UCC Day UK: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून के लागू होने के एक वर्ष पूरे होने पर मंगलवार को पूरे प्रदेश में इसे ‘समान नागरिक संहिता दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए इसे ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से शुरू हुआ यूसीसी केवल एक कानूनी व्यवस्था नहीं, बल्कि समानता, पारदर्शिता और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव है।
मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि यूसीसी का मूल उद्देश्य समाज में महिलाओं को उनके वैधानिक अधिकारों में पूर्ण समानता प्रदान करना है। यह कानून विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों में महिलाओं के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करता है और उन्हें न्यायसंगत अधिकार सुनिश्चित करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी के माध्यम से महिलाओं को सामाजिक और कानूनी रूप से सशक्त बनाया गया है। अब विवाह और तलाक से जुड़े मामलों में समान नियम लागू हैं, जिससे न्याय की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बनी है। उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों में भी समानता सुनिश्चित कर महिलाओं की स्थिति को और मजबूत किया गया है।
सीएम धामी ने बताया कि बीते एक साल में यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण और अन्य नागरिक सेवाओं में उल्लेखनीय तेजी आई है। राज्य सरकार ने 23 भाषाओं में सहायता और एआई आधारित सपोर्ट सिस्टम लागू किया है, जिससे प्रदेश के हर नागरिक को इस कानून का लाभ आसानी से मिल सके।
सोमवार को समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश-2026 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की मंजूरी मिली। संशोधन के तहत अब आपराधिक प्रक्रिया संहिता-1973 के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और दंडात्मक मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 को लागू किया गया है। धारा 12 में सचिव के स्थान पर अपर सचिव को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है। वहीं, विवाह के समय पहचान से जुड़ी गलत जानकारी को विवाह निरस्तीकरण का आधार माना गया है।
संशोधन के जरिए विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी और गैरकानूनी कृत्यों पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था भी की गई है। इसके साथ ही अनुसूची-2 में ‘विधवा’ शब्द के स्थान पर ‘जीवनसाथी’ शब्द का प्रयोग किया गया है, जो कानून को अधिक समावेशी बनाता है।
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