्रक्रियाओं से तैयार किया जाता है। कुशल कारीगरों द्वारा लकड़ी के ब्लॉक्स से डिजाइन तैयार कर उन्हें हाथ से भरा जाता है। तैयार वस्त्रों को बहते पानी में धोकर धूप में सुखाया जाता है, जिससे उन्हें विशिष्ट फिनिश प्राप्त होती है। ‘बाग प्रिंट’ में लाल और काले रंग के ज्यामितीय एवं पुष्पीय रूपांकन प्रमुख होते हैं।
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