उदयपुरवाटीः उपखंड क्षेत्र में स्थित झडाया बालाजी मंदिर परिसर में आगामी रामनवमी के अवसर पर लगने वाले विशाल मेले की तैयारियों को लेकर गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक मंदिर के महंत महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 श्री सीताराम दास जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुई, जिसमें मेला आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
बैठक में मेले की तैयारियों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। आयोजकों ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी रामनवमी के अवसर पर 27 मार्च को झडाया बालाजी मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन किया जाएगा। इस मेले में आसपास के गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक शामिल होते हैं।
बैठक के दौरान समाजसेवी मदनलाल भावरिया ने अपने संबोधन में कहा कि मेले हमारी संस्कृति और परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में आपसी भाईचारा और सौहार्द की भावना मजबूत होती है। साथ ही नई पीढ़ी को भी हमारी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।
मेला व्यवस्थापक विकास जांगिड़ ने बताया कि मेले से एक दिन पहले 26 मार्च की रात को मंदिर परिसर में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाएगा।
उन्होंने आगे जानकारी देते हुए बताया कि 27 मार्च को मेले के मुख्य दिन महिला और पुरुष पहलवानों के बीच कुश्ती दंगल का भी आयोजन किया जाएगा। यह दंगल मेले का प्रमुख आकर्षण होगा, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
मेला समिति के सदस्य आशीष जांगिड़ ने बताया कि मेले के दिन रात के समय मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों द्वारा नृत्य, संगीत और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिससे दर्शकों का भरपूर मनोरंजन होगा।
बैठक में मेले की व्यवस्थाओं जैसे सुरक्षा, पानी, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। आयोजन समिति के सदस्यों ने मेले को सफल बनाने के लिए आपसी सहयोग और जिम्मेदारियों के बंटवारे पर भी चर्चा की।
इस दौरान बैठक में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें हनुमान प्रसाद यादव, कालूराम कस्वा, आनंद कुमावत, जगदीश प्रसाद बिछवालिया और छाजू राम शेरावत सहित अनेक ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए। रामनवमी के अवसर पर आयोजित यह मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता और सामाजिक मेलजोल का भी प्रतीक माना जाता है।
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