बांग्लादेश: बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 2024 के छात्र आंदोलन में मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी पाया और उन्हें मौत की सजा सुनाई। इस निर्णय के बाद शेख हसीना का नाम उन नेताओं की सूची में शामिल हो गया है जिन्हें मौत की सजा दी जा चुकी है। शेख हसीना पर आरोप था कि उन्होंने छात्र आंदोलन पर कार्रवाई का आदेश दिया था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। आइए जानते हैं कि शेख हसीना से पहले किन प्रमुख नेताओं को फांसी की सजा दी गई।
1. सद्दाम हुसैन (इराक)

इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का नाम इस सूची में सबसे पहले आता है। 2006 में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध, राजनीतिक दमन और नरसंहार के आरोपों में मौत की सजा दी गई थी। सद्दाम के शासनकाल में शिया समुदाय और कुर्दों पर बड़े पैमाने पर अत्याचार किए गए थे। अमेरिकी हमले के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उनकी फांसी दी गई। यह सजा दुनिया की सबसे चर्चित फांसीयों में से एक रही। 30 दिसंबर 2006 को उन्हें फाँसी दे दी गई थी।
2. जुल्फिकार अली भुट्टो (पाकिस्तान)

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को 4 अप्रैल 1979 को रावलपिंडी में फांसी दी गई थी। उन्हें हत्या की साजिश में शामिल होने का दोषी ठहराया गया था। उनके समर्थकों का कहना था कि यह फैसला एक राजनीतिक बदले की कार्रवाई थी, क्योंकि भुट्टो को निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिला। इस फैसले को व्यापक रूप से विवादास्पद और गलत माना जाता है।
3. निकोलाए चाउशेस्कु (रोमानिया)

रोमानिया के तानाशाह निकोलाए चाउशेस्कु का नाम भी इस सूची में शामिल है। उन्होंने 25 साल तक रोमानिया पर तानाशाही की। 1989 में देशभर में फैले विद्रोह के बाद चाउशेस्कु को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ जनसंहार, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे। उन्हें और उनकी पत्नी को सैन्य अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया और तत्काल बाद में फायरिंग स्क्वाड से मौत की सजा दी गई। इस घटना को यूरोप में तानाशाही के अंत के रूप में देखा गया। निकोलाए चाउशेस्कु को उनकी पत्नी एलेना चाउशेस्कु के साथ 25 दिसंबर 1989 को फांसी दी गई थी।
4. मतिउर रहमान निजामी (बांग्लादेश)

बांग्लादेश के कट्टरपंथी नेता मतिउर रहमान निजामी को 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी ठहराया गया। बांग्लादेश की विशेष अदालत ने उन्हें नरसंहार, हत्या और यातना के आरोपों में मौत की सजा सुनाई। निजामी जमात-ए-इस्लामी पार्टी के प्रमुख थे और उनकी फांसी बांग्लादेश में विवादों का कारण बनी। 11 मई 2016 को, निज़ामी को ढाका सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई
यह लिस्ट बताती है कि शेख हसीना का मामला अकेला नहीं है। दुनिया भर में विभिन्न नेताओं को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए फांसी की सजा दी जा चुकी है, जिनके फैसले राजनीतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहे हैं।
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