मजबूत डॉलर का असर: सोना-चांदी में फिसलन, निवेशकों की चमक फीकी पड़ी
खबर सार :-
सोने और चांदी की कीमतों में जारी गिरावट निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत है। मजबूत डॉलर, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक मजबूती के संकेत इन धातुओं पर दबाव बनाए हुए हैं। जब तक ब्याज दरों में कटौती के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।
खबर विस्तार : -
MCX Gold Silver Prices: अंतर्राष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय बाजारों तक में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत हुई, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर होती नजर आई। मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के दबाव में दोनों कीमती धातुएं करीब आधा प्रतिशत तक फिसल गईं। घरेलू वायदा बाजार Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोने का रुख शुरुआत से ही कमजोर रहा।
एमसीएक्स पर सोने की कीमत, चांदी का भाव भी गिरा
एमसीएक्स पर सोने की कीमत पिछले सत्र के 1,51,761 रुपए के बंद स्तर के मुकाबले 1,51,167 रुपए पर खुली। सुबह 9:40 बजे तक जून 2026 कॉन्ट्रैक्ट 0.47 प्रतिशत यानी 718 रुपए की गिरावट के साथ 1,51,043 रुपए पर कारोबार करता नजर आया। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने 1,51,039 रुपए का न्यूनतम और 1,51,457 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखी गई। चांदी का मई 2026 कॉन्ट्रैक्ट पिछले बंद 2,41,513 रुपए के मुकाबले 2,39,200 रुपए पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 0.35 प्रतिशत यानी 842 रुपए गिरकर 2,40,671 रुपए पर पहुंच गया। सत्र के दौरान चांदी का न्यूनतम स्तर 2,39,200 रुपए और उच्चतम स्तर 2,41,382 रुपए रहा।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। वैश्विक कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर सोना 0.83 प्रतिशत गिरकर 4,684 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.92 प्रतिशत कमजोर होकर 74.81 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी। यह संकेत देता है कि गिरावट सिर्फ घरेलू नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर व्यापक है।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने सोने की चमक को किया फीका
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में इस गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। Motilal Oswal Financial Services के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने सोने की चमक को फीका कर दिया है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं के मुकाबले सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है। इसके अलावा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी निवेशकों को सोने से दूर कर रही है। उच्च यील्ड के कारण निवेशक सुरक्षित लेकिन कम रिटर्न वाले सोने के बजाय बेहतर रिटर्न देने वाले बॉन्ड्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह प्रवृत्ति सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बनाती है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही है। हालांकि ऐसे समय में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार मजबूत डॉलर और आर्थिक संकेतकों ने इस प्रभाव को सीमित कर दिया है। इसके साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी महंगाई की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा है। इससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाती है, जो सोने के लिए नकारात्मक संकेत है।
अमेरिका से आए बेहतर प्रारंभिक पीएमआई (Purchasing Managers' Index) डेटा ने भी सोने की कीमतों पर दबाव डाला है। मजबूत आर्थिक आंकड़े यह संकेत देते हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था स्थिर है, जिससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कम हो जाती है। यह स्थिति सोने और चांदी दोनों के लिए प्रतिकूल साबित हो रही है। कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियों में सोना और चांदी कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहे हैं, जिसमें डॉलर की मजबूती, बढ़ती यील्ड और वैश्विक आर्थिक संकेत शामिल हैं।
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