Bharat-South Korea साझेदारी का नया अध्याय: 2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य पर मुहर, एआई-ऊर्जा से लेकर शिपबिल्डिंग तक सहयोग
खबर सार :-
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच यह नई आर्थिक साझेदारी एशिया में एक मजबूत और स्थिर व्यापारिक ढांचे की दिशा में बड़ा कदम है। 50 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य, तकनीकी सहयोग और शिपबिल्डिंग जैसी पहलों से दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे। यह सहयोग वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता और रणनीतिक संतुलन को मजबूत करेगा।
खबर विस्तार : -
India South Korea summit trade deal: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत और वियतनाम यात्रा एशिया की आर्थिक और रणनीतिक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। छह दिवसीय दौरे के बाद लौटते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं, विशेषकर मध्य-पूर्व तनाव और ऊर्जा संकट के बीच, एशियाई साझेदार देशों के साथ सहयोग को नई दिशा देना समय की मांग है। योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला स्थिरता और तकनीकी सहयोग को मजबूती देना था।
नई दिल्ली में भारत के साथ ऐतिहासिक समझौते
सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्युंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। बैठक में महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), वित्तीय सेवाएं और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने अपने “व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते” (CEPA) को अपग्रेड करने के लिए वार्ता तेज करने का भी निर्णय लिया। इसका लक्ष्य है कि मौजूदा 25 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक दोगुना कर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।
15 समझौता ज्ञापनों से मजबूत हुई साझेदारी
शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और दक्षिण कोरिया के बीच कुल 15 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते तकनीकी सहयोग, औद्योगिक विकास, डिजिटल नवाचार और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। विशेष रूप से जहाज निर्माण क्षेत्र में सहयोग को लेकर दोनों देशों ने बड़ा कदम उठाया है। दक्षिण कोरिया ने भारत में संयुक्त शिपयार्ड निर्माण की पहल का समर्थन किया है, जिससे भारत की समुद्री उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
ऊर्जा और आपूर्ति शृंखला पर रणनीतिक फोकस
राष्ट्रपति ली ने कहा कि मध्य-पूर्व में हाल के घटनाक्रमों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अस्थिर किया है। ऐसे में भारत और दक्षिण कोरिया जैसे साझेदार देशों के बीच ऊर्जा संसाधनों और कच्चे माल की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। दोनों देशों ने आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने और वैकल्पिक स्रोत विकसित करने पर भी सहमति जताई। यह सहयोग वैश्विक व्यापार व्यवधानों के बीच दोनों अर्थव्यवस्थाओं को अधिक लचीला बनाने में मदद करेगा।
वियतनाम में भी मजबूत हुआ आर्थिक गठजोड़
भारत के बाद राष्ट्रपति ली ने हनोई में वियतनाम के शीर्ष नेता टो लाम के साथ भी शिखर-स्तरीय वार्ता की। यहां ऊर्जा, बुनियादी ढांचा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने आपूर्ति शृंखला समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया, जिससे क्षेत्रीय उत्पादन नेटवर्क अधिक स्थिर और प्रभावी बन सके।
एशियाई साझेदारी का नया आर्थिक मॉडल
यह यात्रा संकेत देती है कि एशिया अब केवल उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता का प्रमुख आधार बन रहा है। भारत, दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे देश मिलकर तकनीक, ऊर्जा और उद्योग आधारित नई आर्थिक संरचना तैयार कर रहे हैं।
वैश्विक संदर्भ में रणनीतिक महत्व
मध्य-पूर्व संकट और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बीच यह साझेदारी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह सहयोग न केवल व्यापार बढ़ाएगा बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
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