गैस की कमी के नाम पर साइबर ठगी का नया जाल, एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक करने की कोशिश

खबर सार :-
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण देश में कुकिंग गैस की किल्लत के बीच, साइबर अपराधी अब इस मौके का फायदा उठाकर आम जनता को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। इन साइबर अपराधियों द्वारा अपनी ठगी को अंजाम देने के लिए अपनाए गए एक नए तरीके का अब खुलासा हुआ है।

गैस की कमी के नाम पर साइबर ठगी का नया जाल, एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक करने की कोशिश
खबर विस्तार : -

झांसीः पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। इस स्थिति के कारण कुकिंग गैस की आपूर्ति को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। इसी चिंता और अफवाहों का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपना लिया है। अब गैस बुकिंग और फास्ट सर्विस देने के नाम पर लोगों को जाल में फंसाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने इस मामले में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

दर्जनों लोगों को भेजी गईं संदिग्ध फाइलें

जानकारी के अनुसार साइबर अपराधी लोगों के मोबाइल फोन पर पीडीएफ या एपीके फाइल भेज रहे हैं। पहली नजर में यह फाइल गैस बुकिंग या गैस की तत्काल डिलीवरी से जुड़ी जानकारी जैसी लगती है, लेकिन वास्तव में यह एक खतरनाक लिंक या एप्लिकेशन होती है। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल को खोलता या डाउनलोड करता है, उसका मोबाइल फोन हैक होने का खतरा बढ़ जाता है।

झांसी महानगर में पिछले कुछ दिनों के दौरान दर्जनों लोगों के मोबाइल फोन पर इस तरह की संदिग्ध फाइलें भेजी गई हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर थाना पुलिस ने लोगों के लिए अलर्ट जारी किया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल कोई बड़ी ठगी की घटना सामने नहीं आई है, लेकिन समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो लोग आर्थिक नुकसान का शिकार हो सकते हैं।

साइबर अपराधियों द्वारा पहले भी ई-चालान, बिजली बिल, बैंक नोटिफिकेशन या अन्य सरकारी सूचनाओं के नाम पर पीडीएफ और एपीके फाइलें भेजकर लोगों के मोबाइल फोन हैक किए जा चुके हैं। कई मामलों में लोगों के बैंक खाते तक खाली कर दिए गए थे। अब इसी तरीके को गैस बुकिंग के बहाने इस्तेमाल किया जा रहा है।

ट्रैक कर सकते हैं सभी जानकारियां

पुलिस के अनुसार इन एपीके फाइलों में खतरनाक मालवेयर छिपा होता है। जैसे ही यह फाइल फोन में इंस्टॉल होती है, यह अपने आप फोन के सिस्टम में छुप जाती है और धीरे-धीरे पूरे मोबाइल पर नियंत्रण कर लेती है। यह फाइल मोबाइल का क्लोन तैयार कर सकती है और फोन में मौजूद कई महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंच बना सकती है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मालवेयर फोन में आने के बाद ओटीपी पढ़ सकते हैं, व्हाट्सएप चैट तक पहुंच सकते हैं और यहां तक कि स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी कर सकते हैं। इसके अलावा यह बैंक लॉगिन, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी को भी ट्रैक कर सकते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति का पूरा मोबाइल फोन किसी अन्य व्यक्ति के नियंत्रण में आ सकता है और उसे इसकी जानकारी तक नहीं होती।

सावधान रहने की अपील

साइबर थाना पुलिस ने लोगों को इस तरह की ठगी से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है। सबसे पहले अपने व्हाट्सएप की सेटिंग में जाकर ऑटो डाउनलोड का विकल्प बंद कर दें। यदि किसी फाइल के अंत में “एपीके” लिखा हुआ दिखाई दे तो उसे तुरंत डिलीट कर दें। किसी भी अनजान नंबर से आई फाइल या अटैचमेंट को बिना जांचे-परखे डाउनलोड न करें।

इसके अलावा किसी भी अनवेरिफाइड ऐप या वेबसाइट पर अपनी आधार संख्या, बैंक डिटेल या अन्य निजी जानकारी साझा न करें। गूगल पर सर्च करके किसी भी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर ढूंढते समय भी सावधानी बरतें, क्योंकि कई बार नकली नंबर भी सामने आ जाते हैं।

अगर इन सभी सावधानियों के बावजूद कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अलावा ऑनलाइन पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है। साथ ही नजदीकी साइबर थाना या पुलिस थाने में लिखित आवेदन देना भी जरूरी है।

पुलिस का कहना है कि ठगी का अंदेशा होते ही तुरंत अपने बैंक को सूचना दें, ताकि खाते में होने वाले लेनदेन को रोका जा सके। सोशल मीडिया का उपयोग भी सावधानी के साथ करें। अनजान लोगों से दोस्ती न करें और किसी को भी अपनी निजी फोटो, वीडियो या बैंक से जुड़ी जानकारी साझा न करें। जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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