सपाट शुरुआत के बीच डिफेंस शेयरों ने संभाला बाजार, Midcap-Smallcap में दिखी मजबूत खरीदारी
खबर सार :-
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भले ही सपाट रही, लेकिन डिफेंस, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूत खरीदारी ने निवेशकों को सकारात्मक संकेत दिए हैं। हालांकि बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार के लिए चिंता का विषय है, लेकिन घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी फिलहाल बाजार को संतुलन प्रदान कर रही है।
खबर विस्तार : -
Indian stock market news: भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को कारोबार की शुरुआत लगभग सपाट रुख के साथ की। शुरुआती सत्र में निवेशकों की सतर्कता साफ दिखाई दी, हालांकि डिफेंस सेक्टर के शेयरों में खरीदारी ने बाजार को सहारा देने का काम किया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 33 अंक यानी 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 78,238 पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 30 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,231 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत करता नजर आया। बाजार में शुरुआती उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की नजर खास तौर पर सेक्टोरल प्रदर्शन और वैश्विक संकेतों पर बनी हुई है।
डिफेंस सेक्टर बना शुरुआती कारोबार का स्टार
बाजार की शुरुआत में डिफेंस सेक्टर ने मजबूती दिखाई। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ दिन का टॉप गेनर बनकर उभरा। इस सेक्टर में मजबूत ऑर्डर बुक और सरकारी निवेश की उम्मीदों के चलते निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। डिफेंस के अलावा मीडिया, मेटल, फार्मा, पीएसई, एनर्जी, ऑयल एंड गैस, कमोडिटीज और हेल्थकेयर सेक्टर भी हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। इससे संकेत मिलता है कि बाजार के कुछ चुनिंदा सेक्टरों में निवेशक सक्रिय रूप से खरीदारी कर रहे हैं।

बैंकिंग और ऑटो शेयरों पर दबाव
इसके विपरीत, प्राइवेट बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में दबाव देखा गया। प्राइवेट बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो और सर्विसेज सेक्टर के सूचकांक शुरुआती कारोबार में लाल निशान में थे। बैंकिंग शेयरों में कमजोरी का असर व्यापक बाजार पर भी देखा गया, क्योंकि ये सूचकांक बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण बैंकिंग शेयरों में फिलहाल दबाव बना हुआ है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में उत्साह
बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 377 अंक यानी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 57,555 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 173 अंक यानी 1.05 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,647 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। यह संकेत देता है कि निवेशक मध्यम और छोटी कंपनियों में भी अवसर तलाश रहे हैं और व्यापक बाजार में सकारात्मक धारणा बनी हुई है।
सेंसेक्स के टॉप गेनर्स और लूजर्स
सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में इंडिगो, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, सन फार्मा, एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक, एशियन पेंट्स, आईटीसी, टाइटन और ट्रेंट शामिल रहे। वहीं गिरावट वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, भारती एयरटेल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फिनसर्व और एमएंडएम जैसे दिग्गज शेयर शामिल रहे।

एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत
वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक रहे। एशिया के ज्यादातर शेयर बाजारों में तेजी देखी गई। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सियोल और जकार्ता के बाजार हरे निशान में खुले, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। हालांकि अमेरिकी बाजारों का रुख मंगलवार को मिला-जुला रहा, जिसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों की शुरुआती चाल में भी देखने को मिला।
एफआईआई की बिकवाली, डीआईआई की खरीदारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बाजार में बिकवाली का सिलसिला जारी रखा। मंगलवार को एफआईआई ने 4,672.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाजार को सहारा दिया और 6,333.26 करोड़ रुपये का निवेश किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी फिलहाल भारतीय बाजार को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखी गई। खबर लिखे जाने तक डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83.22 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं ब्रेंट क्रूड 0.48 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 87.44 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम हो सकता है।
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