Indian Economy को राहतः मार्च में निर्यात 6.3% बढ़ा, आयात में गिरावट से संतुलन हुआ बेहतर, व्यापार घाटा घटकर 20.67 अरब डॉलर
खबर सार :-
मार्च के आंकड़े भारत की आर्थिक मजबूती की ओर इशारा करते हैं, जहां निर्यात में वृद्धि और आयात में कमी ने व्यापार घाटे को घटाया है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था का सुचारू रहना सरकार की रणनीतिक क्षमता को दर्शाता है। आने वाले समय में स्थिर नीतियां और वैश्विक सहयोग भारत की आर्थिक प्रगति को और गति दे सकते हैं।
खबर विस्तार : -
India Trade deficit March 2026: वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मार्च महीने में देश का व्यापारिक निर्यात 6.3 प्रतिशत बढ़कर 38.92 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि व्यापार घाटा घटकर 20.67 अरब डॉलर रह गया। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़े इस सकारात्मक बदलाव की पुष्टि करते हैं। फरवरी में निर्यात का आंकड़ा 36.61 अरब डॉलर था, जिसके मुकाबले मार्च में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है और कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं।
भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर से अधिक
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 825.26 अरब डॉलर के मुकाबले 4.22 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। यह संकेत देता है कि भारत वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति को धीरे-धीरे मजबूत कर रहा है। दूसरी ओर, मार्च में आयात में भी गिरावट दर्ज की गई है। आयात 5.98 प्रतिशत घटकर 59.9 अरब डॉलर रह गया, जिससे व्यापार घाटा कम करने में मदद मिली। आयात में कमी का एक प्रमुख कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रही हैं, जिसने कंपनियों को रणनीति बदलने पर मजबूर किया। सूत्रों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के चलते भारतीय तेल कंपनियों ने बड़े पैमाने पर आयात करने के बजाय अपने रणनीतिक भंडार का उपयोग करना बेहतर समझा। इससे न केवल आयात बिल में कमी आई बल्कि घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा मिला।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से दुनिया भर में चिंता बढ़ी
हालांकि, यह आर्थिक सुधार ऐसे समय में देखने को मिला है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर खतरा पैदा कर दिया है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत मार्ग है, उसके बंद होने से दुनिया भर में चिंता बढ़ी है। इस संकट का असर भारत पर भी पड़ सकता था, लेकिन स्थिति को संभालने के लिए रणनीतिक कदम उठाए गए। ईरान द्वारा कुछ भारतीय एलपीजी जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने से देश में गैस आपूर्ति बाधित नहीं हुई। हाल ही में भारतीय ध्वज वाला एलपीजी पोत ‘जग विक्रम’ करीब 20,400 मीट्रिक टन गैस लेकर सुरक्षित रूप से कांडला बंदरगाह पहुंचा। इस जहाज में 24 नाविक सवार थे और इसका सुरक्षित आगमन देश के लिए बड़ी राहत साबित हुआ। इसके अलावा, ‘ग्रीन आशा’ नामक एक अन्य भारतीय पोत भी 15,400 टन एलपीजी लेकर नवी मुंबई स्थित जेएनपीए बंदरगाह पर पहुंचा। यह घटनाएं दर्शाती हैं कि भारत ने संकट के समय में भी अपनी आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में सफलता हासिल की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात में यह वृद्धि जारी रहती है और आयात पर नियंत्रण बना रहता है, तो आने वाले महीनों में भारत का व्यापार संतुलन और बेहतर हो सकता है। साथ ही, ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदम भी लंबे समय में लाभदायक साबित होंगे।
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