फेड की सख्ती और पश्चिम एशिया तनाव का डबल झटका, सोना-चांदी 1% से ज्यादा लुढ़के; निवेशकों की बढ़ी चिंता
खबर सार :-
फिलहाल सोना और चांदी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, मजबूत डॉलर और फेडरल रिजर्व की संभावित सख्त नीति के दबाव में हैं। निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और कच्चे तेल की चाल सबसे महत्वपूर्ण संकेतक होंगे। इन कारकों के आधार पर ही कीमती धातुओं की अगली दिशा तय होने की संभावना है।
खबर विस्तार : -
FED Policy impact: घरेलू और वैश्विक बाजारों में सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को सोने-चांदी की कीमतों में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति को लेकर बनी आशंकाओं ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुख जारी रहता है तो सोना अक्टूबर 2008 के बाद अपनी सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज कर सकता है।
वायदा बाजारः MCX पर बिकवाली का दबाव
घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली का माहौल देखने को मिला। अगस्त डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव 1,42,402 रुपये प्रति 10 ग्राम से 1,516 रुपये यानी करीब एक प्रतिशत टूटकर 1,40,886 रुपये पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें और कमजोरी आई तथा यह 1.37 प्रतिशत यानी 1,952 रुपये गिरकर 1,40,450 रुपये के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में निचले स्तरों से खरीदारी आने पर इसमें हल्की रिकवरी देखी गई और खबर लिखे जाने तक इसमें मामूली बढ़त दर्ज की गई। चांदी की कीमतों में भी इसी तरह का दबाव देखने को मिला। सितंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद भाव 2,22,634 रुपये प्रति किलोग्राम से 2,387 रुपये यानी लगभग एक प्रतिशत गिरकर 2,20,247 रुपये पर खुली। शुरुआती कारोबार में यही इसका दिन का न्यूनतम स्तर रहा। बाद में इसमें भी हल्की रिकवरी आई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में कमजोरी का रुख बना रहा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की चमक फीकी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं की चमक फीकी पड़ती दिखाई दी। स्पॉट गोल्ड करीब 1.5 प्रतिशत टूटकर 3,956.92 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। जून महीने में अब तक सोने की कीमतों में लगभग 12.7 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है और यह लगातार चौथे महीने कमजोरी की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह स्पॉट सिल्वर करीब दो प्रतिशत गिरकर 57.13 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। प्लेटिनम में 1.1 प्रतिशत और पैलेडियम में 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ये दोनों धातुएं भी मासिक और तिमाही आधार पर कमजोर प्रदर्शन की ओर बढ़ रही हैं।
एक्सपर्ट्स की रायः वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका
विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना है, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है। इसी कारण बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आगे भी ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या उनमें बढ़ोतरी कर सकता है। ऊंची ब्याज दरें डॉलर को मजबूती देती हैं, जबकि सोने जैसी बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों की मांग पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता पर बनी हुई है, हालांकि हालिया मिसाइल हमलों के बाद संघर्ष विराम की उम्मीदों को झटका लगा है। अगस्त डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड वायदा 1.03 प्रतिशत गिरकर 72.40 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि सितंबर अनुबंध 73.51 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
सोने-चांदी की कीमतः वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर
बाजार जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने-चांदी की दिशा कई अहम वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी। विशेष रूप से अमेरिका के गैर-कृषि रोजगार के आंकड़े, बेरोजगारी दर, विनिर्माण और सेवा पीएमआई तथा यूरोजोन की मुद्रास्फीति से जुड़े आंकड़े निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपेक्षा से मजबूत रहती है और फेड का रुख सख्त बना रहता है तो कीमती धातुओं पर दबाव कुछ समय और जारी रह सकता है।
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