लखनऊ: किसी भी राज्य की प्रगति का सबसे सटीक पैमाना वहां की सड़कों की चौड़ाई नहीं, बल्कि वहां के युवाओं के हाथों में काम और चेहरे पर आत्मविश्वास होता है। उत्तर प्रदेश, जिसे कभी 'बीमारू' राज्यों की कतार में खड़ा किया जाता था, आज वही प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था का इंजन बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले 9 वर्षों का सफर केवल सत्ता के संचालन का नहीं, बल्कि व्यवस्था के आमूलचूल परिवर्तन का रहा है। 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना अब महज एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर उतरती हकीकत नजर आ रही है।
निवेश, रोजगार और आत्मनिर्भरता के त्रिकोण पर टिकी यह नई व्यवस्था उत्तर प्रदेश को भारत के 'ग्रोथ इंजन' के रूप में स्थापित कर चुकी है। सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता से लेकर एमएसएमई (MSME) सेक्टर की मजबूती और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण तक, यूपी ने एक ऐसा मॉडल पेश किया है जो आज देश के अन्य राज्यों के लिए नज़ीर बन गया है।
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में पिछला दशक नियुक्तियों के शुद्धिकरण का काल माना जा सकता है। एक समय था जब नियुक्तियां भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की भेंट चढ़ जाती थीं, लेकिन बीते 9 वर्षों में योगी सरकार ने 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान कर इस धारणा को धराशायी कर दिया है।
अकेले उत्तर प्रदेश पुलिस में 2.19 लाख से अधिक पदों पर भर्ती का संपन्न होना कानून-व्यवस्था और रोजगार दोनों मोर्चों पर बड़ी जीत है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की मंशा से करीब 1.65 लाख नियुक्तियां की गईं, जिसने प्रदेश की बुनियादी शिक्षा की रीढ़ को मजबूत किया है। वहीं, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) और अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (UPSSSC) ने मिलकर लगभग 1 लाख से अधिक पदों पर पारदर्शी चयन प्रक्रिया पूरी की। युवाओं के लिए खुशखबरी यह है कि यह सिलसिला थमा नहीं है; वर्ष 2026 में 80 हजार से अधिक नए पदों पर भर्ती की तैयारी है।
रोजगार केवल सरकारी दफ्तरों की फाइलों तक सीमित नहीं रहता, असली रोजगार औद्योगिक गलियारों से पैदा होता है। साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में मात्र 14 हजार पंजीकृत कारखाने थे। आज यह संख्या बढ़कर 31 हजार के पार पहुंच गई है। यह दोगुना से अधिक की वृद्धि दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा प्रदेश की कानून-व्यवस्था और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) पर बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का एमएसएमई (MSME) सेक्टर आज राज्य की अर्थव्यवस्था की 'लाइफलाइन' बन चुका है। इस क्षेत्र से प्रदेश में लगभग 3 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों को दी गई संजीवनी ने न केवल स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है, बल्कि पलायन कर रहे युवाओं को अपने ही गांव और कस्बे में काम करने का अवसर दिया है।
अक्सर निवेश के प्रस्ताव केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन यूपी ने 'ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी' (GBC) के माध्यम से इसे हकीकत में बदला है। अब तक हुई चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के जरिए 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारा जा चुका है।
इन परियोजनाओं ने अकेले 60 लाख से अधिक रोजगार के अवसरों को जन्म दिया है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में 50 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश प्रस्तावों के पूर्ण क्रियान्वयन से 1 करोड़ से ज्यादा युवाओं को सेवायोजन के मौके मिलेंगे। यह आंकड़े बताते हैं कि यूपी अब केवल खेती-किसानी का प्रदेश नहीं, बल्कि भारी उद्योगों और आईटी सेक्टर का नया केंद्र बन रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन युवाओं को केवल 'जॉब सीकर' (नौकरी खोजने वाला) नहीं, बल्कि 'जॉब गिवर' (नौकरी देने वाला) बनाना रहा है। इसी उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' की शुरुआत की गई। वर्ष 2024-25 से अब तक 1.47 लाख युवाओं ने इस योजना का लाभ उठाकर अपने स्टार्टअप और उद्योग स्थापित किए हैं, जिससे 4.51 लाख अन्य लोगों को भी रोजगार मिला।
साथ ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र का विस्तार किया गया, जिससे 4.63 लाख नए रोजगार सृजित हुए। मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना के तहत 38 हजार से अधिक लाभार्थियों को करोड़ों की मार्जिन मनी बांटी गई, जिसने छोटे व्यापारियों के सपनों को पंख दिए।
उत्तर प्रदेश के इस विकास मॉडल का सबसे उज्ज्वल पक्ष महिलाओं की भागीदारी है। 'लखपति दीदी' योजना के माध्यम से प्रदेश की 18.55 लाख महिलाएं आज साल का 1 लाख रुपये से अधिक कमा रही हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज में आ रहे बड़े बदलाव का संकेत है।
बैंकिंग सेवाओं को घर-घर पहुंचाने वाली 'बीसी सखी' योजना ने तो वित्तीय लेन-देन के मायने ही बदल दिए। ग्रामीण महिलाओं ने बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में 42,711 करोड़ का लेन-देन कर 116 करोड़ का लाभांश कमाया। आज यूपी की महिलाएं केवल घर नहीं चला रहीं, बल्कि ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग लेकर आधुनिक खेती में भी हाथ बंटा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 1 करोड़ से अधिक महिलाएं आज आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं।
योगी सरकार ने खेल को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि करियर के रूप में स्थापित किया है। नई खेल नीति के तहत अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सीधे राजपत्रित पदों (Gazetted Posts) पर नियुक्ति दी जा रही है। अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में उच्च पदों पर आसीन किया जा चुका है, जो खेल जगत के लिए एक क्रांतिकारी कदम है।
नौ वर्षों का यह लेखा-जोखा इस बात की तस्दीक करता है कि उत्तर प्रदेश अपनी पुरानी पहचान को पीछे छोड़ चुका है। आज यहां का युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर लाचार होकर नहीं देखता, बल्कि निवेश के माहौल ने उसके लिए घर में ही द्वार खोल दिए हैं।
बुनियादी ढांचे का विकास, भ्रष्टाचार मुक्त चयन प्रक्रिया और महिला सशक्तिकरण के ठोस कदमों ने यूपी को एक 'सफल मॉडल' बना दिया है। निश्चित रूप से, 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की राह चुनौतीपूर्ण है, लेकिन जिस गति से वर्तमान में काम हो रहा है, उसे देखकर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में न केवल भारत बल्कि दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र बनकर उभरेगा।
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