मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर मुहर: भारत-ईयू एफटीए से बदलेगा वैश्विक व्यापार का संतुलन
खबर सार :-
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता केवल आर्थिक करार नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार है। इससे व्यापार, निवेश, तकनीक और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के जरिए भारत वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति और सशक्त करेगा, जबकि यूरोप को एशिया में भरोसेमंद साझेदार मिलेगा।
खबर विस्तार : -
EU-India Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ता पूरी कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार देते हुए कहा कि यह समझौता दो अरब लोगों के लिए एक विशाल फ्री ट्रेड ज़ोन की नींव रखेगा। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक समझौता नहीं बल्कि भारत-यूरोप साझेदारी के नए युग की शुरुआत है।
सोशल मीडिया से कूटनीतिक संदेश
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने लिखा कि यूरोप और भारत आज इतिहास बना रहे हैं। वहीं यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने महात्मा गांधी के विचारों को याद करते हुए शांति, न्याय और सहयोग पर ज़ोर दिया। इन बयानों ने इस समझौते को केवल आर्थिक नहीं बल्कि नैतिक और रणनीतिक साझेदारी के रूप में भी प्रस्तुत किया।
शिखर सम्मेलन में होगी औपचारिक घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को नई दिल्ली में 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। इस अवसर पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा की मौजूदगी में एफटीए की औपचारिक घोषणा की जाएगी। यह समझौता वर्षों से चली आ रही वार्ताओं का परिणाम है, जिसे दोनों पक्षों के लिए संतुलित और भविष्य-उन्मुख माना जा रहा है।
वाणिज्य मंत्रालय का भरोसा
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पुष्टि की कि एफटीए वार्ताएं पूरी हो चुकी हैं। उनके अनुसार, यह समझौता भारत-ईयू आर्थिक एकीकरण को मजबूत करेगा और व्यापार व निवेश प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि लाएगा। इससे भारत को उन्नत तकनीक, निवेश और नए बाज़ारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपीय कंपनियों को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में अवसर मिलेंगे।

कानूनी प्रक्रिया और लागू होने की समयसीमा
अधिकारियों के मुताबिक, समझौते की कानूनी जांच यानी ‘लीगल स्क्रबिंग’ के बाद लगभग छह महीनों में हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके अगले वर्ष से लागू होने की उम्मीद है। इस दौरान व्यापार, सुरक्षा व रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और लोगों के बीच संपर्क जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जाएगा।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव
एफटीए का सबसे बड़ा असर भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में दिख सकता है। यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए भारतीय बाजार खोलते हुए आयात शुल्क में बड़ी कटौती की तैयारी है। मौजूदा 110 प्रतिशत टैरिफ़ घटकर लगभग 40 प्रतिशत हो सकता है। इससे वोक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियों की कारें भारतीय ग्राहकों के लिए अधिक किफायती बनेंगी। फिलहाल भारत के 44 लाख यूनिट वार्षिक कार बाज़ार में यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत है, जिसमें तेज़ बढ़ोतरी की उम्मीद है।
भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर
यह समझौता भारत के वस्त्र, आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों के लिए यूरोपीय बाज़ार में नए द्वार खोलेगा। साथ ही, अमेरिकी ऊंचे टैरिफ़ के असर को संतुलित करने में भी यह एफटीए भारत के लिए एक रणनीतिक विकल्प साबित हो सकता है।
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