वैश्विक संकटों के दौर में BRICS से बढ़ीं उम्मीदें, जयशंकर बोले- ‘दुनिया को चाहिए स्थिर और रचनात्मक नेतृत्व’
खबर सार :-
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने वैश्विक स्थिरता, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी सहयोग और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति की जरूरत पर जोर दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि बदलते वैश्विक हालात में ब्रिक्स से विकासशील देशों की उम्मीदें बढ़ी हैं। भारत ने अध्यक्ष देश के रूप में रचनात्मक संवाद और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने का भरोसा दिया।
खबर विस्तार : -
BRICS 2026 Meeting: नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने वैश्विक अस्थिरता, आर्थिक चुनौतियों और संघर्षों के बीच ब्रिक्स की भूमिका को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को अब ब्रिक्स से यह उम्मीद है कि वह दुनिया में “रचनात्मक और स्थिर करने वाली ताकत” के रूप में सामने आएगा। भारत मंडपम में आयोजित इस बैठक में विदेश मंत्री ने भारत की ओर से सभी सदस्य देशों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की अध्यक्षता को सभी देशों का मजबूत सहयोग मिला है, जिससे संगठन के कामकाज को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।
“दुनिया बदलाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही”
अपने उद्घाटन भाषण में जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक हालात को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय संघर्षों, आर्थिक अनिश्चितताओं और व्यापार, तकनीक तथा जलवायु से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा, “हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब वैश्विक व्यवस्था कई उतार-चढ़ाव से गुजर रही है। विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्ष और आर्थिक दबावों ने दुनिया के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।” विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे माहौल में ब्रिक्स जैसे मंच की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है, क्योंकि यह विकासशील देशों की आवाज को मजबूती देता है।
उभरती अर्थव्यवस्थाओं की उम्मीदों का केंद्र बना ब्रिक्स
जयशंकर ने कहा कि उभरते बाजारों और विकासशील देशों के बीच यह भरोसा बढ़ रहा है कि ब्रिक्स वैश्विक संतुलन कायम रखने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि संगठन को केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक स्थिरता और समावेशी विकास को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच जारी चर्चाएं केवल राजनीतिक संवाद नहीं हैं, बल्कि यह व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने का भी अवसर हैं। इससे वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों का साझा समाधान निकालने में मदद मिलेगी।
जलवायु परिवर्तन पर साझा जिम्मेदारी की अपील
विदेश मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। जयशंकर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर “समानता और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों” के सिद्धांत को आगे बढ़ाना जरूरी है। उनका संकेत इस ओर था कि विकसित और विकासशील देशों की जिम्मेदारियां अलग-अलग स्तर की होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
तकनीक और सुशासन पर भी दिया जोर
विदेश मंत्री ने तकनीकी प्रगति के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि नई तकनीकों का इस्तेमाल अच्छे शासन और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकी व्यवस्थाएं वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि तकनीक का उपयोग मानव कल्याण और सामाजिक विकास के लिए हो।
शांति, सुरक्षा और आतंकवाद पर सख्त संदेश
जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में शांति और सुरक्षा के मुद्दे आज भी सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों का जिक्र करते हुए संवाद और कूटनीति को सबसे प्रभावी रास्ता बताया। उन्होंने कहा, “हाल के संघर्ष यह दिखाते हैं कि बातचीत और कूटनीति का महत्व पहले से ज्यादा बढ़ गया है।” इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी अपील की। विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की चुनौती है और इससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
भारत ने रचनात्मक संवाद का दिया भरोसा
ब्रिक्स के अध्यक्ष देश के तौर पर भारत ने सभी सदस्य देशों को खुलकर अपने विचार रखने के लिए प्रोत्साहित किया। जयशंकर ने कहा कि भारत इस मंच पर खुली, रचनात्मक और सकारात्मक चर्चा को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि सभी देशों के सुझाव और विचार संगठन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि यह बैठक वैश्विक सहयोग को नई मजबूती देगी।
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