अमेठी की ज़मीन से निकले 'रहस्यमयी 29 गोले': इतिहास के पन्नों से जुड़ा है कनेक्शन, पुरातत्व विभाग की टीम ने किया खुलासा

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश के अमेठी में शौचालय की खुदाई के दौरान तांबे से बने 29 प्राचीन तोप के गोले मिले हैं। पुरातत्व विभाग ने इसे ऐतिहासिक खोज बताते हुए आगे के शोध की बात कही है। जानें क्या है पूरा मामला।
अमेठी: शौचालय की खुदाई में मिले 29 प्राचीन तोप के गोले, पुरातत्व विभाग ने की पुष्टि

खबर विस्तार : -

Amethi News: उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में एक सामान्य घरेलू निर्माण कार्य के दौरान हुई खुदाई ने इतिहास की एक दबी हुई परत को फिर से जीवित कर दिया है। मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र के भनौली गांव में जब मोहम्मद इकबाल अपने भूखंड पर शौचालय के लिए गड्ढा खुदवा रहे थे, तो किसी को यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें जमीन के नीचे कोई खजाना नहीं, बल्कि दशकों पुराना एक सैन्य इतिहास मिलेगा। खुदाई में निकले 29 धातु के भारी गोलों ने न केवल ग्रामीणों को हैरान कर दिया, बल्कि पुरातत्व विभाग को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

शौचालय की खुदाई और अचानक मिला सैन्य इतिहास

घटना की शुरुआत सोमवार को हुई जब मजदूर सामान्य खुदाई कर रहे थे। अचानक फावड़े से किसी भारी वस्तु के टकराने की आवाज आई। मजदूरों ने जब मिट्टी हटाई तो गोलाकार धातु की आकृति बाहर निकली। पहले तो किसी को लगा कि यह कोई सामान्य पत्थर या कबाड़ है, लेकिन जब एक के बाद एक कुल 29 गोले बाहर निकले, तो मामला गंभीर हो गया। निर्माण कार्य तुरंत रोक दिया गया और भू-स्वामी ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया।

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तांबे के गोलों का रहस्य और पुरातत्व विभाग का निष्कर्ष

सूचना पाकर बुधवार को लखनऊ से उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग की टीम भनौली गांव पहुंची। टीम के नेतृत्व कर रहे सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने इन गोलों का बारीकी से निरीक्षण किया। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ये गोले साधारण नहीं हैं। डॉ. यादव ने बताया कि ये गोले तांबे से निर्मित हैं और इनकी बनावट साफ तौर पर संकेत देती है कि इनका उपयोग प्राचीन काल में तोपों में गोला-बारूद के रूप में किया जाता था। प्रत्येक गोले का वजन लगभग 9 से 10 किलोग्राम है और उन पर समय की मार के कारण हरे रंग की एक परत (पेटिना) जम चुकी है, जो उनकी प्राचीनता की गवाह है। कुछ गोलों में फ्यूज लगाने के लिए विशेष छेद भी पाए गए हैं, जो इनके युद्धकालीन उपयोग की पुष्टि करते हैं।

भविष्य का शोध और सुरक्षा व्यवस्था

फिलहाल, प्रशासन ने घटनास्थल को पूरी तरह से सील कर दिया है और वहां पुलिस बल तैनात है। भू-स्वामी को अगले आदेश तक निर्माण कार्य न करने की हिदायत दी गई है। पुरातत्व विभाग के अनुसार, इन गोलों का इतनी बड़ी संख्या में एक ही स्थान पर मिलना यह दर्शाता है कि अतीत में कभी यहाँ एक शस्त्र डिपो या सैन्य ठिकाना रहा होगा, जहाँ इन्हें निष्क्रिय करके दबाया गया था। अब सवाल यह है कि क्या इस पूरे इलाके की विस्तृत खुदाई की जाएगी? इस पर डॉ. मनोज कुमार यादव का कहना है कि यह अब एक शोध का विषय है। पुरातत्व विभाग और शासन के उच्च अधिकारी मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे। जब तक उच्च अधिकारियों से कोई स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हो जाते, तब तक इस क्षेत्र को संरक्षित रखा जाएगा। यह घटना न केवल अमेठी के लिए, बल्कि उत्तर प्रदेश के पुरातात्विक इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।

FAQ... 

1. खुदाई में गोला मिलने की  घटना कहाँ की है?
घटना उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले की मुसाफिरखाना तहसील के भनौली गांव की है।

2. खुदाई के दौरान क्या और कितने अवशेष मिले हैं?
ज़मीन की खुदाई के दौरान तांबे से बने कुल 29 भारी और गोलाकार अवशेष मिले हैं, जिन्हें पुरातत्व विभाग ने तोप के गोले बताया है।

3. इन गोलों के बारे में पुरातत्व विभाग का क्या कहना है?
पुरातत्व विभाग के अनुसार ये गोले करीब 80 से 90 वर्ष पुराने हैं, जिनका उपयोग प्राचीन काल में तोपों में गोला-बारूद के रूप में किया जाता था।

4. वर्तमान में इस स्थान पर क्या स्थिति है?
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने मौके पर निर्माण कार्य रोक दिया है और घटनास्थल पर पुलिस बल तैनात कर दिया है।

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