Indian Rupee All-time Low: रुपये की ऐतिहासिक 'महागिरावट', डॉलर के प्रहार से भारतीय मुद्रा पस्त, पहली बार 95 के पार पहुँचा भाव; आपकी जेब पर होगा सीधा असर
खबर सार :-
Indian Rupee All-time Low: भारतीय रुपया रिकॉर्ड गिरावट के साथ 95.23 के स्तर पर पहुंचा। डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा खेल। जानें आपकी जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या होगा असर।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय मुद्रा 'रुपये' ने सोमवार को घुटने टेक दिए। डॉलर की बेतहाशा मजबूती और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के चलते रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर जा गिरा है। सोमवार को कारोबारी सत्र के अंत में रुपया 39 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 95.23 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। यह पहली बार है जब भारतीय मुद्रा ने 95 का मनोवैज्ञानिक स्तर पार किया है, जिससे आयातकों और आम जनता की चिंताएं बढ़ गई हैं।
Indian Rupee All-time Low: बाजार में क्यों मची खलबली?
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। पहला, मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ता तनाव, जिसने कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा रखी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मंडरा रहा है, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए बड़ा झटका है। दूसरा, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स का 98.26 के स्तर पर मजबूत होना और तीसरा, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकालना। अकेले पिछले गुरुवार को ही विदेशी निवेशकों ने 8,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचकर बाजार से हाथ खींच लिए।
Indian Rupee All-time Low: विशेषज्ञों की चेतावनी: अभी और बढ़ सकती है मुश्किल
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार का मानना है कि डॉलर की मांग जिस तरह बनी हुई है, उसे देखते हुए रुपया जल्द ही 95.70 के स्तर को छू सकता है। वहीं, बाजार के अन्य विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यदि स्थितियां नहीं सुधरीं, तो आने वाले हफ्तों में रुपया 96 से 97 के स्तर तक भी फिसल सकता है।
Indian Rupee All-time Low: आम आदमी पर क्या होगा असर?
रुपये के कमजोर होने का सीधा मतलब है कि अब भारत को विदेशों से सामान मंगवाने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने होंगे। इससे कच्चा तेल, खाद्य तेल, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतें बढ़ सकती हैं। कुल मिलाकर, रुपये की यह कमजोरी देश में महंगाई को नई हवा दे सकती है।
Indian Rupee All-time Low: राजकोषीय तनाव की आहट
व्यय सचिव वी. वुआलनाम ने भी इस ओर इशारा किया है कि आने वाली तिमाहियों में राजकोषीय तनाव एक बड़ी हकीकत बन सकता है। हालांकि, सरकार का जोर पूंजीगत खर्च को बनाए रखने पर है, ताकि आर्थिक विकास की गति न थमे। राजनीतिक मोर्चे पर, निवेशकों की नजरें अब आगामी चुनावों के नतीजों पर भी टिकी हैं, जो बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकते हैं।
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