Tariff विवाद, US-Iran Tension और फेड की नीतियों के बीच Bullion Market में रिकॉर्ड तोड़ उछाल, सोना 1,60,600 रुपये और चांदी 2.60 लाख के पार
खबर सार :-
वैश्विक अस्थिरता, अमेरिकी टैरिफ विवाद और भू-राजनीतिक तनाव ने सोने-चांदी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। एमसीएक्स और कॉमेक्स दोनों पर तेजी का माहौल है, जबकि घरेलू बाजार में भी कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियां आगे की दिशा तय करेंगी। ऐसे में निवेशकों को सोच-समझकर और संतुलित रणनीति के साथ निवेश करना चाहिए।
खबर विस्तार : -
Gold Silver rate Today: वैश्विक अस्थिरता और अमेरिकी टैरिफ से जुड़े ताजा घटनाक्रमों के बीच सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में बुलियन की ओर रुख किया, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों में दाम नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए।
एमसीएक्स पर सोना रिकॉर्ड स्तर के करीब
Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर सुबह 10:30 बजे तक सोने का 2 अप्रैल 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 1.74 प्रतिशत यानी 2,724 रुपये की तेजी के साथ 1,59,504 रुपये पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सोने ने 1,60,600 रुपये का उच्चतम स्तर छू लिया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह तेजी मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की चाल पर निर्भर है।
चांदी 2.60 लाख के पार, 4.95% की छलांग
चांदी में भी जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। 5 मार्च 2026 के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 12,531 रुपये या 4.95 प्रतिशत बढ़कर 2,65,475 रुपये पहुंच गई। इंट्राडे में चांदी ने 2,68,875 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ। वायदा बाजार में 11:30 बजे तक चांदी 5.82 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,67,673 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

कॉमेक्स पर भी तेजी की लहर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी का माहौल रहा। COMEX पर सोना 1.89 प्रतिशत बढ़कर 5,176 डॉलर प्रति औंस और चांदी 5.68 प्रतिशत उछलकर 87 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक निवेशक भी सुरक्षित ठिकानों की तलाश में हैं।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर
कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह Supreme Court of the United States का हालिया फैसला माना जा रहा है। अदालत ने 6-3 के बहुमत से कहा कि राष्ट्रपति द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम, 1977 के तहत कांग्रेस की अनुमति के बिना व्यापक टैरिफ लगाना असंवैधानिक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि टैरिफ लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है। इस फैसले के बाद बाजार में अस्थिरता बढ़ी। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा सेक्शन 122 के तहत दुनिया भर से आयातित उत्पादों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा ने पहले ही व्यापारिक माहौल को अस्थिर कर दिया था।
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल पर असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है। भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया, जिसका असर निवेशकों की रणनीति पर पड़ा। अनिश्चितता के माहौल में सोना और चांदी पारंपरिक सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, इसलिए इनमें मांग बढ़ी है।
घरेलू सर्राफा बाजार का हाल
हालांकि वायदा बाजार में तेजी रही, लेकिन हाजिर बाजार में चांदी के भाव में कुछ जगहों पर मामूली गिरावट भी दर्ज की गई। देशभर के अलग-अलग सर्राफा बाजारों में चांदी 2,74,700 रुपये से लेकर 2,90,100 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच बिक रही है।
दिल्ली में चांदी 2,74,900 रुपये प्रति किलोग्राम
मुंबई, अहमदाबाद और कोलकाता में 2,74,700 रुपये
जयपुर, सूरत और पुणे में 2,75,000 रुपये
बेंगलुरु में 2,75,200 रुपये
पटना और भुवनेश्वर में 2,74,800 रुपये
हैदराबाद में 2,90,000 रुपये
चेन्नई में सर्वाधिक 2,90,100 रुपये प्रति किलोग्राम

आईबीजेए ने बढ़ाया मानक मूल्य
Indian Bullion Jewellers Association (आईबीजेए) ने .999 शुद्धता वाली चांदी का मानक मूल्य 2,50,314 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया है, जो पिछले कारोबारी दिन की तुलना में 2.26 प्रतिशत अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि दीर्घकालिक रुझान अभी भी मजबूती की ओर है।
फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत नॉन-फार्म पेरोल डेटा और स्थिर आर्थिक वृद्धि के कारण Federal Reserve द्वारा ब्याज दरों में तत्काल कटौती की संभावना कम हो गई है। इससे डॉलर मजबूत हुआ है, जिसके कारण कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। अब निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक के मिनट्स पर है। ब्याज दरों को लेकर दिए जाने वाले संकेत तय करेंगे कि सोना और चांदी की कीमतें आगे किस दिशा में जाएंगी।
एक्सपर्ट्स की सलाह
मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बुलियन बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रहकर चरणबद्ध निवेश रणनीति अपनानी चाहिए। छोटे समय के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण रखना बेहतर हो सकता है।
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