RBI Digital Payment इंडेक्स 500 के पार, सितंबर 2025 में 516.76 पर पहुंचा डीपीआई
खबर सार :-
डिजिटल पेमेंट इंडेक्स का 500 के पार पहुंचना भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के मजबूत होते आधार का संकेत है। यूपीआई की वैश्विक पहचान और बढ़ती भागीदारी से स्पष्ट है कि भारत डिजिटल भुगतान क्रांति का नेतृत्व कर रहा है। आने वाले वर्षों में तकनीकी नवाचार और वित्तीय समावेशन इस गति को और तेज कर सकते हैं।
खबर विस्तार : -
RBI Digital Payment Index: भारत में डिजिटल लेनदेन की रफ्तार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। इसी का परिणाम है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का डिजिटल पेमेंट इंडेक्स (डीपीआई) पहली बार 500 के पार पहुंच गया है। सितंबर 2025 तक यह सूचकांक बढ़कर 516.76 पर पहुंच गया, जबकि मार्च 2025 में यह 493.22 था।
RBI: डिजिटल भुगतान प्रणाली
केंद्रीय बैंक के अनुसार, RBI-DPI में यह उल्लेखनीय वृद्धि देशभर में भुगतान प्रदर्शन और भुगतान को सुगम बनाने वाले कारकों में मजबूत सुधार का परिणाम है। डिजिटल भुगतान प्रणाली में तकनीकी सुदृढ़ता, बढ़ती स्वीकार्यता और उपभोक्ता विश्वास ने इस वृद्धि को गति दी है। आरबीआई 1 जनवरी 2021 से डिजिटल पेमेंट इंडेक्स प्रकाशित कर रहा है। मार्च 2018 को इसका आधार वर्ष माना गया है और उस समय सूचकांक को 100 अंक दिए गए थे। इसके बाद मार्च 2019 में यह बढ़कर 153.47 हो गया। वर्ष 2021 से यह सूचकांक प्रत्येक छह महीने में जारी किया जाता है और पिछले कुछ वर्षों में इसमें तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश में डिजिटल भुगतान (Digital Payment) के व्यापक प्रसार को दर्शाती है।

डिजिटल पेमेंट इंडेक्स पांच प्रमुख मापदंडों पर आधारित
डिजिटल पेमेंट इंडेक्स पांच प्रमुख मापदंडों पर आधारित है। इनमें भुगतान प्रदर्शन को सबसे अधिक 45 प्रतिशत भार दिया गया है। भुगतान को सुगम बनाने वाले कारकों का भार 25 प्रतिशत है। मांग पक्ष की भुगतान अवसंरचना और आपूर्ति पक्ष की भुगतान अवसंरचना को 10-10 प्रतिशत भार मिला है, जबकि उपभोक्ता केंद्रितता को 5 प्रतिशत महत्व दिया गया है। प्रत्येक मापदंड के अंतर्गत कई उप-मापदंड और मापने योग्य संकेतक शामिल हैं, जो डिजिटल भुगतान के विस्तार और गुणवत्ता को मापते हैं।
यूपीआई की निर्णायक भूमिका
देश में डिजिटल भुगतान के विस्तार में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने निर्णायक भूमिका निभाई है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने यूपीआई को लेनदेन की मात्रा के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी खुदरा त्वरित भुगतान प्रणाली के रूप में मान्यता दी है। यह उल्लेख जून 2025 में जारी आईएमएफ की रिपोर्ट “ग्रोइंग रिटेल डिजिटल पेमेंट्स: द वैल्यू ऑफ इंटरऑपरेबिलिटी” में किया गया है।

प्राइम टाइम फॉर रियल-टाइम 2024 की रिपोर्ट
इसके अतिरिक्त, ACI Worldwide की ‘प्राइम टाइम फॉर रियल-टाइम 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई वैश्विक रियल-टाइम भुगतान बाजार में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी और 129.3 बिलियन लेनदेन के साथ शीर्ष स्थान पर है। वैश्विक तुलना में ब्राजील 14 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी और 37.4 बिलियन लेनदेन के साथ दूसरे स्थान पर है। थाईलैंड 8 प्रतिशत हिस्सेदारी और 20.4 बिलियन लेनदेन के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि चीन 6 प्रतिशत हिस्सेदारी और 17.2 बिलियन लेनदेन के साथ चौथे स्थान पर है।
वैश्विक स्तर पर भी डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अग्रणी
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत न केवल घरेलू स्तर पर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अग्रणी बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की डिजिटल इंडिया पहल, बढ़ती स्मार्टफोन पहुंच, सस्ती इंटरनेट सेवाएं और फिनटेक नवाचारों ने डिजिटल भुगतान को आमजन की दिनचर्या का हिस्सा बना दिया है। छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े कॉरपोरेट तक, सभी वर्ग तेजी से डिजिटल माध्यम अपना रहे हैं।
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