नई समुद्री रणनीति की शुरुआतः भारत-रूस समुद्री साझेदारी से खुलेगा वैश्विक व्यापार का नया द्वार
खबर सार :-
भारत-रूस समुद्री सहयोग केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का संकेत है। नए व्यापार मार्ग, उन्नत जहाज निर्माण और बेहतर लॉजिस्टिक्स से भारत की वैश्विक समुद्री भूमिका मजबूत होगी। यह सहयोग रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देकर दोनों देशों के साझा समुद्री भविष्य को आकार देगा।
खबर विस्तार : -
India-Russia Trade: भारत और रूस के बीच हालिया समुद्री सहयोग समझौते दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती देने के साथ-साथ वैश्विक व्यापार मानचित्र पर भारत की स्थिति को और सशक्त बनाएंगे। मैरीटाइम फेयरट्रेड की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यह साझेदारी जहाज निर्माण, आर्कटिक-क्षम समुद्री गतिविधियों और वैकल्पिक व्यापार मार्गों के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।
लॉजिस्टिक्स और व्यापार को मिलेगी रफ्तार
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-रूस समुद्री सहयोग से लॉजिस्टिक्स संचालन अधिक सुगम होगा, जिससे वस्तुओं की आवाजाही तेज और किफायती बनेगी। इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच व्यापार प्रवाह बढ़ेगा और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। खासतौर पर ऊर्जा, कच्चे माल और औद्योगिक उत्पादों के परिवहन में सुधार की उम्मीद जताई गई है।
नए व्यापार मार्गों का विकास
इस साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य हिंद महासागर और रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र के बीच नए समुद्री व्यापार मार्ग विकसित करना है। चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) जैसे प्रोजेक्ट्स से भारत को यूरोप और यूरेशिया तक तेज़ पहुंच मिलेगी, जिससे पारंपरिक मार्गों पर निर्भरता कम होगी।
जहाज निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
भारत की बढ़ती जहाज निर्माण क्षमताओं को रूस के तकनीकी अनुभव और संसाधनों से जोड़ने की योजना है। इससे न केवल “मेक इन इंडिया” पहल को बल मिलेगा, बल्कि घरेलू शिपयार्ड्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने का अवसर भी मिलेगा। आर्कटिक-क्षम जहाजों के निर्माण से भारत को उभरते ध्रुवीय व्यापार मार्गों में भी हिस्सेदारी मिलेगी।
उच्च-स्तरीय वार्ताओं का महत्व
भारत और रूस के बीच नवंबर 2025 के अंत में नई दिल्ली में हुई उच्च-स्तरीय अंतर-एजेंसी बैठकों में जहाज निर्माण, व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर गहन चर्चा हुई। इन बैठकों का नेतृत्व केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और रूसी समुद्री बोर्ड के अध्यक्ष निकोलाई पेत्रुशेव ने किया।
2030 तक व्यापार लक्ष्य
रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल को दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक के दौरान भी समर्थन मिला। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया, जिसमें शिपिंग और लॉजिस्टिक्स को प्रमुख क्षेत्र माना गया।
अन्य प्रमुख खबरें
-
चीनी स्टॉक लिमिट आधी, जमाखोरी पर सरकार का बड़ा शिकंजा
2026-09-01
-
सीमा शुल्क-बैंकिंग सुधारों से ‘विकसित भारत’ की रफ्तार होगी तेज
2026-09-01
-
ITR Filing 2026-27: 7.8 करोड़ रिटर्न दाखिल, टैक्सपेयर्स ने बनाया नया रिकॉर्ड
2026-09-01
-
भारतीय अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 7.8% GDP ग्रोथ
2026-09-01
-
शेयर बाजार सपाट, सेंसेक्स 76,900 के करीब; ग्लोबल दबाव हाव
2026-09-01
-
अर्थव्यवस्था ने पकड़ी तूफानी रफ्तार! पहली तिमाही में 7.8% GDP ग्रोथ
2026-08-31
-
सोना-चांदी में आएगी जोरदार तेजी! Gold $5,600, Silver $120 तक
2026-08-31
-
Zomato का बड़ा एक्शन, एनालॉग डेयरी वाली डिशेज पर लगी रोक
2026-08-31
-
भारत कनेक्ट पर फॉरेक्स का धमाल, 4 महीने में ₹11 करोड़ का कारोबार
2026-08-31
-
HDFC Bank CEO रेस में कैजाद भरूचा सबसे आगे, संभालेंगे कमान?
2026-08-31
-
ग्लोबल टेंशन में बाजार की सांसें थमीं, लाल निशान में सेंसेक्स-निफ्टी
2026-08-31
-
CNG फिर हुई महंगी, नई कीमतें आज से लागू
2026-08-29
-
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 729.33 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड पर
2026-08-28
-
Stock Market: शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट
2026-08-27
-
सरकार ने साफ की स्थिति, प्याज की उपलब्धता पर दी जानकारी
2026-08-27