गोरखनाथ स्वास्थ्य यात्रा: सीएम योगी ने चिकित्सकों से किया आह्वान, 'समावेशी विकास से ही सशक्त होगा राष्ट्र'

खबर सार :-
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में 'श्रीगुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य यात्रा 6.0' के दौरान कहा कि राष्ट्रभक्ति नारों से नहीं, बल्कि ईमानदारी से कर्तव्य निभाने से सिद्ध होती है। उन्होंने चिकित्सकों से सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों में जाकर सेवा करने और समाज के प्रति अपना ऋण चुकाने का आह्वान किया।

गोरखनाथ स्वास्थ्य यात्रा: सीएम योगी ने चिकित्सकों से किया आह्वान, 'समावेशी विकास से ही सशक्त होगा राष्ट्र'
खबर विस्तार : -

लखनऊ: राष्ट्रभक्ति केवल जोशीले नारों या प्रतीक चिन्हों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने नागरिक कर्तव्यों के ईमानदारी पूर्वक निर्वहन का नाम है। जब एक चिकित्सक सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों के अभावग्रस्त जीवन में स्वास्थ्य की रोशनी फैलाता है, तो वह सही मायनों में राष्ट्र की सेवा कर रहा होता है। मंगलवार को राजधानी के गोमतीनगर विस्तार स्थित सीएमएस ऑडिटोरियम में आयोजित 'श्रीगुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य यात्रा 6.0' के कार्यकर्ता सम्मान समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज के बौद्धिक वर्ग, विशेषकर चिकित्सकों को सेवा का नया मंत्र दिया।

श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास और नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन (एनएमओ) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समावेशी विकास के बिना राष्ट्र की प्रगति की कल्पना बेमानी है। उन्होंने कहा कि यदि समाज का कोई भी वर्ग, जाति या क्षेत्र पीछे छूट जाता है, तो देश कभी शक्तिशाली नहीं बन सकता।

समावेशी विकास और राष्ट्रभक्ति का अंतर्संबंध 

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत-नेपाल मैत्री की जड़ों को सींचने और पिछले छह वर्षों से सुदूरवर्ती क्षेत्रों में समाज को जोड़ने का काम कर रहे संगठनों के प्रति आभार जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्वास्थ्य यात्रा केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की कठिन चारधाम यात्रा - बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ - के दौरान भी श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर एक अनुकरणीय उदाहरण पेश कर रही है। मुख्यमंत्री ने उन स्वयंसेवकों को विशेष रूप से सम्मानित किया जो दुर्गम धार्मिक यात्राओं के दौरान मानवता की सेवा में जुटे हैं।

अतीत के झरोखों से राष्ट्रवाद की व्याख्या करते हुए उन्होंने 2007-08 के उस दौर का जिक्र किया जब नेपाल खूनी संघर्ष की आग में झुलस रहा था। उन्होंने बताया कि किस तरह सीमा जागरण मंच और पाटेश्वरी देवी मंदिर के माध्यम से उन्हें थारू जनजाति के स्वाभिमान को समझने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री ने साझा किया कि माओवादियों और मधेशियों के बीच जारी संघर्ष के बावजूद, भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले थारू समाज ने खुद को महाराणा प्रताप का वंशज बताकर अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया। उन्होंने नेपाल स्थित अपने ही समुदाय से रोटी-बेटी के संबंध सिर्फ इसलिए तोड़ लिए क्योंकि वहां के लोग देशद्रोही विचारधारा का साथ दे रहे थे।

इसी स्वाभिमान को सम्मान देते हुए योगी आदित्यनाथ ने रेखांकित किया कि सरकार ने उपेक्षित वनवासी और थारू गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देकर उन्हें पक्के मकान, बिजली, सोलर पैनल और राशन कार्ड जैसी सुविधाओं से संतृप्त किया है। उन्होंने घोषणा की कि इसी क्रम में बहराइच के सुदूर भरतापुर गांव के निवासियों को भी मकान और जमीन आवंटित की जाएगी। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री द्वारा नागरिकता प्राप्त परिवारों को भी अब जमीन और आवास की सुविधा देकर मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

 'ओपीडी' की सीमाओं को तोड़ें चिकित्सक

चिकित्सा जगत का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत और मानवीय सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को अपनी ओपीडी की दीवारों से बाहर निकलना होगा। फील्ड में जाने पर ही यह समझ आता है कि बीमारी का संबंध केवल शरीर से नहीं, बल्कि वहां की भौगोलिक स्थिति (ज्योग्राफी) और जलवायु (क्लाइमेट) से भी होता है। 

उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि जो स्वास्थ्य यात्रा महज 23 हजार मरीजों से शुरू हुई थी, वह आज 2 लाख 66 हजार लोगों तक पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से अपील की कि वे महीने में कम से कम एक रविवार समाज के उन वर्गों के लिए निकालें जिन्हें मुख्यधारा की चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

सीमा सुरक्षा और सेवा का धर्म: डॉ. कृष्ण गोपाल

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने सेवा को अध्यात्म और राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए कहा कि जब समाज खुद के दुख को छोड़कर दूसरों के दुख के लिए खड़ा होता है, तभी वास्तविक जागृति आती है।

उन्होंने एनएमओ के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि कैसे दिल्ली और काशी जैसे बड़े शहरों के डॉक्टर म्यांमार, तिब्बत और बांग्लादेश की सीमाओं पर बसे दुर्गम गांवों में जाकर सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा, "पूरा देश हमारा है और सीमाओं पर डटे प्रहरियों और वहां रहने वाले नागरिकों की सेवा करना हमारा परम धर्म है।" उन्होंने दिल्ली और लखनऊ की मलिन बस्तियों में महिलाओं के बीच व्याप्त एनीमिया की समस्या पर चिंता जताई और चिकित्सकों से इन बस्तियों को गोद लेने का आह्वान किया।

समाज का ऋण चुकाने की जिम्मेदारी: सतीश महाना

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अपने संबोधन में भावुक और तार्किक पक्ष रखते हुए कहा कि सेवा भाग्य से मिलती है। उन्होंने चिकित्सकों को याद दिलाया कि उनकी पढ़ाई के दौरान जो 'शव' (Cadaver) उन्हें प्रैक्टिकल के लिए बिना किसी मूल्य के मिलता है, वह समाज का उन पर एक बड़ा ऋण है। महाना ने कहा, "शिक्षा और योग्यता समाज की देन है, इसलिए समाज को वापस करना हमारा कर्तव्य है। सरकार केवल सहयोग कर सकती है, लेकिन वास्तविक धरातलीय परिवर्तन समाज की जागरूकता से ही संभव है।"

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता, भगवान धनवंतरि, स्वामी विवेकानंद और गुरु गोरखनाथ की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी, प्रांत प्रचारक कौशल जी, राष्ट्रधर्म के निदेशक मनोज कान्त जी, वरिष्ठ प्रचारक वीरेन्द्र सिंह जी, प्रांत संघचालक सरदार स्वर्ण सिंह जी, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह, प्रो. एमएलवी भट्ट, आरएमएल के निदेशक सीएम सिंह, सीएमएस विक्रम सिंह, महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, प्रांत सम्पर्क प्रमुख गंगा सिंह, एमएलसी महेंद्र सिंह, मंत्री सतीश शर्मा, एमएलसी पवन सिंह, डॉ. प्रभात पांडेय, अवनीश अवस्थी, ओएसडी सीएम डॉ. श्रवण बघेल, विधायक ओपी श्रीवास्तव  आदि प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

श्रीगुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य यात्रा का छठा संस्करण इस बात का प्रमाण है कि संगठित प्रयास से सुदूर क्षेत्रों में भी बदलाव लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री की 'राष्ट्रभक्ति और कर्तव्य' वाली टिप्पणी उन सभी के लिए एक आईना है जो राष्ट्रवाद को केवल प्रतीकों में खोजते हैं। आने वाले समय में यह अभियान न केवल चिकित्सा सेवा बल्कि 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करेगा।

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