Global Tension का असर: लाल निशान में खुला शेयर बाजार, Sensex 400 अंक लुढ़का, IT और Banking शेयरों पर दबाव
खबर सार :-
वैश्विक तनाव और तेल कीमतों में उछाल ने भारतीय शेयर बाजार की दिशा को प्रभावित किया है। जब तक मध्य पूर्व की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को सावधानी बरतते हुए दीर्घकालिक नजरिया अपनाना चाहिए और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए, ताकि अनिश्चित माहौल में भी संतुलित निवेश निर्णय लिया जा सके।
खबर विस्तार : -
Global Tension Impact: पिछले कारोबारी सत्र में जोरदार तेजी दिखाने के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते गिरावट के साथ शुरुआत की। बाजार खुलते ही निवेशकों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए। इस गिरावट की बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी रही।
BSE-NSE में बिकवाली का दबाव
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,562.90 के स्तर से 243.57 अंक गिरकर 77,319.33 पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी50 भी 88.3 अंकों की गिरावट के साथ 23,909.05 पर खुला। शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव लगातार बना रहा और सुबह करीब 9:40 बजे सेंसेक्स 444.41 अंक यानी 0.57 प्रतिशत गिरकर 77,118.49 पर कारोबार करता दिखा। इसी दौरान निफ्टी50 भी 101.45 अंक यानी 0.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,895.90 पर ट्रेड करता नजर आया।
व्यापक बाजार की बात करें तो यहां भी हल्की कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.13 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में मामूली 0.02 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई। यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर सतर्कता बनी हुई है और निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार में सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1.17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और रियल्टी सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि, मेटल और फार्मा सेक्टर ने बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की और इनमें हल्की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी50 के टॉप लूजर्स में इंफोसिस, एलएंडटी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, एचसीएलटेक, इंडिगो और श्रीराम फाइनेंस जैसे दिग्गज शेयर शामिल रहे। इन कंपनियों में बिकवाली का दबाव अधिक देखने को मिला। दूसरी ओर, हिंडाल्को, एनटीपीसी, बजाज ऑटो, बीईएल और पावरग्रिड जैसे शेयरों में खरीदारी देखी गई, जिससे ये टॉप गेनर्स की सूची में शामिल रहे।
अमेरिका पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप
गिरावट की सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता रही। खासकर मध्य पूर्व में तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान द्वारा अमेरिका पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाने के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। इस घटनाक्रम का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड वायदा में सुबह के कारोबार के दौरान 3.31 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और इसकी कीमत 97.89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 4.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.38 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ सकता है।
इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते हमले का असर
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने बाजार की धारणा को नकारात्मक बना दिया है। इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते हमले, ईरान की प्रतिक्रिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं। यह जलमार्ग दुनिया की तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां किसी भी तरह की रुकावट से बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
एक्सपर्ट्स की राय
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, इसलिए जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचना चाहिए। ‘गिरावट पर खरीदारी’ की रणनीति अपनाना फिलहाल बेहतर विकल्प हो सकता है, लेकिन ऊंचे स्तरों पर आक्रामक निवेश से बचना जरूरी है।
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