सरकार द्वारा 10% छूट पर हिस्सेदारी बिक्री के बाद एलआईसी का शेयर 8% टूटा, 391 रुपये पर बंद

खबर सार :-

एलआईसी के शेयर बीएसई पर लगभग 8% गिरकर दो महीने के निचले स्तर ₹391 पर बंद हुए। सरकार ने ओएफएस के जरिए 10% छूट पर 6.5% हिस्सेदारी बेची है। जानिए पूरे आंकड़े।
LIC OFS: सरकार ने 10% डिस्काउंट पर बेची हिस्सेदारी, शेयर 8% गिरा

खबर विस्तार : -

मुंबई:भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। केंद्र सरकार द्वारा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी कम कीमत पर बेचे जाने की घोषणा के बाद निवेशकों ने तेजी से अपने शेयर बेचे। इसके परिणामस्वरूप बीएसई पर कारोबार के दौरान एलआईसी का शेयर मूल्य करीब 8 प्रतिशत तक गिर गया और यह दो महीने से अधिक समय के अपने निचले स्तर 391 रुपये प्रति शेयर पर आकर बंद हुआ। कारोबार की शुरुआत में निवेशकों के बीच सकारात्मक रुझान देखा गया था, जिसकी बदौलत शेयर 400 रुपये प्रति इकाई के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, बाजार में आगे के सत्र के दौरान बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ता गया और शेयर की कीमत धीरे-धीरे नीचे फिसलती चली गई। अंततः कारोबारी सत्र की समाप्ति पर यह दिन के निचले दायरे के पास ही टिका रहा, जिससे शेयरधारकों को एक ही सत्र में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।

ओएफएस का ढांचा और डिस्काउंट दर

सरकार ने इस ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) प्रक्रिया के माध्यम से एलआईसी में अपनी कुल 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इस बिक्री के लिए floor price (न्यूनतम मूल्य) पर 10 प्रतिशत का डिस्काउंट दिया गया है। जारी की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस ओएफएस में 2 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी का बेस ऑफर शामिल था, जबकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त 4.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का विकल्प (ग्रीन शू ऑप्शन) भी रखा गया था, जिसका उपयोग सरकार ने किया।

फ्लोर प्राइस और पिछले बंद भाव में अंतर

ओएफएस के लिए फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था, जो कि इसके पिछले कारोबारी दिन के बंद भाव 428.5 रुपये प्रति शेयर की तुलना में काफी कम था। डिस्काउंटेड फ्लोर प्राइस तय होने के कारण ही शेयर बाजार में मौजूदा शेयर मूल्य पर तत्काल प्रभाव पड़ा और बीएसई में यह गिरावट दर्ज की गई।

गैर-खुदरा निवेशकों से जुटाए 28,000 करोड़ रुपये

संस्थागत और गैर-खुदरा (Non-Retail) निवेशकों के लिए यह हिस्सेदारी बिक्री 4 अगस्त 2026 को खोली गई थी। इस चरण के दौरान निर्धारित फ्लोर प्राइस पर 74 करोड़ से अधिक शेयरों की सफलतापूर्वक बिक्री की गई। गैर-खुदरा हिस्से के माध्यम से सरकार लगभग 28,000 करोड़ रुपये की राशि जुटाने में सफल रही, जो इस सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के लिए एक बड़ा पूंजीगत लेनदेन माना जा रहा है।

खुदरा निवेशकों के लिए अवसर

एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, खुदरा निवेशकों (Retail Investors) के लिए यह इश्यू 5 अगस्त 2026 को सब्सक्रिप्शन हेतु खोला जा रहा है। कुल हिस्सेदारी बिक्री का 10 प्रतिशत हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित रखा गया है। खुदरा निवेशकों को भी फ्लोर प्राइस पर उपलब्ध छूट का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा, जिससे वे इस ओएफएस में भाग ले सकेंगे। यह ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) एलआईसी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के चार साल बाद लाया गया है। उल्लेखनीय है कि चार साल पहले जब सरकार एलआईसी का आईपीओ लेकर आई थी, तब 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 21,000 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। उस समय आईपीओ को बाजार से व्यापक प्रतिक्रिया मिली थी, और अब चार साल बाद सरकार ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को और कम करने के उद्देश्य से 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए यह ओएफएस पेश किया है।

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