साइबर फ्रॉड पर मोदी सरकार का डिजिटल प्रहार: 39.43 लाख मोबाइल कनेक्शन बंद, 2.27 लाख हैंडसेट ब्लैकलिस्ट
खबर सार :-
साइबर फ्रॉड के खिलाफ सरकार की यह कार्रवाई डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म, संचार साथी और चक्षु जैसी पहलें आम नागरिकों को सशक्त बना रही हैं। तकनीक और जनभागीदारी के मेल से न केवल अपराध पर अंकुश लगा है, बल्कि हजारों करोड़ रुपये की संभावित धोखाधड़ी भी रोकी जा सकी है।
खबर विस्तार : -
Cyber Fraud: देश में बढ़ते साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। दूरसंचार विभाग ने अब तक 39.43 लाख मोबाइल कनेक्शन डिस्कनेक्ट कर दिए हैं। इसके साथ ही 2.27 लाख मोबाइल हैंडसेट और 1.31 लाख एसएमएस टेम्पलेट्स को भी ब्लैकलिस्ट किया गया है। यह कदम साइबर ठगों द्वारा दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
राज्यसभा में सरकार ने दिए कार्रवाई के आंकड़े
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दूरसंचार विभाग ने साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) की स्थापना की है। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न एजेंसियों और स्टेकहोल्डर्स के बीच सूचना साझा कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करता है।

‘संचार साथी’ से आम नागरिकों को मिली ताकत
मंत्री ने बताया कि सरकार की ‘संचार साथी’ पहल आम नागरिकों के लिए वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप के रूप में उपलब्ध है। इसके अंतर्गत ‘चक्षु’ सुविधा शुरू की गई है, जिसके जरिए नागरिक संदिग्ध कॉल, मैसेज, फर्जी लिंक या अन्य धोखाधड़ी से जुड़े संचार की रिपोर्ट कर सकते हैं। यह प्लेटफॉर्म उन मामलों की पहचान में मदद करता है, जहां धोखाधड़ी की कोशिश की गई हो, भले ही वास्तविक नुकसान न हुआ हो।
वास्तविक नुकसान वाले मामलों पर I4C की नजर
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में नागरिकों को वास्तविक वित्तीय नुकसान होता है, उनकी निगरानी भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा की जाती है। यह केंद्र गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और देशभर में साइबर अपराध से जुड़े मामलों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कार्रवाई से पहले उपभोक्ताओं को मौका
सरकार ने यह भी बताया कि किसी मोबाइल कनेक्शन को डिस्कनेक्ट करने से पहले संबंधित उपभोक्ता को पुनः सत्यापन का अवसर दिया जाता है। संचार साथी पोर्टल के डैशबोर्ड पर की गई सभी कार्रवाइयों का विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। नागरिकों से प्राप्त 7.7 लाख इनपुट्स के आधार पर यह व्यापक कार्रवाई संभव हो सकी।
1,000 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी रोकी गई
मंत्री के अनुसार, फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) के माध्यम से समय पर अलर्ट जारी कर और संदिग्ध लेनदेन रोककर अब तक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी को रोका गया है। इसके अतिरिक्त, व्हाट्सऐप ने भी साझा की गई जानकारी के आधार पर 28 लाख मोबाइल नंबरों से जुड़े प्रोफाइल और अकाउंट्स को निष्क्रिय किया है।
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