Dipu Chandra Murder: कनाडा की कंज़र्वेटिव पार्टी के सांसद शुभ मजूमदार ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मैमनसिंह ज़िले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या का ज़िक्र करते हुए उन्होंने इसे दक्षिण एशिया में कट्टरपंथ और नफरत की जड़ों के और गहरे होने का संकेत बताया।
सांसद शुभ मजूमदार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि बांग्लादेश में एक और काला अध्याय सामने आया है, जो पीढ़ियों से चले आ रहे दर्द और असुरक्षा को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि कथित ईशनिंदा के आरोप में एक युवा हिंदू फैक्ट्री कर्मचारी की भीड़ द्वारा हत्या यह दिखाती है कि कट्टरपंथी ताकतें अब भी बेलगाम हैं।
मजूमदार ने कहा कि मैमनसिंह की यह घटना उन्हें पांच दशक पहले हुए दमन और अराजकता की याद दिलाती है। उनका मानना है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यक—हिंदू, ईसाई, बौद्ध और अन्य—आज भी लक्षित हिंसा का सामना कर रहे हैं, जो अतीत के नरसंहारों की भयावह याद दिलाती है।
कनाडाई सांसद ने अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुई राजनीतिक उथल-पुथल के बाद सामने आई हजारों घटनाओं का हवाला दिया। इन रिपोर्टों में घरों, दुकानों, मंदिरों और पूजा स्थलों पर हमले, हत्याएं, अपहरण, यौन हिंसा और जबरन विस्थापन जैसी घटनाओं का ज़िक्र किया गया है।
मजूमदार ने कहा कि भले ही मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कुछ घटनाओं की निंदा की हो और गिरफ्तारियों की घोषणा की हो, लेकिन जुल्म का पैटर्न लगातार जारी है। उनके अनुसार स्थायी और मजबूत सरकार के अभाव में कट्टरपंथी तत्वों का हौसला बढ़ रहा है।
सांसद ने मांग की कि हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों समेत सभी अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा को तुरंत रोका जाए और यूनुस सरकार से स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय के लिए आवाज उठाना जरूरी है, भले ही इससे कुछ राजनीतिक या वैचारिक समूह असहज हों।
इस घटना की निंदा करते हुए न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली की सदस्य जेनिफर राजकुमार ने भी बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के “परेशान करने वाले पैटर्न” पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दीपू चंद्र दास की हत्या इस सिलसिले का सबसे हालिया और क्रूर उदाहरण है।
जेनिफर राजकुमार ने बयान में कहा कि वह बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ चल रही हिंसा से बेहद व्यथित हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि मानवाधिकार, न्याय और धार्मिक आज़ादी के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।
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