वैश्विक संकट में फिसले सोना-चांदी, Gold 1,900 तो Silver 7,800 सस्ता
खबर सार :-
वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच बीते सप्ताह सोने-चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मजबूत डॉलर, ब्याज दरों की आशंका और तेल बाजार की हलचल ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई की चिंताओं के कारण लंबी अवधि में सोना-चांदी निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बने रह सकते हैं।
खबर विस्तार : -
Gold Silver Prices: वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच बीते एक सप्ताह में कीमती धातुओं के बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। आमतौर पर जब दुनिया में संकट या युद्ध जैसी स्थितियां बनती हैं तो निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और चांदी की ओर रुख करते हैं। हालांकि इस सप्ताह वैश्विक बाजारों में बनी अस्थिरता, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को दोनों कीमती धातुओं में गिरावट दर्ज की गई।
सोने की कीमत में 1,904 रुपए की गिरावट
मुंबई सर्राफा बाजार में जारी आंकड़ों के मुताबिक इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के अनुसार शुक्रवार को 999 प्योरिटी वाला सोना 1,58,399 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को सोने की कीमत 1,60,303 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। इस तरह एक ही दिन में सोने की कीमत में 1,904 रुपए की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव के बावजूद सोने की कीमतों में यह गिरावट निवेशकों के लिए अहम संकेत मानी जा रही है।
चांदी की कीमतों में 7,813 रुपए प्रति किलो की फिसलन
चांदी की कीमतों में भी इसी तरह की गिरावट देखने को मिली। आईबीजेए के मुताबिक शुक्रवार को 999 प्योरिटी वाली चांदी का भाव 2,60,488 रुपए प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जबकि गुरुवार को इसकी कीमत 2,68,301 रुपए प्रति किलोग्राम थी। इस प्रकार एक ही कारोबारी दिन में चांदी की कीमत 7,813 रुपए प्रति किलो तक गिर गई। चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक संकेतों से भी जुड़ी मानी जा रही है।
वायदा बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतों में कमी
वायदा बाजार में भी कीमती धातुओं का रुख कमजोर ही रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर खबर लिखे जाने तक अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 269 रुपए यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर 1,60,002 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी 2,099 रुपए यानी करीब 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,65,863 रुपए प्रति किलो पर ट्रेड करती नजर आई। इससे साफ है कि निवेशक फिलहाल बाजार में सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

कीमती धातुओं में गिरावट का माहौल
सर्ऱाफा बाजार में शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत से ही दोनों धातुओं में गिरावट का माहौल देखने को मिला। सोने ने 1,60,251 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की और दिन के दौरान एक समय 1,60,673 रुपए के उच्चतम स्तर को छुआ। हालांकि बाद में बिकवाली बढ़ने से कीमतें गिरकर 1,58,764 रुपए प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गईं। इसी तरह चांदी ने 2,66,001 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार की शुरुआत की और एक समय 2,69,186 रुपए के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई। लेकिन बाद में बाजार में दबाव बढ़ने से इसकी कीमत गिरकर 2,60,752 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ी
विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल सोने के लिए 1,56,000 से 1,57,000 रुपए प्रति 10 ग्राम का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक सोना इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक मध्यम अवधि में तेजी का रुझान कायम रह सकता है। यदि सोना 1,65,000 रुपए के स्तर को मजबूती से पार करता है तो यह 1,75,000 से 1,80,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक की नई तेजी का रास्ता खोल सकता है। बीते सप्ताह की कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे कई वैश्विक कारक जिम्मेदार रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित टकराव की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।
एक्सपर्ट्स की रायः डॉलर की मजबूती का असर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। इससे पेट्रो-डॉलर प्रणाली मजबूत हो रही है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने की कीमतों पर दबाव पड़ता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय निवेशक डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। इसके अलावा अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर निवेशकों में असमंजस बना हुआ है। यदि ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं तो सोने जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश साधनों की मांग सीमित हो सकती है। हालांकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि दीर्घकालिक नजरिए से सोना और चांदी अभी भी सुरक्षित निवेश विकल्प बने हुए हैं। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, महंगाई की चिंताएं और भू-राजनीतिक जोखिम भविष्य में इन धातुओं की मांग को फिर से बढ़ा सकते हैं। ऐसे में निवेशक फिलहाल बाजार के संकेतों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
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